01 अक्टूबर, राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर विशेष
राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस हर वर्ष 1 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूक करना और उन्हें जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करना है। रक्त किसी कारखाने में तैयार नहीं किया जा सकता। इसे केवल स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दान किया जा सकता है। यही कारण है कि स्वैच्छिक रक्तदान मानव जीवन की रक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
दुर्घटना, गंभीर बीमारी, बड़ी सर्जरी, प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं, कैंसर के उपचार, रक्त संबंधी विकारों तथा अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों में मरीजों को रक्त या उसके विभिन्न घटकों की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे समय में अस्पतालों और ब्लड बैंकों में पर्याप्त रक्त उपलब्ध होना किसी व्यक्ति के जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकता है। इसलिए रक्तदान केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवता के प्रति एक महत्वपूर्ण योगदान भी है।
रक्तदान करने वाले व्यक्ति के मन में सबसे बड़ा संतोष यह होता है कि उसके द्वारा दिया गया रक्त किसी अनजान व्यक्ति के जीवन को बचाने में काम आ सकता है। एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान किसी दुर्घटना में घायल व्यक्ति, गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज, सर्जरी की आवश्यकता वाले रोगी या रक्त की कमी से पीड़ित व्यक्ति के लिए जीवन का आधार बन सकता है। यही वजह है कि रक्तदान को महादान कहा जाता है।

रक्तदान के प्रति समाज में आज भी कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। कुछ लोगों को लगता है कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आ जाती है या स्वास्थ्य पर लंबे समय तक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वास्तव में स्वस्थ और पात्र व्यक्ति द्वारा निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुसार किया गया रक्तदान सामान्यतः सुरक्षित प्रक्रिया है। रक्तदान से पहले दाता की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति की जांच की जाती है। उसका रक्तचाप, नाड़ी, तापमान, वजन और अन्य आवश्यक मानकों का परीक्षण किया जाता है। यदि चिकित्सकीय टीम को लगता है कि व्यक्ति रक्तदान के लिए उपयुक्त है, तभी उससे रक्त लिया जाता है।
एक सामान्य रक्तदान के दौरान सीमित मात्रा में रक्त लिया जाता है। शरीर में मौजूद रक्त का एक हिस्सा ही दान किया जाता है और बाद में शरीर स्वाभाविक रूप से रक्त के आवश्यक घटकों की पूर्ति करता है। रक्तदान की पूरी प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल होती है और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में की जाती है। रक्तदान के बाद दाता को कुछ समय आराम करने और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है।
रक्त के विभिन्न घटकों का उपयोग अलग अलग चिकित्सकीय परिस्थितियों में किया जाता है। एकत्र किए गए रक्त को आवश्यकता के अनुसार विभिन्न घटकों में विभाजित किया जा सकता है, जिनका उपयोग अलग अलग मरीजों के उपचार में किया जाता है। इसी कारण एक रक्तदान कई मरीजों के उपचार में योगदान दे सकता है। हालांकि, किसी व्यक्ति का रक्त कितने मरीजों के लिए उपयोगी होगा, यह रक्त के घटकों, उसकी गुणवत्ता और अस्पताल की आवश्यकता पर निर्भर करता है।
रक्त समूहों की जानकारी भी रक्तदान के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रक्त के प्रमुख समूह ए, बी, एबी और ओ होते हैं तथा इनमें सकारात्मक और नकारात्मक आरएच फैक्टर भी होता है। सामान्य परिस्थितियों में मरीज को उसकी चिकित्सकीय आवश्यकता और उपयुक्त रक्त समूह के अनुसार ही रक्त चढ़ाया जाता है। ओ नेगेटिव रक्त को लाल रक्त कोशिकाओं के संदर्भ में अक्सर सार्वभौमिक दाता समूह कहा जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर परिस्थिति में बिना जांच के किसी भी व्यक्ति को यही रक्त दिया जा सकता है। आपातकालीन स्थिति में भी चिकित्सा विशेषज्ञ रक्त की अनुकूलता और उपलब्धता के आधार पर निर्णय लेते हैं।
रक्तदान के लिए आयु, वजन और स्वास्थ्य संबंधी कुछ मानदंड निर्धारित होते हैं। सामान्यतः 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के स्वस्थ वयस्क रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन अधिकतम आयु सीमा और रक्तदान के बीच आवश्यक अंतराल संबंधित देश के नियमों तथा रक्त केंद्र के दिशानिर्देशों के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए रक्तदान करने से पहले संबंधित ब्लड बैंक या अधिकृत रक्तदान केंद्र से वर्तमान पात्रता मानकों की जानकारी लेना आवश्यक है।
हर व्यक्ति रक्तदान के लिए उपयुक्त नहीं होता। यदि किसी व्यक्ति को उस समय बुखार, संक्रमण या कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो उसे रक्तदान नहीं करना चाहिए। इसी तरह हाल में हुई किसी बीमारी, सर्जरी, दवा के सेवन, गर्भावस्था या अन्य चिकित्सकीय परिस्थिति में रक्तदान की पात्रता अलग हो सकती है। इसलिए रक्तदान से पहले स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी चिकित्सकीय टीम को देना जरूरी है।
रक्तदान को लेकर यह धारणा भी सही नहीं है कि इससे वजन कम होता है या हृदय रोग और कैंसर से निश्चित रूप से बचाव होता है। रक्तदान का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों के लिए सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराना है। रक्तदान से जुड़े व्यक्तिगत स्वास्थ्य लाभों के बारे में दावे करने के बजाय यह समझना अधिक महत्वपूर्ण है कि स्वस्थ व्यक्ति द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान समाज के लिए कितना उपयोगी है।
रक्तदान के बाद यदि किसी व्यक्ति को लगातार चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, असामान्य पसीना या अन्य परेशानी महसूस होती है, तो उसे इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है और अगली बार रक्तदान करने से पहले स्वास्थ्यकर्मियों को पिछली प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी देनी चाहिए।

