लखनऊ: भारत में मौसम विज्ञान सेवाओं के आधुनिकीकरण और आपदा पूर्व चेतावनी तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (रीजनल मेट्रोलॉजिकल सेंटर-आरएमसी) का संयुक्त रूप से शुभारंभ किया। इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के मौसम विज्ञान संबंधी बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, जिसके कारण अब देश में अधिक सटीक, क्षेत्र-विशिष्ट और प्रभाव आधारित मौसम पूर्वानुमान सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से भारत की मौसम विज्ञान प्रणाली में व्यापक तकनीकी बदलाव हुए हैं। पहले जहां मौसम पूर्वानुमान सामान्य क्षेत्रीय स्तर तक सीमित रहते थे, वहीं अब अत्यधिक स्थानीय और समय-विशिष्ट पूर्वानुमान संभव हो पाए हैं। नागरिकों को कुछ घंटों पहले तक की मौसम स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो रही है, जिससे आपदा प्रबंधन, कृषि, परिवहन, पर्यटन और विमानन क्षेत्र में बेहतर तैयारी और त्वरित निर्णय लेने में सहायता मिल रही है।

उन्होंने कहा कि मौसम विज्ञान संबंधी अवलोकन नेटवर्क, डेटा विश्लेषण प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडल और सूचना प्रसार तंत्र में सुधार के कारण मौसम पूर्वानुमानों की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यही कारण है कि आम नागरिकों से लेकर प्रशासनिक एजेंसियों तक मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों और सलाहों पर भरोसा लगातार बढ़ा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश में डॉप्लर मौसम रडार नेटवर्क के विस्तार को मौसम विज्ञान क्षेत्र की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में भारत में केवल 17 डॉप्लर मौसम रडार कार्यरत थे, जबकि जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्यों में एक भी रडार उपलब्ध नहीं था। वर्तमान में देश में 50 डॉप्लर मौसम रडार संचालित हो रहे हैं और ‘मिशन मौसम’ के अंतर्गत 50 अतिरिक्त रडार स्थापित किए जाने की योजना पर कार्य चल रहा है। अगले दो वर्षों में इनकी कुल संख्या लगभग 100 तक पहुंचने की संभावना है। इससे पूरे देश में वास्तविक समय में मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।
उत्तर प्रदेश की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य बाढ़, सूखा, लू, बिजली गिरने, आंधी-तूफान और अन्य चरम मौसम घटनाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में समय पर मौसम पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली जन सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि पिछले दशक में उत्तर प्रदेश में मौसम विज्ञान संबंधी आधारभूत संरचना में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 में राज्य में केवल एक डॉप्लर मौसम रडार उपलब्ध था, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर तीन हो चुकी है और अतिरिक्त रडार भी स्थापित किए जा रहे हैं। इसी प्रकार स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या 59 से बढ़कर 107 हो गई है। स्वचालित वर्षामापी स्टेशनों की संख्या 132 से बढ़कर 140 तक पहुंच गई है, जबकि बिजली गिरने का पता लगाने वाले सेंसरों की संख्या शून्य से बढ़कर सात हो चुकी है।
उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में विमानन क्षेत्र के विस्तार के साथ अब राज्य के 11 हवाई अड्डों पर विमानन मौसम विज्ञान सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे उड़ानों की सुरक्षा, मौसम आधारित संचालन और विमानन प्रबंधन को अधिक दक्ष बनाया जा सकेगा।
उत्तराखंड में मौसम विज्ञान सेवाओं के विस्तार पर चर्चा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड बाढ़, बादल फटने, हिमस्खलन और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए अत्यंत संवेदनशील है। बावजूद इसके वर्ष 2014 तक वहां कोई डॉप्लर मौसम रडार नहीं था। अब राज्य में तीन रडार स्थापित किए जा चुके हैं तथा मिशन मौसम के अंतर्गत अतिरिक्त प्रणालियों की स्थापना की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही स्वचालित मौसम स्टेशनों, बिजली गिरने की निगरानी प्रणालियों और हवाईअड्डा मौसम वेधशालाओं की संख्या में भी वृद्धि की गई है, जिससे हिमालयी क्षेत्रों में मौसम निगरानी क्षमता पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है।
लखनऊ में स्थापित नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि यह केंद्र मौसम सेवाओं के विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय स्तर पर पूर्वानुमान क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह केंद्र उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा आसपास के क्षेत्रों के लिए मौसम निगरानी, पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से उन्नत डॉप्लर मौसम रडार, पवन प्रोफाइलर प्रणाली और अन्य आधुनिक उपकरणों से युक्त समर्पित बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। इससे क्षेत्रीय स्तर पर अधिक सटीक मौसम विश्लेषण संभव होगा और स्थानीय प्रशासन को समय रहते आवश्यक कदम उठाने में सहायता मिलेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बेहतर पूर्वानुमान प्रणाली अचानक आने वाली बाढ़, बादल फटने, बिजली गिरने, आंधी-तूफान और हिमस्खलन जैसी आपदाओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौसम पूर्वानुमानों की प्रभावशीलता तभी सुनिश्चित हो सकती है जब स्थानीय प्रशासन और आम नागरिक समय पर जारी चेतावनियों और सलाहों का गंभीरता से पालन करें।
उन्होंने नागरिकों, स्थानीय निकायों, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों से अपील की कि वे मौसम विज्ञान विभाग द्वारा विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों पर जारी की जा रही सूचनाओं और चेतावनियों का सक्रिय उपयोग करें। उन्होंने कहा कि अब मौसम संबंधी जानकारी पंचायत स्तर तक वास्तविक समय में पहुंचाई जा रही है और इसे प्रशासनिक योजना तथा निर्णय प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना उत्तर भारत में मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को नई मजबूती प्रदान करेगी। इससे कृषि, आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, परिवहन और विमानन क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलेगा। साथ ही यह केंद्र जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच क्षेत्रीय स्तर पर वैज्ञानिक तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को भी सुदृढ़ करेगा।
भारत में मौसम विज्ञान सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में यह पहल केवल तकनीकी विस्तार भर नहीं है, बल्कि यह नागरिक सुरक्षा, आपदा न्यूनीकरण और सतत विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।