नई दिल्ली: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता, पसंदीदा सुरक्षा भागीदार तथा विश्वास और विश्वसनीयता के प्रतीक के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और समुद्री जिम्मेदारियों का विस्तार पूरी दुनिया देख रही है।
रक्षा मंत्री 29 सितंबर को नई दिल्ली स्थित नौसेना भवन में भारतीय नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स सम्मेलन-2026 के दूसरे संस्करण को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में बढ़ती भीड़, छल और संदिग्ध गतिविधियों ने सुरक्षा चुनौतियों को पहले की तुलना में अधिक जटिल बना दिया है। ऐसे में समुद्री निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को नई क्षमताओं से लैस करने की आवश्यकता है।

वैश्विक समुद्री क्षेत्र में बढ़ी भारतीय नौसेना की मौजूदगी
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय युद्धपोतों की तैनाती दक्षिण चीन सागर से लेकर भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर तक हो रही है। यह भारतीय नौसेना की बढ़ती समुद्री क्षमता और व्यापक परिचालन पहुंच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक गहराई बनाए रखने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भारतीय नौसेना की भूमिका महत्वपूर्ण है।
नौसेना के आधुनिकीकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण की रणनीतिक आधारशिला है। समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के अलावा नौसेना देश की आर्थिक सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री शक्ति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
उन्होंने नौसेना से भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार, युद्ध के लिए सक्षम और विश्व स्तर पर सम्मानित बल के रूप में अपनी क्षमताओं को लगातार विकसित करने का आह्वान किया।
ऊर्जा सुरक्षा से सीधे जुड़ी है समुद्री सुरक्षा
पश्चिम एशिया में संकट के दौरान भारतीय नौसेना की भूमिका का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने ‘ऊर्जा सुरक्षा अभियान’ के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों, विशेष रूप से एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 85 से 90 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का करीब 50 प्रतिशत समुद्री मार्गों से आयात करता है। इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और रक्षा तैयारियों से सीधे जुड़ी हुई है।
स्वदेशी युद्धपोत निर्माण पर जोर
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारतीय नौसेना की भूमिका का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि देश का युद्धपोत निर्माण इकोसिस्टम अब वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित हो रहा है। हाल में भारतीय नौसेना में शामिल किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को अपनी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ मित्र देशों को युद्धपोतों के निर्यात की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा।
समुद्री निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की आवश्यकता
राजनाथ सिंह ने मौजूदा समुद्री निगरानी प्रणालियों के महत्व को स्वीकार करते हुए इनमें और सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समुद्री यातायात लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ गतिविधियों की जटिलता भी बढ़ी है। ऐसी स्थिति में समुद्री क्षेत्र की प्रभावी निगरानी के लिए उन्नत विश्लेषणात्मक क्षमताओं और आधुनिक तकनीक की आवश्यकता है।
उन्होंने वर्ष 2026 को भारतीय नौसेना के लिए महत्वपूर्ण वर्ष बताया। उनके अनुसार, इस वर्ष 18 युद्धपोतों को शामिल या कमीशन करने की योजना है, जो नौसेना के इतिहास में एक वर्ष के दौरान होने वाली सबसे बड़ी सैन्य वृद्धि होगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि ये घटनाक्रम भारत के घरेलू नौसैनिक जहाज निर्माण क्षेत्र की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाते हैं। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए क्षमता विस्तार का कार्य लगातार जारी रखना होगा।
नौसेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
राजनाथ सिंह ने ‘सभी रैंक, सभी भूमिकाएं’ के दृष्टिकोण के तहत महिला सशक्तिकरण, भर्ती और नवाचार के लिए नौसेना द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों और विमानों पर महिला अधिकारियों की तैनाती को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने ‘नाविका सागर परिक्रमा’ सहित नौसैनिक नौवहन अभियानों में महिलाओं की भागीदारी का भी उल्लेख किया।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग को मिला विस्तार
रक्षा मंत्री ने संयुक्त समुद्री बलों के अंतर्गत संयुक्त कार्य बल-154 की कमान संभालने के लिए भारतीय नौसेना को बधाई दी। उन्होंने इसे क्षेत्रीय सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान बताया।
उन्होंने सीटीएफ-154 की कमान भारत के पास रहने के दौरान कोच्चि में आयोजित ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस’ का भी उल्लेख किया। इसमें 27 देशों के 276 कर्मियों के साथ 76 प्रशिक्षक एवं विषय-विशेषज्ञ तथा चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भाग लिया।
राजनाथ सिंह ने ‘लोकयान-26’ के लिए आईएनएस सुदर्शनी की तैनाती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने भारत की समुद्री कूटनीति को मजबूत करने के साथ अमेरिका, अटलांटिक और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में भारतीय प्रवासियों से संपर्क बढ़ाने और देश की समुद्री विरासत को प्रदर्शित करने में योगदान दिया।
प्रचालनगत तैयारियों की समीक्षा पर केंद्रित सम्मेलन
अपने संबोधन के अंत में रक्षा मंत्री ने बदलती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बीच उच्च स्तर की युद्ध तत्परता बनाए रखने और अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए भारतीय नौसेना की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री शक्ति का उद्देश्य केवल समुद्र में राष्ट्रीय ध्वज की उपस्थिति सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि जहां तिरंगा दिखाई दे, वहां वह सुरक्षा, विश्वास और भरोसे का प्रतीक बने। रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना को सरकार की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा, “यदि समुद्र सुरक्षित हैं, तो भारत सुरक्षित होगा; और यदि भारत सुरक्षित है, तो विकसित भारत का संकल्प और भी सुदृढ़ होगा।”