दिल्ली, हिंदी की गूँज संस्था ने अपना 15वाँ स्थापना दिवस आभासी पटल पर गरिमामय ढंग से मनाया। संस्था की गौरवशाली यात्रा, समर्पण और साहित्यिक उपलब्धियों को समर्पित यह आयोजन अत्यंत प्रभावशाली रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. ममता श्रीवास्तव ने संस्था की उपलब्धियों और यात्रा का संक्षिप्त परिचय देते हुए किया। अध्यक्षता डॉ. सूर्य कुमार पांडेय ने की। परंपरा के अनुसार डॉ. वर्षा ने माहियों और दोहों के माध्यम से माँ सरस्वती का आवाहन किया। संयोजक नरेंद्र सिंह नीहार ने संस्था के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय राज करण सिंह को स्मरण करते हुए उनके हिंदी भाषा के प्रति योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में संस्था से जुड़े सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए और संस्था की प्रगति हेतु सुझाव भी प्रस्तुत किए। विशेष बात यह रही कि इस अवसर पर तीन पीढ़ियों की सहभागिता देखने को मिली, जो संस्था की व्यापकता और निरंतरता का प्रतीक रही।

वरिष्ठ पीढ़ी से डॉ. सूर्य कुमार पांडे, निर्मला जोशी, गिरीश जोशी और विमला रस्तोगी ने सहभागिता की। प्रौढ़ पीढ़ी से नरेंद्र सिंह नीहार, रमेश गंगेले, डॉ. ममता, डॉ. वर्षा, अतुल खरे, डॉ रानी गुप्ता, डॉ. बीर सिंह रावत, खेमेन्द्र सिंह और अनिल मिश्र ने अपने संस्मरणों के साथ काव्य पाठ प्रस्तुत किया। युवा पीढ़ी से राम कुमार पांडे और चरिताक्षी ने अपने विचार रखे। चरिताक्षी ने वीर रस की कविता सुनाकर सभी को प्रभावित किया।
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राज करण सिंह जी के परिवार से सचिन सिंह ने भी अपने संस्मरण साझा किए। अध्यक्षीय उद्बोधन से पूर्व डॉ. विनोद प्रसून ने अपनी रचना “सरल, सरस, मनुहारी है; अपनी हिंदी प्यारी है” सुनाकर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
अंत में अध्यक्ष डॉ. सूर्य कुमार पांडेय ने अपनी आशुकवि प्रतिभा से कार्यक्रम का सार प्रस्तुत किया और संस्था की उपलब्धियों की सराहना की। डॉ. वर्षा ने पार्श्व संचालक के रूप में दर्शकों की टिप्पणियों का वाचन किया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ डॉ. ममता श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का समापन किया। भावना अरोड़ा ‘मिलन’