नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने देशभर के प्रतिष्ठानों, नियोक्ताओं और सेवा प्रदाताओं से कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 (Employee Enrolment Campaign-2026) का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया है। यह अभियान उन लाखों कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया है जो विभिन्न कारणों से कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की वैधानिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से बाहर रह गए थे। 29 जून 2026 से प्रभावी यह विशेष अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक संचालित किया जाएगा।
भारत में असंगठित और अर्ध-संगठित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी कार्यरत रहे हैं जिन्हें पात्र होने के बावजूद ईपीएफ के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया। ऐसे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के लाभ तथा कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (ईडीएलआई) जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए ईपीएफओ ने कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 की शुरुआत की है, जो सामाजिक सुरक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अभियान के तहत वे कर्मचारी पात्र होंगे जो 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच किसी प्रतिष्ठान में कार्यरत रहे लेकिन किसी कारणवश ईपीएफ कवरेज से बाहर रह गए। हालांकि, उनके नामांकन के लिए यह आवश्यक होगा कि वे घोषणा की तिथि पर जीवित हों और संबंधित प्रतिष्ठान में कार्यरत हों। ईपीएफओ ने इसे नियोक्ताओं के लिए एक विशेष ‘वन-टाइम कम्प्लायंस विंडो’ के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे वे अपने पुराने अनुपालन संबंधी मामलों को नियमित कर सकें।
इस अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें कुछ परिस्थितियों में कर्मचारी अंशदान की छूट का प्रावधान भी किया गया है, यदि पूर्व में कर्मचारियों के वेतन से यह राशि नहीं काटी गई थी। इससे नियोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव कम होगा और वे स्वेच्छा से आगे आकर कर्मचारियों का नामांकन कराने के लिए प्रोत्साहित होंगे। हालांकि, यह सुविधा अभियान की निर्धारित शर्तों और नियमों के अधीन रहेगी।
नामांकन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है। नियोक्ताओं को निर्धारित ऑनलाइन माध्यम से कर्मचारियों की घोषणा और भुगतान प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रत्येक कर्मचारी के लिए उमंग ऐप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन आधारित यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) तैयार किया जाएगा। इसके बाद ईसीआर (इलेक्ट्रॉनिक चालान-कम-रिटर्न) के जरिए संबंधित अंशदान जमा किया जाएगा। इससे प्रक्रिया सरल, तेज और सत्यापन योग्य बनेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल अनुपालन सुधार का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक व्यापक सुधारात्मक पहल है। इससे उन कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जो वर्षों तक इन अधिकारों से वंचित रहे। साथ ही, इससे श्रम कानूनों के अनुपालन में भी सुधार आएगा और औपचारिक रोजगार व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ईपीएफओ ने विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्त संस्थाओं और अन्य संगठनों से भी अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार में सहयोग करने का अनुरोध किया है। संगठन द्वारा जागरूकता कार्यक्रम, संपर्क अभियान और डिजिटल माध्यमों के जरिए नियोक्ताओं एवं कर्मचारियों को अभियान की जानकारी दी जा रही है।
कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह न केवल अतीत की चूकों को सुधारने का माध्यम है, बल्कि लाखों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के मजबूत दायरे में लाने की दिशा में एक निर्णायक पहल भी है। ऐसे में सभी पात्र प्रतिष्ठानों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने रोजगार एवं वेतन रिकॉर्ड की समीक्षा कर पात्र कर्मचारियों की पहचान करें और 31 अक्टूबर 2026 की अंतिम तिथि से पहले उनका नामांकन सुनिश्चित करें। साभार : पीआईबी