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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति को अलग अलग राज्यों में अलग अलग नाम से जाना जाता है

विनीता झा
कार्यकारी संपादक

भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। यह बात शत-प्रतिशत सत्य भी है। साल की शुरुआत होते ही जनवरी के मध्य आते ही मकर संक्रांति का पर्व देश के विभिन्न हिस्सों में अलग अलग तरीके से और बहुत धूमधाम से मनाए जाने की शुरुआत जोरों-शोरो से होने लगती है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति को अलग अलग राज्यों में अलग अलग नाम से जाना जाता है। जैसे उत्तरायण, पोंगल, खिचड़ी, आदि।
इस साल कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति
मकर संक्रांति के दिन पूजा पाठ, स्नान, दान, पूजा पाठ और तिल खाने की परंपरा है। मकर संक्रांति का पर्व वैसे तो हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। लेकिन इस बार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। दरअसल, मकर संक्रांति की तिथि का आरंभ रात में 8 बजकर 42 मिनट से हो रहा है। ऐसे में उदय तिथि में यानी 15 जनवरी 2023 को मकर संक्रांति मनाई जाएगी।
क्या है मकर संक्रांति की पौराणिक कथा
इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद स्नान दान करने का बड़ा महत्व है। इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद सूर्य को अर्घ्य दें, सूर्य के बीज मंत्र का जप करें। श्रीमद्भागवत गीता के एक अध्याय का पाठ जरूर करें। इस दिन शनिदेव से जुड़ा दान करने का भी विशेष महत्व हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। इसे लेकर एक पौराणिक कथा और है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार करके उन पर विजय प्राप्त की थी। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इसके अलावा कई जगहों पर इस पर्व को पतंग उड़ाकर भी मनाया जाता है।

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