विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार प्रत्येक वर्ष विश्वभर में लगभग 39 करोड़ लोग डेंगू वायरस से संक्रमित होते हैं। इनमें से लगभग 9 से 10 करोड़ लोगों में बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं, जबकि बड़ी संख्या में संक्रमित व्यक्तियों में कोई लक्षण विकसित नहीं होते। वर्तमान समय में डेंगू भारत सहित अनेक देशों के लिए एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बन चुका है और कई क्षेत्रों में यह महामारी जैसी स्थिति उत्पन्न कर चुका है।
डेंगू एक वायरल संक्रामक रोग है, जो मादा एडीज एजिप्टि मच्छर के काटने से फैलता है। संक्रमित मच्छर के काटने के बाद वायरस रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाता है। डेंगू वायरस के चार अलग अलग सीरोटाइप होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को जीवन में एक बार डेंगू हो चुका है, तो दूसरी बार संक्रमण होने पर बीमारी अधिक गंभीर रूप ले सकती है और जटिलताओं की संभावना बढ़ जाती है।

पिछले कुछ वर्षों में मौसम संबंधी बदलावों ने डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार को बढ़ावा दिया है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, अधिक आर्द्रता तथा मौसम के असामान्य व्यवहार ने मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा की हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि वर्षा के बाद जमा होने वाला पानी मच्छरों के प्रजनन का प्रमुख स्रोत बनता है। वहीं गर्म और नम वातावरण में इनकी संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
डेंगू के शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज बुखार, तीव्र सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते, मतली, उल्टी तथा भूख में कमी शामिल हैं। जोड़ों और मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द होने के कारण इसे कभी कभी “ब्रेक बोन फीवर” भी कहा जाता है। सामान्यतः बुखार कुछ दिनों में उतर जाता है, लेकिन शरीर को पूरी तरह स्वस्थ होने में कई सप्ताह लग सकते हैं। बड़े बच्चों और वयस्कों में इसके लक्षण अक्सर अधिक स्पष्ट और गंभीर दिखाई देते हैं।
अधिकांश मामलों में डेंगू सामान्य बुखार के रूप में ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ रोगियों में यह डेंगू हेमोरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसी गंभीर स्थितियों का रूप ले सकता है। ऐसी परिस्थितियों में रक्तस्राव, प्लेटलेट्स में तेजी से कमी तथा शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। समय पर उपचार न मिलने पर यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अव्यवस्थित जल निकासी व्यवस्था और बदलती जीवनशैली के कारण ग्रामीण तथा उपशहरी क्षेत्रों में भी डेंगू के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पश्चिम बंगाल, दिल्ली, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य समय समय पर डेंगू के गंभीर प्रकोप का सामना करते रहे हैं।

