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विश्व पर्यावरण दिवस पर संगोष्ठी; सुरेश सिंह बैस को मिला ‘वसुंधरा गौरव सम्मान’

बिलासपुर: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर परंपरागत ज्ञान एवं वनौषधि विकास फाउंडेशन, छत्तीसगढ़ द्वारा संगोष्ठी एवं एकेडेमिशियन सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वनौषधीय विरासत तथा सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “वसुंधरा गौरव सम्मान” रहा, जिसके अंतर्गत शिक्षा, अनुसंधान, पर्यावरण जागरूकता एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पर्यावरण चिंतक व वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश सिंह बैस को “वसुंधरा गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मैं मानता हूं कि कलम केवल लिखने का साधन नहीं, बल्कि परिवर्तन की शक्ति है। यदि हमारी लेखनी किसी एक व्यक्ति के भीतर भी सकारात्मक विचार जगा सके, किसी पीड़ित के आंसू पोंछ सके या प्रकृति के प्रति प्रेम जगा सके, तो वही साहित्य की सबसे बड़ी सफलता है। आज चिंता इस बात की है कि पर्यावरण और धरती का तेजी से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता चला जा रहा है। आज पर्यावरण केवल एक विषय नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है।

जिस प्रकृति ने हमें जीवन दिया, उसी प्रकृति के साथ हमने सबसे अधिक अन्याय किया है। जंगल कट रहे हैं, नदियां प्रदूषित हो रही हैं, जलस्रोत समाप्त हो रहे हैं और मनुष्य विकास के नाम पर विनाश की ओर बढ़ रहा है। मुझे सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि आने वाली पीढ़ियों को हम कैसी धरती सौंपेंगे। मैं मानता हूं कि पेड़ लगाना ही पर्यावरण संरक्षण नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशील जीवनशैली अपनाना भी उतना ही आवश्यक है। जब तक मनुष्य प्रकृति को उपभोग की वस्तु समझता रहेगा, तब तक संकट गहराता जाएगा। प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व ही मानव सभ्यता का वास्तविक आधार है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं फाउंडेशन के निदेशक डॉ. निर्मल कुमार अवस्थी ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और औषधीय पौधों का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित वट, पीपल, गूलर सहित विभिन्न औषधीय वृक्षों और वनस्पतियों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए प्रकृति को मानव जीवन का आधार बताया।संगोष्ठी में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, वनौषधीय संपदा के संरक्षण, शिक्षा में नवाचार तथा सतत विकास के विविध आयामों पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर सम्मान प्राप्त करने वालों में श्रीमती प्रीति मिश्रा, विक्रम धर दीवान, भूपेंद्र सामनानी, अनिरुद्ध नगरकर, नवीन कुमार चौधरी, आशुतोष शुक्ला, अनिल कुमार बघेल, अजीत कुमार सिंह, रोहित भांगे, कुलेश्वर प्रसाद साहू तथा डॉ. भूपेंद्र धर दीवान शामिल रहे।

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