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सेबी के 38वें स्थापना दिवस पर वित्त मंत्री का संबोधन: साइबर सुरक्षा, निवेशक जागरूकता और सरल नियमन पर जोर

Securities and Exchange Board of India के 38वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्य वक्तव्य देते हुए पूंजी बाजार के समक्ष उभरती चुनौतियों, विशेषकर साइबर सुरक्षा जोखिमों को लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर उन्होंने सेबी की देशव्यापी निवेशक जागरूकता पहल ‘मिशन जागरूक’ का डिजिटल शुभारंभ भी किया।

अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने कहा कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर हमलों का स्वरूप अधिक जटिल, तीव्र और स्वचालित होता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी, क्लियरिंग कॉरपोरेशन या बड़े ब्रोकर पर सफल साइबर हमला होता है, तो इससे राष्ट्रीय स्तर पर बाजार बाधित हो सकते हैं, निवेशकों की संपत्ति प्रभावित हो सकती है और वित्तीय प्रणाली में विश्वास को गंभीर झटका लग सकता है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरण हमलों को अधिक अनुकूलनशील और व्यापक बना रहे हैं, ऐसे में नियामक संस्थाओं और बाजार प्रतिभागियों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना होगा।

वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया पर फैल रहे फर्जी निवेश वीडियो और एप्स पर भी चिंता जताई, जिनमें डीपफेक तकनीक का उपयोग कर प्रमुख व्यक्तियों का प्रतिरूपण किया जा रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने सेबी के साइबर सुरक्षा एवं साइबर रेजिलिएंस फ्रेमवर्क (अप्रैल 2025 से प्रभावी) की सराहना करते हुए इसे एक सुदृढ़ आधार बताया, जिस पर आगे और सशक्त उपाय विकसित किए जा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि सेबी की डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल फॉरेंसिक प्रयोगशाला उन्नत एनालिटिक्स और एआई/एमएल मॉडल्स के माध्यम से जटिल बाजार हेरफेर और नेटवर्क आधारित धोखाधड़ी की पहचान कर रही है। साथ ही ‘SEBI Check’ जैसे प्लेटफॉर्म को निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण पहल बताते हुए उन्होंने इसके विस्तार और व्यापक प्रचार पर जोर दिया।

नियामकीय दृष्टिकोण पर बोलते हुए श्रीमती सीतारमण ने ‘सॉफ्ट-टच रेगुलेशन’ और सार्वजनिक परामर्श आधारित प्रक्रिया को प्रभावी शासन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक नियम-केंद्रित व्यवस्था के बजाय सिद्धांत-आधारित नियमन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे अनुपालन सरल हो और आर्थिक दक्षता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्रीय बजट 2023 में सार्वजनिक परामर्श को नियामकीय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाने की घोषणा की गई थी।

वित्त मंत्री ने निवेशक शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बाजार में विश्वास केवल रिटर्न पर नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण और समयबद्ध समाधान की उपलब्धता पर भी निर्भर करता है। उन्होंने अनधिकृत ‘फिन-फ्लुएंसर्स’ के खिलाफ सेबी की कार्रवाई की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि बिना लाइसेंस वित्तीय सलाह देकर निवेशकों के भरोसे का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

इसके अलावा, उन्होंने ‘निवेशक शिविर’ जैसे संयुक्त अभियानों की सराहना की, जो अप्रयुक्त वित्तीय संपत्तियों को खोजने और निवेशकों में जागरूकता बढ़ाने में सहायक हैं। वित्त मंत्री ने केवाईसी प्रक्रिया के सरलीकरण और डिजिटलाइजेशन की दिशा में सेबी को नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम में सेबी के अध्यक्ष Tuhin Kanta Pandey ने कहा कि सेबी ने वर्षों में स्क्रीन-आधारित ट्रेडिंग, डीमैट प्रणाली, रोलिंग सेटलमेंट और कॉर्पोरेट गवर्नेंस जैसे कई बुनियादी सुधार लागू किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में 5,900 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियां और 14 करोड़ से अधिक निवेशक हैं। पिछले दशक में बाजार पूंजीकरण में लगभग 15 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि म्यूचुअल फंड परिसंपत्तियां 20 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ी हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि प्राथमिक बाजार हर वर्ष लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने में सक्षम हो रहा है और कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार भी निरंतर विस्तार कर रहा है। पिछले एक वर्ष में सेबी ने विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक संवाद के माध्यम से कारोबार सुगमता बढ़ाने, नियमों को सरल बनाने और पूंजी निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए कई सुधार लागू किए हैं।

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