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वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) में सचिव और तमिलनाडु के मुख्य सचिव ने संयुक्त रूप से चेन्नई में तमिलनाडु के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और बैंक अधिकारियों के साथ पीएम स्वनिधि योजना के तहत प्रगति का आकलन करने के लिए समीक्षा बैठक की

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव डॉ. विवेक जोशी ने बैंकों द्वारा लौटाए जाने वाले आवेदनों की संख्या में कमी लाने के साथ ही एसएचजी-बैंक लिंकेज व सूक्ष्म उपक्रमों के विकास पर जोर देने के साथ पीएम स्वनिधि योजना के प्रदर्शन का आकलन और समीक्षा करने के लिए आज चेन्नई में तमिलनाडु के मुख्य सचिव थिरु शिव दास मीना के साथ एक समीक्षा बैठक की सह-अध्यक्षता की।

इस बैठक में डीएफएस में अपर सचिव, इंडियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक के एमडी और सीईओ, तमिलनाडु सरकार के नगर प्रशासन/अन्य शहरी स्थानीय निकायों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, संयुक्त आयुक्त/निदेशक और एसएलबीसी, तमिलनाडु के स्थानीय बैंक प्रमुखों ने भाग लिया। 

सचिव (एफएस) ने मुख्य रूप से बैंकों द्वारा लौटाए गए आवेदनों की बड़ी संख्या पर जोर दिया। साथ ही, यूएलबी और बैंकों से एक साथ मिलकर काम करने और आगे की मंजूरी एवं संवितरण के लिए आवेदनों में कमियों को दूर करने के लिए वापस आए आवेदनों की समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने बैंकरों से आग्रह किया कि वे सिर्फ कम सिबिल स्कोर पर ही आवेदन वापस न करें, जिस बात को डीएफएस पहले ही स्पष्ट कर चुका है।

थिरु मीना ने सभी यूएलबी को बैंकों के साथ निकट समन्वय में पीएम स्वनिधि योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नए आवेदन जुटाने का निर्देश दिया।

डॉ. जोशी ने बैंकों को छोटे कर्जदारों को लाभ पहुंचाने के लिए ऋण स्वीकृत करने का निर्देश दिया और कहा कि ये ऋण पहले से ही भारत सरकार की क्रेडिट गारंटी योजना के तहत सुरक्षित हैं।

स्वनिधि के तहत ऋणों की त्वरित और सकारात्मक प्रोसेसिंग के महत्व को शाखा स्तर पर भी प्रसारित करने की आवश्यकता है। योजना के प्रभावी कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों को क्षेत्र का दौरा करने की आवश्यकता है।

-पीएम स्वनिधि योजना के बारे में नवीनतम जानकारी-

पीएम स्वनिधि योजना उनके आर्थिक विकास के लिए सस्ता ऋण और डिजिटल साधनों तक आसान पहुंच के माध्यम से स्ट्रीट वेंडरों के सशक्तिकरण की परिकल्पना करती है।

यह योजना सड़क विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान करने में खासी प्रगति कर रही है। देश भर में इसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) और डीएफएस द्वारा संयुक्त रूप से योजना के इसके प्रदर्शन की नियमित रूप से निगरानी की जाती है। 31 जुलाई, 2023 तक, 54.40 लाख आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं, वहीं, 51.46 लाख आवेदनों पर 6,623 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गई है।

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