मन में जब उजियारा भरता।
सघन तमस भी हारा करता।
नेहिल निर्झर बहते झर-झर,
कष्ट कलुष तन सारा हरता।।
जीवन में सुख शांति मिलेगी।
काया कंचन कांति मिलेगी।
निकट प्रकृति के जाने पर ही,
तन-मन को विश्रांति मिलेगी।।
नदी ताल गिरि सुंदर कानन।
खुशी बांटते सुरभित उपवन।
परहित जीवन श्रेष्ठ सदा ही,
कथा बांचते प्रमुदित आनन।।

शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)