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जहाँ बुज़ुर्ग सम्मानित होते हैं, वहीं संस्कार जीवित रहते हैं

"मातृदेवो भवः, पितृदेवो भवः"—भारतीय संस्कृति का यह अमर संदेश केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का…

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