25 सितंबर – विश्व फार्मासिस्ट दिवस
स्वास्थ्य सेवा केवल चिकित्सकों और अस्पतालों तक सीमित नहीं है। किसी भी रोगी के उपचार को सफल बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका उस विशेषज्ञ की होती है, जो यह सुनिश्चित करता है कि सही दवा, सही मात्रा में और सही तरीके से रोगी तक पहुँचे। यह जिम्मेदारी निभाते हैं फार्मासिस्ट। इसी अमूल्य योगदान के सम्मान में प्रतिवर्ष 25 सितंबर को विश्व फार्मासिस्ट दिवस मनाया जाता है।
फार्मासिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था की वह महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो चिकित्सक, रोगी और दवा के बीच सेतु का कार्य करते हैं। उनका दायित्व केवल दवाएँ उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि रोगी को दवा के सही उपयोग, संभावित दुष्प्रभाव, सावधानियों और उचित भंडारण की जानकारी देना भी है। उनकी सलाह कई बार उपचार को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बना देती है।
आज चिकित्सा विज्ञान निरंतर विकसित हो रहा है। नई-नई दवाओं का निर्माण हो रहा है और जटिल रोगों के उपचार के लिए आधुनिक औषधियाँ उपलब्ध हैं। ऐसे समय में फार्मासिस्ट की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि रोगी को सही दवा मिले और उसका उपयोग चिकित्सकीय निर्देशों के अनुसार ही हो।

भारत विश्व के प्रमुख औषधि उत्पादक देशों में शामिल है। देश की दवा उद्योग ने न केवल घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति की है, बल्कि विश्व के अनेक देशों को भी गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाएँ उपलब्ध कराई हैं। इस उपलब्धि के पीछे वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, औषधि निर्माताओं और फार्मासिस्टों का महत्वपूर्ण योगदान है।
कोविड-19 महामारी के दौरान फार्मासिस्टों ने जिस समर्पण और जिम्मेदारी का परिचय दिया, वह समाज कभी नहीं भूल सकता। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की, लोगों का मार्गदर्शन किया और स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस संकट ने यह स्पष्ट कर दिया कि फार्मासिस्ट केवल दवा विक्रेता नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के सच्चे प्रहरी हैं।
आज समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है स्व-चिकित्सा (Self-medication) की बढ़ती प्रवृत्ति। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन, विशेषकर एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित उपयोग, गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी वैश्विक चुनौती को जन्म दे रहा है। इस स्थिति में फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे लोगों को जागरूक करें और जिम्मेदार दवा उपयोग के लिए प्रेरित करें।

