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एससीटीआईएमएसटी का 42वां दीक्षांत समारोह: चिकित्सा नवाचार, स्वदेशी तकनीक और स्वास्थ्य सेवा के भविष्य का नया दृष्टिकोण

तिरुवनंतपुरम स्थित श्री चित्रा तिरुनल चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (एससीटीआईएमएसटी) के 42वें वार्षिक दीक्षांत समारोह ने केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव ही नहीं मनाया, बल्कि भारत की स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा अनुसंधान और स्वदेशी तकनीकी विकास की नई दिशा को भी रेखांकित किया। विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने वर्चुअल माध्यम से समारोह को संबोधित करते हुए संस्थान की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली और वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण बताया।

समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। यह दीक्षांत समारोह संस्थान के स्वर्ण जयंती वर्ष के दौरान आयोजित हुआ, जिसने इसे और अधिक ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया।

राष्ट्रीय महत्व के संस्थान की बढ़ती भूमिका

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन कार्यरत एससीटीआईएमएसटी लंबे समय से चिकित्सा विज्ञान, हृदय रोग, तंत्रिका विज्ञान और चिकित्सा उपकरण विकास के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि संस्थान ने चिकित्सा शिक्षा, शोध और उन्नत उपचार प्रणालियों के क्षेत्र में जो मानक स्थापित किए हैं, वे देश के लिए प्रेरणादायक हैं।

उन्होंने लगभग 800 स्थायी संकाय सदस्यों की नियुक्ति को संस्थान की क्षमता विस्तार की दिशा में बड़ा कदम बताया। उनके अनुसार, इससे संस्थान की शैक्षणिक और शोध क्षमता लगभग दोगुनी हो जाएगी। उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नौ मंजिला प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) ब्लॉक तथा चार मंजिला सेवा ब्लॉक के निर्माण की सराहना करते हुए कहा कि नई सुविधाएं भारत में न्यूरोसर्जरी और कार्डियोलॉजी उपचार के सबसे बड़े केंद्रों में से एक विकसित करने में सहायक होंगी।

आयुष्मान भारत योजना के तहत उल्लेखनीय सेवाएं

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक संस्थान ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 17,000 से अधिक रोगियों का उपचार किया है। उन्होंने इसे सामाजिक स्वास्थ्य न्याय की दिशा में संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मालिनी वसुंधरा केंद्र की आधारशिला रखे जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केंद्र न्यूरोलॉजिकल और कैंसर संबंधी बीमारियों के लिए सटीक तथा कम चीर-फाड़ वाले उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होगा।

स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों के विकास में अग्रणी संस्थान

अपने संबोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने संस्थान की उस विशेष पहचान पर जोर दिया, जिसके तहत यहां विकसित चिकित्सा तकनीकों को उद्योगों तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने कहा कि एससीटीआईएमएसटी का प्रमुख लक्ष्य विश्वस्तरीय लेकिन किफायती और स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों का विकास करना है।

उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा विकसित कई तकनीकों का प्रतिवर्ष उद्योगों को हस्तांतरण किया जाता है और इस वर्ष भी सात नई प्रौद्योगिकियां उद्योग जगत को सौंपी जा रही हैं। यह पहल “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान की वैज्ञानिक अभिव्यक्ति के रूप में देखी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करना भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में एससीटीआईएमएसटी जैसे संस्थान स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बना रहे हैं।

