आज मानव सभ्यता जिस सबसे बड़े संकट के सामने खड़ी है, वह युद्ध, महामारी या आर्थिक…
Category: पर्यावरण
सृष्टि संतुलन के लिये वनों की पुकार सुननी होगी
21 मार्च को प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस केवल एक प्रतीकात्मक उत्सव नहीं, बल्कि…
मानव अब भी चेत जा; तूने प्रकृति को अभी भी जाना नहीं..?
भारतवर्ष में वनसंपदा का बहुत महत्व है। मान्यता है कि सघन वनों की छाया में ही…
दूषित जलः विकास के दावों पर एक गंभीर प्रश्न
अक्सर कहा जाता है कि जल ही जीवन है। किंतु यदि यही जल दूषित हो जाए…
जैव विविधता की रक्षा या विकास की अंधी दौड़
विश्व वन्य जीव दिवस केवल एक औपचारिक अंतरराष्ट्रीय दिवस नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अस्तित्व से…
दुनिया जल के वैश्विक दिवालियापन की ओर बढ़ रही है
“जल है तो जीवन है”-यह पंक्ति कोई नारा भर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का शाश्वत सत्य…
“मनुष्य” जल- जन-जमीन- जगत -जंतु – जानवरों का भस्मासुर बन बैठा
आज मानव-समाज प्रगति के नाम पर प्रकृति का ऐसा विनाश कर रहा है, जो आने वाली…
वैज्ञानिकों ने धातु प्रदूषण से निपटने में स्पंजी सूक्ष्मजीवों के महत्व को उजागर किया
ताजे पानी के स्पंजी जीव पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण विविध सूक्ष्मजीव समुदाय से…
निर्मल नदियां बहती रहेंगी तो जग-जीवन बचा रहेगा
नदियां भूतल पर प्रवाहित जलस्रोत मात्र नहीं हैं अपितु सभ्यता की जननी हैं, सांस्कृतिक परम्परा का…
ओजोन परतः जीवन की ढाल और उसके संरक्षण का संकल्प
ओजोन परत पृथ्वी पर मानव जीवन की ढाल है, क्योंकि यह समताप मंडलीय परत पृथ्वी को…