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ईएसआईसी अस्पताल, ओमपोरा का उद्घाटन: जम्मू-कश्मीर में श्रमिक कल्याण के नए अध्याय की शुरुआत

जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के ओमपोरा में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के 30 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक अस्पताल के उद्घाटन के साथ ही क्षेत्र में श्रमिकों और उनके आश्रितों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का एक नया अध्याय प्रारंभ हो गया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इस अस्पताल का उद्घाटन करते हुए इसे श्रमिक कल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

यह अस्पताल कश्मीर घाटी का पहला ईएसआईसी अस्पताल है, जो न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को बढ़ाएगा बल्कि सामाजिक सुरक्षा के ढांचे को भी मजबूत करेगा। 165 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस संस्थान को भविष्य में 100 बिस्तरों तक विस्तारित करने की क्षमता के साथ विकसित किया गया है, जिससे क्षेत्र के 50,000 से अधिक श्रमिकों और उनके परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।

श्रमिक गरिमा और राष्ट्र निर्माण का संबंध

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मनसुख मांडविया ने कहा कि “जो देश अपने श्रमिकों की गरिमा को महत्व देता है, वह प्रगति के पथ पर अजेय बन जाता है।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि किसी भी राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति उसके श्रमिक वर्ग के समर्पण और परिश्रम पर आधारित होती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की नीतियों का केंद्र बिंदु ‘श्रमिक प्रथम’ की अवधारणा को साकार करना है।

सामाजिक सुरक्षा कवरेज में ऐतिहासिक विस्तार

भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। International Labour Organization द्वारा प्रकाशित आंकड़ों का हवाला देते हुए मंत्री ने बताया कि देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज वर्ष 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

इसके साथ ही International Social Security Association द्वारा भारत को वर्ष 2025 में ‘सामाजिक सुरक्षा में उत्कृष्टता’ पुरस्कार से सम्मानित किया जाना इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता को दर्शाता है।

श्रम संहिताओं का प्रभाव: आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था

केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं को श्रम क्षेत्र में एक व्यापक संरचनात्मक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री ने कहा कि इन सुधारों ने श्रम तंत्र को अधिक पारदर्शी, श्रमिक-केंद्रित और भविष्य के अनुरूप बनाया है।

इन संहिताओं के तहत श्रमिकों को अनिवार्य नियुक्ति पत्र, न्यूनतम मजदूरी का अधिकार तथा वार्षिक स्वास्थ्य जांच जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। विशेष रूप से ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से होने वाली नियमित स्वास्थ्य जांच बीमारियों की प्रारंभिक पहचान और निवारक स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ईएसआईसी: श्रमिक सुरक्षा का मजबूत स्तंभ

Employees’ State Insurance Corporation (ईएसआईसी) की स्थापना वर्ष 1952 में हुई थी और तब से यह देश में श्रमिक कल्याण की प्रमुख संस्था के रूप में कार्य कर रही है। वर्तमान में यह योजना देशभर में 3.84 करोड़ बीमित व्यक्तियों और लगभग 15 करोड़ लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रही है।

ईएसआईसी का Ayushman Bharat Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana के साथ एकीकरण भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बना रहा है, जिससे लाभार्थियों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा मिल रही है।

जम्मू-कश्मीर में ईएसआई योजना का विस्तार

जम्मू-कश्मीर में ईएसआई योजना की शुरुआत 16 अक्टूबर 1989 को सीमित दायरे में हुई थी, जब जम्मू, कठुआ और श्रीनगर के लगभग 7,000 श्रमिकों को इसके अंतर्गत शामिल किया गया था। आज यह योजना केंद्र शासित प्रदेश के सभी जिलों में लागू हो चुकी है।

वर्तमान में यहां लगभग 1,83,119 बीमित व्यक्ति और करीब 7,00,000 लाभार्थी इस योजना से जुड़े हुए हैं। इसका संचालन जम्मू स्थित क्षेत्रीय कार्यालय तथा जम्मू-कश्मीर कर्मचारी राज्य बीमा सोसायटी (जेकेईएसआईएस) के माध्यम से किया जा रहा है।

श्रमिकों का सम्मान और सामाजिक संदेश

कार्यक्रम के दौरान मनसुख मांडविया ने अस्पताल निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को सम्मानित किया। यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि एक व्यापक संदेश देती है कि राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों की भूमिका को औपचारिक रूप से मान्यता दी जा रही है।

इसके अतिरिक्त, कई बीमित व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ भी प्रदान किए गए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उनका वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उसका उद्देश्य है।

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