अनुसंधान सहयोग और अंतरिक्ष चिकित्सा की नई संभावनाएं

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आठ राष्ट्रीय संस्थानों के बीच हुए समझौता ज्ञापन को “समन्वित अनुसंधान प्रणाली” की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बहु-विषयक अनुसंधान मॉडल आने वाले समय में चिकित्सा विज्ञान और तकनीकी नवाचार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और एससीटीआईएमएसटी के बीच अंतरिक्ष चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे सहयोग की भी सराहना की। उनके अनुसार, यह पहल चिकित्सा विज्ञान के उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और क्लिनिकल अभ्यास के नए अवसर खोलेगी। अंतरिक्ष यात्राओं से जुड़ी शारीरिक और मानसिक चुनौतियों के समाधान के लिए इस प्रकार का शोध भविष्य में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्वास्थ्य नीति और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 और आयुष्मान भारत जैसी पहलों की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था अब केवल रोग उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवारक, प्रोत्साहक, पुनर्वासात्मक और उपशामक स्वास्थ्य सेवाओं की ओर बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर समय रहते जांच और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाकर हृदय रोगों, तंत्रिका संबंधी बीमारियों और अन्य गैर-संचारी रोगों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली अब प्रजनन और बाल स्वास्थ्य सेवाओं से आगे बढ़कर मानसिक स्वास्थ्य, वृद्धावस्था देखभाल और गैर-संचारी रोगों की जांच जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और एबीएचए की भूमिका

स्वास्थ्य सचिव ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि एबीएचए खाता प्रणाली नागरिकों को दीर्घकालिक डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड उपलब्ध कराती है। इससे विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच रोगी की चिकित्सा जानकारी सुरक्षित और सहमति आधारित तरीके से साझा की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रणाली भविष्य में उपचार की सटीकता, रेफरल तंत्र और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रबंधन को मजबूत बनाएगी।

स्वास्थ्य अवसंरचना और पीएम-अभिम की दिशा

प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभिम) का उल्लेख करते हुए श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा कि इसका उद्देश्य महामारी जैसी चुनौतियों से निपटने में सक्षम स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करना है। उन्होंने राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए बढ़ाए जा रहे समर्थन को भी महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत देशभर में निर्मित 75 सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉकों तथा 22 नए एम्स संस्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दूरदराज और कम सुविधा वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है।

स्वास्थ्य सेवा में एआई और नई प्रौद्योगिकियां

स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग पर चर्चा करते हुए श्रीमती श्रीवास्तव ने सरकार की नई एआई रणनीतियों का उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के सहयोग से विकसित पहलों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के ओपन डेटा प्लेटफॉर्म “भाषिनी” का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में एआई आधारित निदान, डिजिटल रिकॉर्ड, डेटा विश्लेषण और स्मार्ट स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है।

नियामक सुधार और चिकित्सा नवाचार

श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में नियामक प्रक्रियाओं को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा कम जोखिम वाली दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के लिए नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में किए जा रहे सुधारों का उल्लेख किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियामक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सरलता से भारत में चिकित्सा अनुसंधान, स्टार्टअप नवाचार और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी उद्योग को नई गति मिलेगी।

विद्यार्थियों को सेवा, नैतिकता और निरंतर सीखने का संदेश

अपने संबोधन में स्वास्थ्य सचिव ने विद्यार्थियों को निरंतर सीखते रहने, मरीजों के प्रति सहानुभूति रखने और नैतिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में करुणा और संवाद तकनीकी दक्षता जितने ही महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने इंजीनियरों और चिकित्सकों के बीच सहयोग को स्वास्थ्य नवाचार की आधारशिला बताते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में वैज्ञानिक ईमानदारी और नैतिक आचरण की निर्णायक भूमिका होगी।

130 विद्यार्थियों को प्रदान की गई डिग्रियां

दीक्षांत समारोह में कुल 130 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोइमेजिंग, इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजी, कार्डियक इमेजिंग और न्यूरो-एनेस्थीसिया जैसे डीएम कार्यक्रमों के छात्र शामिल थे। इसके अतिरिक्त एमसीएच, पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप, मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ, पीएचडी तथा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को भी उपाधियां प्रदान की गईं।

समारोह में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए गए। संस्थान का स्वर्ण जयंती लोगो और इस अवसर के लिए विशेष रूप से तैयार गीत भी जारी किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. कृष्णा एम. एला, भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सह-संस्थापक, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा क्रिस गोपालकृष्णन तथा डॉ. संजय बिहारी सहित अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक, चिकित्सक, शिक्षक और अभिभावक समारोह में शामिल हुए।

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