NEW English Version

केवीआईसी चेयरमैन ने अरुणाचल प्रदेश तथा असम में चल रही खादी और ग्रामोद्योग विकास योजना से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘लोकल से ग्लोबल’ अभियान को पूर्वोत्तर राज्यों के सुदूर गांवों तक पहुंचाने के प्रयास में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने असम और अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया। 8 मई से 13 मई के अपने प्रवास के दौरान उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में चल रही खादी और ग्रामोद्योग विकास योजना से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा के साथ-साथ प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के लाभार्थियों से संपर्क भी किया, जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान में लोगों को शामिल होने के लिए प्रेरित किया। अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए शुक्रवार को तवांग में पीएमईजीपी जागरूकता शिविर का भी आयोजन किया गया।

इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए केवीआईसी के अध्यक्ष ने तवांग शहर में केवीआईसी ईटानगर का उप-कार्यालय खोलने की भी घोषणा की। तवांग के लोगों बहुत समय से यहाँ कार्यालय खोलने की मांग कर रहे थे। केवीआईसी ईटानगर कार्यालय से तवांग पहुंचने में ही लगभग 48 घंटे यानी 2 दिन लगते हैं। तवांग में केवीआईसी का उप-कार्यालय खुलने के बाद यह तावांग शहर के युवाओं की अधिकतम रोजगार अवसर और जरूरतों को पूरा करेगा।

केवीआईसी के अध्यक्ष ने पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा 8 मई को असम से शुरू किया गया था। उन्होंने यहाँ दो अलग-अलग कार्यक्रमों में लाभार्थियों को मधुमक्खी पालन के डिब्बे, आचार बनाने की मशीन और अगरबत्ती बनाने की स्वचालित मशीनों का भी वितरण किया। तुमुलपुर के कुमारीकाटा गांव में उन्होंने 50 मधुमक्खी पालकों को 500 मधुमक्खी बक्से वितरित किए, जबकि गुवाहाटी के केवीआईसी परिसर में 40 अचार बनाने वाली मशीनें और 20 स्वचालित अगरबत्ती बनाने वाली मशीनें लाभार्थियों को सौंपी। इसी क्रम में यहाँ ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत सिक्स-माइल गुवाहाटी में फुटवियर-उद्योग से संबंधित एक पायलट परियोजना भी शुरू की गई।

9 मई को गुवाहाटी से तवांग जाते हुए अध्यक्ष ने पश्चिमी कामेंग जिले के बोमडिला में पीएमईजीपी के तहत स्थापित कई औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण भी किया। वहाँ के युवा उद्यमियों को संबोधित करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विश्व-गुरु बनने की ओर बढ़ रहा है। खादी ग्रामोद्योग के स्वदेशी, स्थानीय उत्पाद अब तेजी से अपनी वैश्विक पहचान बना रहे हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के युवा-उद्यमियों का आह्वान किया कि वे स्थानीय उत्पादों को ऐसी उच्च-गुणवत्ता के साथ तैयार करें कि वैश्विक स्तर पर उनकी मांग बढ़े।

10 मई को श्री मनोज कुमार ने लोहू, अरुणाचल-प्रदेश में ग्रामोद्योग विकास योजना और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत आयोजित एक जागरूकता शिविर में भी भाग लिया, जहाँ बड़ी संख्या में युवाओं और लाभार्थियों ने भी शिविर में भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज वे स्वयं अरुणाचल के युवाओं के बीच प्रधानमंत्री का विजन लेकर आए हैं जिसमें उन्होंने देश के युवाओं से यह अपील की है कि वे ‘रोजगार-मांगने वाले’ की जगह है ‘रोजगार देने वाले’ बनें।

