शिक्षक कवि सम्मेलन में 19 राज्यों के 93 शिक्षक कवियों ने दी रचनात्मक प्रस्तुतियाँ
नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईईटी) द्वारा हिंदी माह-2026 के अंतर्गत ‘डिजिटल शिक्षा में राजभाषा हिंदी एवं साहित्य’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के तहत शिक्षक कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश के 19 राज्यों से आए 93 शिक्षक कवियों ने अपनी विविध रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और समकालीन सरोकारों को स्वर दिया।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस एनसीईआरटी के संयुक्त निदेशक प्रो. अमरेंद्र प्रसाद बेहरा, प्रो. फारूक अंसारी, मुख्य अतिथि एवं भाषाविद् जगदीश रामपुरी तथा वक्ता प्रो. रामजन्म शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्याम सुशील ने की। इस अवसर पर शिक्षक कवियों ने कविता के माध्यम से शिक्षा, समाज, संस्कृति, मानवीय संवेदनाओं, राष्ट्रबोध और बदलते समय के विविध पक्षों को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम के द्वितीय दिवस शिक्षा मंत्रालय से जुड़े शुभंकर मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार एवं लेखिका अलका सिन्हा उपस्थित रहीं। उन्होंने हिंदी भाषा, साहित्य और शिक्षा के बदलते स्वरूप पर विचार साझा करते हुए रचनात्मक अभिव्यक्ति के महत्व को रेखांकित किया।

सम्मेलन में ‘हिंदी की गूँज’ संस्था की ओर से नरेंद्र सिंह नीहार, रमेश कुमार गंगेले, डॉ. ममता श्रीवास्तव सरुनाथ, तरुणा पुंडीर, भावना अरोड़ा, डॉ. वर्षा सिंह, डॉ. वर्षा कोस्टा, नेहा गुप्ता, शिखा सिंह, मंजू शर्मा, रानी गुप्ता और अलका सोनी सहित अनेक साहित्यकारों एवं शिक्षक कवियों ने सहभागिता की। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया।
आयोजन का प्रमुख उद्देश्य डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करना तथा शिक्षकों एवं साहित्यकारों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए सार्थक मंच उपलब्ध कराना था। कार्यशाला और कवि सम्मेलन में हिंदी को आधुनिक तकनीक, डिजिटल माध्यमों और शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।
प्रो. राजेन्द्र पाल गौतम के मार्गदर्शन तथा डॉ. रवीन्द्र कुमार के संयोजन में आयोजित यह कार्यक्रम सुव्यवस्थित, गरिमापूर्ण और रचनात्मक वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शामिल शिक्षक कवियों ने न केवल अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को साहित्यिक आनंद प्रदान किया, बल्कि एनसीईआरटी जैसे शैक्षिक संस्थान के माध्यम से डिजिटल शिक्षा, नई तकनीक और हिंदी के समन्वय की संभावनाओं को भी समझा।
कार्यक्रम के दौरान निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी का वक्तव्य भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उनके विचारों ने हिंदी, शिक्षा, साहित्य और तकनीक के परस्पर संबंधों को नई दृष्टि प्रदान की। दो दिवसीय आयोजन ने यह संदेश दिया कि डिजिटल युग में हिंदी की प्रासंगिकता न केवल कायम है, बल्कि आधुनिक शिक्षा और रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए माध्यमों के साथ उसका विस्तार भी संभव है।