हृदय रोग को लंबे समय तक पुरुषों से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि महिलाएं भी इससे उतनी ही प्रभावित हो सकती हैं। हृदय हमारे शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है और इसकी सेहत की अनदेखी गंभीर परिणामों का कारण बन सकती है। हृदय रोग किसी व्यक्ति के लिंग को देखकर नहीं होता। यह किसी को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए महिलाओं के लिए भी अपने हृदय के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना बेहद जरूरी है।
आज की बदलती जीवनशैली में महिलाओं पर जिम्मेदारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। परिवार और कार्यस्थल की जिम्मेदारियों के बीच वे अक्सर अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं दे पातीं। छोटी मोटी तकलीफों को नजरअंदाज करना भी उनकी एक सामान्य प्रवृत्ति बन गई है। कई बार यही लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले सकती है। इसलिए किसी भी असामान्य लक्षण को मामूली समझकर टालना उचित नहीं है।
हृदय रोग के प्रमुख कारण
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। इसके साथ ही खानपान की बदलती आदतों के कारण तेल, घी और अन्य वसा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन भी बढ़ा है। जब शरीर पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करता, तो अतिरिक्त कैलोरी और वसा शरीर में जमा हो सकती है। इसके साथ उच्च रक्तचाप, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, धूम्रपान, तनाव और अन्य जोखिम कारक मिलकर हृदय रोग की आशंका बढ़ा सकते हैं।
इन कारणों से रक्त वाहिकाओं में धीरे धीरे वसा और अन्य पदार्थों का जमाव हो सकता है, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। समय के साथ यह स्थिति हृदय संबंधी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
महिलाओं में समस्या का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वे अक्सर अपने लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेतीं। पुरुषों में कोई असामान्य दर्द या तकलीफ होने पर डॉक्टर से संपर्क करने की संभावना अधिक देखी जाती है, जबकि कई महिलाएं अपनी परेशानी को थकान, कमजोरी या सामान्य अस्वस्थता मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। इसके कारण बीमारी की पहचान और उपचार में देरी हो सकती है।

हृदय रोग के लक्षण
महिलाओं में हृदय रोग के लक्षण हमेशा एक जैसे नहीं होते। कुछ प्रमुख संकेतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इनमें छाती या उसके आसपास दर्द, दबाव या असहजता, सांस लेने में परेशानी, जी मिचलाना या उल्टी, चक्कर आना, आंखों के सामने अंधेरा छाना, असामान्य घबराहट, अत्यधिक या असामान्य थकान और अधिक पसीना आना शामिल हो सकते हैं।
इनमें से कोई लक्षण अचानक या असामान्य रूप से दिखाई दे और विशेषकर छाती में असहजता या सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है।