इस अवसर पर अध्यक्ष ने लोहू में स्थित खादी इरी सिल्क प्रशिक्षण सह-उत्पादन केंद्र का भी  दौरा किया। यहाँ यह बताना उल्लेखनीय होगा कि केवीआईसी ने अरुणाचल प्रदेश में रेशम-उद्योग को पुनर्जीवित करने और उसके साथ स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार सृजित करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पिछले साल चीन और भूटान की सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के तवांग में खादी इरी रेशम प्रशिक्षण सह-उत्पादन केंद्र की स्थापना की थी। यह केंद्र लगभग 14,000 फ़ीट की ऊँचाई पर बर्फ़ से ढकी हिमालय की पहाड़ियों पर स्थित है और इसे बौद्ध संस्कृति संरक्षण सोसाइटी, बोमडिला की सहायता से स्थापित किया गया है। सोसायटी ने रेशम केंद्र के लिए भवन उपलब्ध कराया और केवाईसी ने आधारभूत संरचना के रूप में हथकरघा, चरखा, सिल्क-रीलिंग मशीन और रैपिंग-ड्रम इत्यादि उपलब्ध करवाए। ये तवांग और पश्चिमी कामेंग जिलों की 20 महिला कारीगरों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करा रहा है। अध्यक्ष ने कारीगरों को भरोसा दिलाया कि तवांग शहर में भी खादी इरी रेशम-प्रशिक्षण सह-उत्पादन केंद्र की एक शाखा खोली जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दृढ़- इरादों ने खादी-क्षेत्र में एक नई जान फूंकने का काम किया है। खादी अब लोकल से ग्लोबल हो गई है और 31 जनवरी 2023 तक केवीआईसी उत्पादों का कारोबार वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1,08,000, करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है।

श्री मनोज कुमार ने तवांग में स्थित मोनपा हस्त-निर्मित कागज बनाने की इकाई का भी दौरा किया और इससे जुड़े कारीगरों से भी मुलाकात की। यह बताना उल्लेखनीय है कि केवीआईसी के समर्पित प्रयासों से अरुणाचल प्रदेश की 1000 साल पुरानी पारंपरिक कला मोनपा हस्त-निर्मित कागज उद्योग, जो हाल ही में विलुप्त सा हो गया था, अब एक बार फिर से जीवित हो गया है। मोनपा हस्त-निर्मित कागज बनाने की कला 1000 साल पहले उत्पन्न हुई और धीरे-धीरे तवांग अरुणाचल प्रदेश की संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन गई। पिछले 100 वर्षों से यह हस्त-निर्मित कागज उद्योग लगभग विलुप्त सा हो गया था और अब केवीआईसी की मदद से  2020 में फिर से पुनर्जीवित हो गया है। श्री कुमार ने मोनपा हस्त-निर्मित कागज उद्योग से जुड़े कारीगरों को बधाई दी और उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि यहाँ से 50 कारीगरों को केवीआईसी जयपुर के ‘कुमारप्पा राष्ट्रीय हस्त-निर्मित कागज संस्थान’ में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा ताकि मोनपा हस्त-निर्मित कागज उद्योग को एक विश्व-स्तरीय कागज उत्पाद बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पारंपरिक हस्त-निर्मित मोनपा कागज़ अच्छी  मांग है और यह केवीआईसी का प्रयास रहेगा कि अरुणाचल प्रदेश के मोनपा हस्त-निर्मित कागज को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मान्यता मिले, जिससे ज्यादा से ज्यादा रोजगार का सृजन हो सके।

अध्यक्ष ने 12 मई को बोमडिला अरुणाचल प्रदेश में 20 योजना के लाभार्थियों को आचार बनाने की मशीन वितरित की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की जी की प्रेरणा से केवाईसी हर गांव में रोजगार देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

केवीआईसी ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत भारतीय पारंपरिक उद्योगों के श्रमिकों को उपकरण और मशीनरी विस्तृत कर रहा है जिससे पारंपरिक उद्योगों के कारीगरों की आय में वृद्धि हो रही है, उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है, साथ ही भारतीय पारंपरिक उद्योगों को संरक्षण और बढ़ावा मिल रहा है इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

Book Showcase

Best Selling Books

Ikigai: The Japanese secret to a long and happy life

By Héctor García, Francesc Miralles

₹318

Book 2 Cover

Why I am an Atheist and Other Works

By Bhagat Singh

₹104

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

Until Love Sets Us Apart

By Aditya Nighhot

₹176

Translate »