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क्रांतिकारियों को शब्द सुमन चढ़ाती कृति ‘राष्ट्र साधना के पथिक’ 

क्रांतिकारियों

देश के स्वाधीनता संघर्ष में योगदान देने वाले के बहुश्रुत क्रांतिकारियों के साथ ही गुमनाम नायकों के देशप्रेम, त्याग और बलिदान से भावी पीढ़ी को परिचित कराने एक प्रेरक प्रयास है 38 क्रांतिकारियों, 10 वीरांगनाओं और एक दिल दहला देने वाले घटनाक्रम से सुसज्जित वरिष्ठ साहित्यकार प्रमोद दीक्षित ‘मलय’ के संपादन में शैक्षिक संवाद मंच द्वारा प्रकाशित पुस्तक “राष्ट्र साधना के पथिक”। पुस्तक को दो खण्डों में विभाजित है।

प्रथम खंड में 1857 के क्रांति के नायकों को समाहित किया गया है इस खंड में वर्षा श्रीवास्तव ने वीरांगना झांसी की रानी के जीवन आहुति को, तो उनका रूप धारण कर उनके लिए ढाल बनने वाली झलकारी बाई की गाथा को कंचन बाला ने उकेरा है। क्रांति की शुरुआत करने वाले मंगल पांडे की गाथा को शिवाली जायसवाल ने तो इस क्रांति को नेतृत्व प्रदान करने वाले बहादुर शाह जफर की कहानी सुमन सिंह ने और दिल्ली को 134 दिनों तक आजाद रखने वाले राजा नाहर सिंह की गाथा नीता कुमारी ने लिखी है। बुशरा सिद्दीकी ने लखनऊ से क्रांति का बिगुल फूंकने वाली बेगम हजरत महल और कानपुर में क्रांति को धार देने वाले तात्या टोपे की गाथा मीना भाटिया ने और उनके सहयोगी रहे गुमनाम अजीमुल्ला खां की गाथा को आसिया फारूकी ने विस्तार पूर्वक बयां किया है।

जगदीशपुर के वयोवृद्ध राजा बाबू कुंवर सिंह की अपना एक हाथ काट नदी में प्रवाहित करने की राजेंद्र प्रसाद राव द्वारा लिखी गई गाथा आपकी आंखें नम कर देंगी। सीमा मिश्रा द्वारा लिखी जोधा सिंह अटैया की बावन इमली वाली घटना और अभिषेक कुमार द्वारा लिखित राप्ती नदी के किनारे स्थित सिद्धार्थनगर जनपद के अमरगढ़ की घटना के दौरान हुई अंग्रेजों की बर्बरता बयां करती है। राप्ती नदी के किनारे स्थित गोरखपुर के नरहरपुर स्टेट के राजा हरिप्रसाद मल्ल के पराक्रम की रवींद्रनाथ यादव द्वारा लिखी गाथा और लोकप्रिय तरकुलही देवी की आज भी चले आ रहे बलिदान की परंपरा के पीछे बाबू बन्धू सिंह के त्याग, बलिदान, शौर्य, भक्ति और शक्ति की गाथा गर्व से आपका मस्तक ऊंचा कर जाएंगी। श्रुति त्रिपाठी द्वारा लिखित वीरांगना रानी तलाश कुंवरि द्वारा आत्मसम्मान की रक्षा हेतु स्वयं का गर्दन धड़ से अलग कर देने की घटना से पाठक सिर से पांव तक सिहर जाएगा।

        पुस्तक के दूसरे खंड में 1857 के बाद क्रांतिकारी व आदिवासी आंदोलन और आम जनमानस में वैचारिक क्रांति लाने वाले समाज सुधारक, पत्रकार, शिक्षाविद् और आध्यात्मिक व्यक्तियों के जीवनगाथा को शामिल किया गया है। राजबहादुर यादव, स्मृति दीक्षित और डॉ सुमन गुप्ता के लेख के माध्यम से आप स्वाधीनता की राह में उग्र राष्ट्रवाद के जनक लाल बाल पाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से आप परिचित होंगे। 19 वर्षीय बालक खुदीराम बोस द्वारा मुजफ्फरपुर के सत्र न्यायाधीश किंग्सफोर्ड पर बम फेंकने की अनुराधा दोहरे द्वारा लिखी घटना और जलियांवाला बाग हत्याकांड के साक्षी रहे उधम सिंह के कमलेश पाण्डेय द्वारा लिखित लंदन में जाकर माइकल ओडायर को गोलियों से भून देने की घटना आपको रोमांचित कर देगी। क्रांति की आर्थिक सहायता के लिए 1925 में काकोरी ट्रेन एक्शन को सफल बनाने वाले युवा क्रांतिकारियों राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह के जीवन वृत्त को ऋतु श्रीवास्तव, प्रमोद दीक्षित मलय, प्रतिभा यादव और डॉ. प्रज्ञा त्रिवेदी ने क्रमवार अपने शब्द शिल्प से सजाया है।

