
वरिष्ठ परामर्शदाता
एआरटीसी, एसएस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी
इरेक्टाइल डिसफंक्शन, जिसे स्तंभन दोष या नपुंसकता भी कहा जाता है, पुरुषों में होने वाली एक सामान्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इस स्थिति में व्यक्ति यौन संबंध स्थापित करने के लिए पर्याप्त स्तंभन प्राप्त करने या उसे बनाए रखने में कठिनाई महसूस करता है। यह केवल शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक कारण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और विभिन्न दीर्घकालिक बीमारियों के कारण इसकी व्यापकता लगातार बढ़ रही है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार चालीस से सत्तर वर्ष की आयु के लगभग आधे पुरुष किसी न किसी स्तर पर इस समस्या का अनुभव करते हैं तथा उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।
समाज में इस विषय से जुड़ी अनेक भ्रांतियां और झिझक मौजूद हैं। अधिकांश पुरुष इसे अपनी कमजोरी मानकर छिपाने का प्रयास करते हैं और चिकित्सकीय सलाह लेने से बचते हैं। परिणामस्वरूप समस्या धीरे धीरे गंभीर होती जाती है तथा उपचार भी अधिक जटिल और महंगा हो सकता है। इसलिए इसके बारे में सही जानकारी होना और समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लक्षण प्रायः धीरे धीरे विकसित होते हैं। सबसे प्रमुख लक्षण यौन उत्तेजना के बावजूद पर्याप्त स्तंभन प्राप्त न कर पाना है। कई बार स्तंभन प्रारंभ तो हो जाता है, लेकिन यौन क्रिया पूरी होने से पहले ही समाप्त हो जाता है। कुछ पुरुषों में यौन इच्छा भी धीरे धीरे कम होने लगती है। इसके साथ ही अपने यौन प्रदर्शन को लेकर चिंता, आत्मविश्वास में कमी और बार बार असफल होने का डर मानसिक तनाव को और बढ़ा देता है। यदि ये लक्षण लगातार बने रहें तो उन्हें सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।

इस समस्या के अनेक कारण हो सकते हैं। मानसिक कारणों में सबसे प्रमुख कारण यौन प्रदर्शन को लेकर अत्यधिक चिंता है। यदि किसी व्यक्ति को बार बार असफल होने का डर सताने लगे तो मस्तिष्क से लिंग तक पहुंचने वाले सामान्य तंत्रिका संकेत प्रभावित हो जाते हैं, जिससे स्तंभन में कठिनाई होती है। कार्यस्थल का दबाव, आर्थिक समस्याएं, पारिवारिक तनाव और व्यक्तिगत जीवन की चुनौतियां भी शरीर में तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ाती हैं, जो यौन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। अवसाद और चिंता जैसी मानसिक स्थितियां भी यौन इच्छा तथा प्रदर्शन दोनों को प्रभावित करती हैं।
वैवाहिक या प्रेम संबंधों में संवाद की कमी, भावनात्मक दूरी और आपसी मतभेद भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। कई बार अतीत के अप्रिय यौन अनुभव या असफलताओं की स्मृतियां व्यक्ति के मन में भय उत्पन्न करती हैं, जो लंबे समय तक स्तंभन दोष का कारण बनी रह सकती हैं।
कुछ दवाओं का नियमित सेवन भी इरेक्टाइल डिसफंक्शन से जुड़ा पाया गया है। उच्च रक्तचाप, अवसाद, हृदय रोग, कैंसर उपचार तथा मूत्र संबंधी रोगों में प्रयुक्त कुछ दवाएं रक्त प्रवाह अथवा तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकती हैं। इसी प्रकार मल्टीपल स्केलेरोसिस, स्ट्रोक, रीढ़ की हड्डी की चोट, मस्तिष्क के ट्यूमर, अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसे तंत्रिका संबंधी रोग भी स्तंभन क्षमता को प्रभावित करते हैं।
हार्मोन संबंधी विकार, विशेष रूप से लंबे समय से अनियंत्रित मधुमेह, इस समस्या का एक महत्वपूर्ण कारण है। मधुमेह के कारण नसों की क्षति, रक्त प्रवाह में कमी और हार्मोनल असंतुलन विकसित हो सकता है, जिससे स्तंभन क्षमता प्रभावित होती है। इसके अतिरिक्त श्रोणि क्षेत्र की सर्जरी, पेरोनी रोग तथा बढ़ती आयु भी जोखिम को बढ़ाते हैं। धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन और अन्य नशीले पदार्थों का उपयोग रक्त वाहिकाओं तथा तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाकर इस समस्या की संभावना को और बढ़ा देता है।
यदि स्तंभन संबंधी समस्या लगातार तीन महीने या उससे अधिक समय तक बनी रहे, यौन इच्छा में लगातार कमी महसूस हो, इस कारण दांपत्य जीवन प्रभावित होने लगे, मानसिक तनाव या अवसाद बढ़ने लगे अथवा आत्मसम्मान में गिरावट महसूस होने लगे, तो बिना संकोच किसी योग्य चिकित्सक या विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में पहचान और उपचार से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।
इरेक्टाइल डिसफंक्शन के उपचार और बचाव में मनोवैज्ञानिक परामर्श की महत्वपूर्ण भूमिका है। संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा व्यक्ति के नकारात्मक विचारों और अनावश्यक भय को पहचानकर उन्हें सकारात्मक सोच में बदलने में सहायता करती है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और यौन प्रदर्शन में सुधार आता है। विशेषज्ञ द्वारा दी जाने वाली सेक्स थेरेपी भी यौन गतिविधियों से जुड़े मानसिक दबाव को कम करने और स्वस्थ यौन व्यवहार विकसित करने में सहायक होती है।
युगल परामर्श भी कई मामलों में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। जब दोनों साथी अपनी भावनाओं, अपेक्षाओं और समस्याओं पर खुलकर चर्चा करते हैं, तो आपसी विश्वास और भावनात्मक निकटता बढ़ती है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और संबंधों में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
ध्यान, योग, प्राणायाम और माइंडफुलनेस जैसी तकनीकें मानसिक शांति प्रदान करती हैं तथा तनाव को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। नियमित रूप से गहरी और धीमी श्वास लेने का अभ्यास शरीर और मन दोनों को शांत करता है, जिससे यौन प्रदर्शन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी इस समस्या की रोकथाम का महत्वपूर्ण आधार है। नियमित व्यायाम रक्त संचार को बेहतर बनाता है, हृदय को स्वस्थ रखता है और मानसिक तनाव को कम करता है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और स्वस्थ वजन बनाए रखना भी आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान, शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करता है, तो उन्हें छोड़ना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
यह समझना आवश्यक है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक उपचार योग्य चिकित्सीय स्थिति है। समय पर सही परामर्श, आवश्यक जांच, जीवनशैली में सुधार, मनोवैज्ञानिक सहयोग और चिकित्सक द्वारा निर्धारित उपचार के माध्यम से अधिकांश पुरुष सामान्य और संतोषजनक यौन जीवन प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में जीवनसाथी का सहयोग, समझ और भावनात्मक समर्थन भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इस समस्या को छिपाने या अनदेखा करने के बजाय खुलकर विशेषज्ञ से सलाह लेना ही सबसे प्रभावी और जिम्मेदार कदम है। प्रस्तुति : उमेश कुमार सिंह
