NEW English Version

भारतीय वैक्सीन बाजार के 2025 तक 252 अरब रुपये तक पहुंचने की उम्मीद : डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने लंदन विज्ञान संग्रहालय का दौरा किया और सफल कोविड वैक्‍सीन पहल में भारत के अनुभव को साझा किया

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान, राज्‍य मंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज 175 साल पुराने लंदन विज्ञान संग्रहालय का दौरा किया और भारत में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा इसी तरह के विज्ञान संग्रहालयों की स्थापना की पहल का अनुभव साझा किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन संग्रहालयों को स्थापित करने का विचार आम नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं को उनकी छिपी क्षमताओं का पता लगाने में मदद करना और कभी-कभी उनके अंतर्निहित कौशल की खोज करना भी है, जिसका आभास उन्‍हें स्‍वयं भी नहीं होता। यह संग्रहालय जिज्ञासा के भाव को बढ़ाते हैं, इससे उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और रचनात्मक नवाचार में मदद मिलती है।

विज्ञान संग्रहालय लंदन में दक्षिण केंसिंग्टन प्रदर्शनी रोड पर स्थित है। इसकी स्थापना 1857 में हुई थी।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह का यह दौरा मुख्य रूप से ऊर्जा क्रांति, टीके और अंतरिक्ष गैलरी से संबंधित क्षेत्रों पर केंद्रित था। इस दौरान संग्रहालय का प्रबंधन भारत की कोविड सफलता की कहानी से बहुत प्रभावित था।

डॉ. सिंह को कोविड महामारी के इतिहास को दर्शाने के लिए बनाया गया विशेष पवेलियन दिखाया गया। यहां पर कोविड का टीका लगवाने के लिए आए पहले व्यक्ति से जागरूकता अभियान की यात्रा को क्रमानुसार दिखाया गया है। कोविड प्रबंधन और रोकथाम में भारत की अग्रणी भूमिका को पवेलियन में विशेष स्‍थान दिया गया है।

उन्‍होंने एक अन्‍य मंडप भी देखा जिसे भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित उष्णकटिबंधीय रोगों के लिए विशेष रूप से समर्पित पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम को हिन्‍दी भाषा में लिखे गए बैनरों के साथ दर्शाया गया था। भारत के नेतृत्‍व में चलाये गये पोलियो उन्‍मूलन अभियान ने स्‍वास्‍थ्‍य सेवा के क्षेत्र में विशिष्‍ठ रोल मॉडल का स्‍थान अर्जित किया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत तेजी से दुनिया की प्रमुख जैव-अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है पिछले कुछ वर्षों में यह नवाचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्र कई गुना बढ़ गया है। उन्‍होंने बताया कि भारत ने केवल दो वर्षों में चार स्वदेशी टीके विकसित किए हैं।

उन्‍होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने “मिशन कोविड सुरक्षा” के माध्यम से चार टीके वितरित किए हैं, कोवैक्सीन के निर्माण में तेजी आई है और भविष्य के टीकों के सुचारू विकास के लिए आवश्यक मूलभूत ढांचा तैयार किया है।  हमारा देश महामारी का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुनिया अब निवारक स्वास्थ्य सेवा में भारत की उत्कृष्ट क्षमताओं से अवगत हो रही है और अब हम इस श्रृंखला में कई अन्‍य टीकों को विकसित करने की प्रक्रिया की विकास यात्रा में है। हाल ही में पहली डीएनए वैक्सीन के बाद, पहली नेज़ल वैक्‍सीन (नाक से दी जाने वाली वैक्‍सीन) का भी सफलतापूर्वक निर्माण किया गया है। देश में ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) से संबंधित एक अन्य टीका भी विकसित किया गया है, जिससे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में मदद मिली है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने रेखांकित किया कि भारतीय वैक्सीन बाजार ने वैश्विक स्तर पर अपना विशिष्‍ट स्‍थान बनाया है। भारत का वैक्‍सीन बाजार के 2025 तक 252 बिलियन रुपये के मूल्‍यांकन तक पहुंचने की उम्‍मीद है। डॉ. सिंह ने ब्रिटेन के साथ बायोटेक स्टार्टअप और वैक्सीन विकास के क्षेत्र में सहयोग का आह्वान किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ब्रिटेन की 6 दिवसीय यात्रा पर हैं और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक उच्च स्तरीय आधिकारिक भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

Book Showcase

Best Selling Books

Ikigai: The Japanese secret to a long and happy life

By Héctor García, Francesc Miralles

₹318

Book 2 Cover

Why I am an Atheist and Other Works

By Bhagat Singh

₹104

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

Until Love Sets Us Apart

By Aditya Nighhot

₹176

Translate »