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पसीने से गढ़ता व्यक्तित्व खेल, अनुशासन और सपनों का उत्सव

7 मई – विश्व एथलेटिक्स दिवस
 

खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली एक सशक्त प्रक्रिया है। विश्व एथलेटिक्स दिवस इसी भावना का प्रतीक है जहाँ दौड़ते कदमों में केवल जीत की चाह नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और निरंतर प्रयास की ऊर्जा समाहित होती है।

एथलेटिक्स, जिसे खेलों की आधारशिला माना जाता है, हमें सिखाता है कि सफलता किसी एक क्षण का परिणाम नहीं, बल्कि लगातार किए गए प्रयासों की श्रृंखला है। मैदान में गिरकर फिर उठना, हार के बाद भी उम्मीद बनाए रखना यही वह गुण हैं जो एक खिलाड़ी को असाधारण बनाते हैं।

अब के डिजिटल युग में, जब युवा पीढ़ी स्क्रीन तक सीमित होती जा रही है, ऐसे में एथलेटिक्स का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है, बल्कि मानसिक संतुलन और आत्मबल को भी मजबूत करता है। दौड़, कूद, फेंक ये केवल खेल नहीं, बल्कि जीवन के संघर्षों का अभ्यास हैं।

भारत जैसे युवा देश में खेलों के प्रति बढ़ती रुचि एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में प्रतिभाओं को पर्याप्त संसाधन और मंच नहीं मिल पाता। जरूरत है कि हम खेलों को केवल शौक नहीं, बल्कि एक गंभीर करियर विकल्प के रूप में देखें और खिलाड़ियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं।

विश्व एथलेटिक्स दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। जब एक खिलाड़ी देश के लिए दौड़ता है, तो उसके हर कदम में पूरे राष्ट्र की उम्मीदें और गर्व समाहित होता है।

ही असली जीत का द्वार।।

सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
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