सांडर्स की हत्या में शामिल भगत सिंह, राजगुरु और आजाद चंद्रशेखर आजाद की ओमकार पाण्डेय, नम्रता श्रीवास्तव और प्रतिमा उमराव द्वारा लिखी जीवनी आपको युवा जोश से परिचित कराएगी तो आभा त्रिपाठी द्वारा लिखित दुर्गा भाभी का वह कथन आपको पन्ना धाय की याद दिलाएगा, “यदि पुलिस गोली चलाए तो मेरे बेटे को आगे कर देना, क्योंकि देश को अभी तुम्हारी जरूरत है, मेरे बेटे की नही।” शहनाज बानो द्वारा लिखित असेंबली बम कांड के आरोपी शहीद सुखदेव, अनीता मिश्रा द्वारा लिखित जतिन दा के 63 दिन की भूख हड़ताल, हरियाली श्रीवास्तवा द्वारा लिखित वीर सावरकर, डॉ. रचना सिंह द्वारा लिखित हेमू कालाणी की गाथा क्रांतिकारी पक्ष का विधिवत वर्णन करती हैं तो वहीं सीमा कुमारी द्वारा लिखित बटुकेश्वर दत्त के उपेक्षा की कहानी आजाद भारत की व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

    इस सफर में रीनू पाल का लेख आपको अल्लूरी सीताराम राजू से मुखातिब कराएगा जिनके जीवन पर एस.एस. राजामौली द्वारा निर्देशित फिल्म आर.आर.आर. बनी है। मोनिका सिंह ने आदिवासियों के भगवान बिरसा मुंडा के जीवन चरित्र को बखूबी उकेरा है। आजाद हिंद फौज के महानायक रासबिहारी बोस, युवा दिलों की धड़कन सुभाष चंद्र बोस और कैप्टन लक्ष्मी सहगल के जीवन चरित्र का डॉ. पूजा यादव, गायत्री त्रिपाठी और पूजा चतुर्वेदी ने सुंदर उल्लेख किया है। गदर पार्टी के संस्थापक लाला हरदयाल, आई.सी.एस. अधिकारी का पद त्यागने वाले अरविंद घोष, भारत के शैक्षिक स्तंभ और बी.एच.यू. के संस्थापक मालवीय जी और अपनी पत्रकारिता से जन चेतना लाने वाला गणेश शंकर विद्यार्थी के जीवन चरित्र को क्रमशः विवेक पाठक, बिधु सिंह, डॉ. श्रवण कुमार गुप्त और अनिल राजभर ने अत्यंत शानदार तरीके से प्रस्तुत किया है। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित राजा महेंद्र प्रताप सिंह और कांग्रेस की प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष सरोजिनी नायडू की गाथा कुमुद  और मनीषदेव गुप्ता के शब्दों में आप तक पहुंचेगी।

     पुस्तक में आप कुछ ऐसे महान विभूतियों से भी परिचित होंगे जो आजादी से पूर्व और पश्चात भारत निर्माण में लगे रहे। राष्ट्रीय एकता के शिल्पी भारत के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल (अरविंद कुमार सिंह), दिल्ली की पहली महिला मेयर अरूणा आसफ अली (अर्चना वर्मा), उत्तर प्रदेश की पहली मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी (डॉ रेणु देवी), गाजीपुर की माटी के लाल विश्वनाथ शर्मा (शीला सिंह) और बस्ती के राममूर्ति त्रिपाठी (माधुरी त्रिपाठी) के व्यक्तित्व और कार्यों से पुस्तक आपको परिचित कराएगी।

युवा शिक्षाविद और साहित्यकार आलोक कुमार मिश्रा द्वारा लिखित अत्यंत सारगर्भित और नवीन दृष्टि से लगभग सभी लेखों का विश्लेषण और प्रतिनिधित्व करती हुई भूमिका ने पुस्तक को गरिमामय कर दिया है। पुस्तक की छपाई रुद्रादित्य प्रकाशन प्रयागराज द्वारा मोटे पीले पेपर पर स्पष्ट और दृश्य फॉन्ट में की गई है। राज भगत द्वारा डिजाइन किया हुआ कवर पुस्तक को आकर्षक बना रहा है। प्रमोद दीक्षित मलय ने अपने संपादकीय लेख में स्वाधीनता के इतिहास को अत्यंत संक्षेप में प्रस्तुत करते हुए पुस्तक लेखन प्रक्रिया का वर्णन किया है। आपके संपादकीय कार्य से पुस्तक त्रुटि रहित और प्रवाहमय हुई है। निश्चित रूप से यह पुस्तक पाठक को राष्ट्र साधना हेतु प्रेरित करेगी।

कृति – राष्ट्र साधना के पथिक विधा – आजादी के गुमनाम नायकों की जीवनी

संपादक – प्रमोद दीक्षित मलय प्रकाशक – रुद्रादित्य प्रकाशन, प्रयागराज 

पृष्ठ – 168, मूल्य – ₹ 350

दुर्गेश्वर राय
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