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‘वसुधैव कुटम्बकम्’ का विचार सर्वप्रथम संस्कृत भाषा ने दिया -डॉ.जीतराम भट्ट

वैज्ञानिक दृष्टि से संस्कृत-शास्त्रों पर प्रायोगिक कार्य करने की आवश्यकता
संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है -जानकी दास गुप्ता

नई दिल्ली। संस्कृत गुरुकुल कराला, नई दिल्ली में गोस्वामी गिरिधारी लाल शास्त्री प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, दिल्ली सरकार द्वारा संस्कृत सप्ताह के उपलक्ष्य में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें ’जयतु संस्कृतम् जयतु भारतम्’ के नारों का उद्घोष करते हुए छात्रों ने क्षेत्रीय जनता के साथ संस्कृत-यात्रा निकाली।  गुरुकुल प्रांगण में आयोजित संस्कृत-समारोह में छात्रों द्वारा अनेक प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। समारोह की प्रस्तावना में प्रतिष्ठान के निदेशक डॉ.जीतराम भट्ट ने कहा कि ’ भारतीय ज्ञान-विज्ञान का कोश वैदिक वाङ्मय संसार का सर्वाधिक प्राचीन साहित्य है, जो कि संस्कृत भाषा में है। ज्ञान-विज्ञान के सभी विषय, जैसे-सृष्टि-विज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति, समाजशास्त्र, संचार,  विमानशास्त्र, वास्तु, भूगोल, खगोल, योग, आयुर्वेद, गणित, कला, संगीत, साहित्य, मनोविज्ञान, अध्यात्म, धर्म आदि के मूल स्रोत संस्कृत भाषा में ही हैं। गणित के शून्य, दशमलव, पाई जैसी संकल्पना सर्वप्रथम संस्कृत में ही हुईं। ‘वसुधैव कुटम्बकम्’ अर्थात् ग्लोबलाइजेशन का विचार सर्वप्रथम संस्कृत भाषा ने ही दिया। ’


आचार्यों और छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए डॉ.भट्ट ने आगे कहा कि ’पराधीन भारत में गुरुकुलीय शिक्षा की अवहेलना होने के कारण संस्कृत-शास्त्रों पर आधारित शोध-अनुसन्धान नहीं हो पाया और उनके लाभ से समाज वंचित रह गया। अब हमारा कर्तव्य है कि हम इस पर वैज्ञानिक दृष्टि से प्रायोगिक कार्य करते हुए विश्व के समक्ष इसके महत्व को स्थापित करें।’ समारोह की अध्यक्षता कराला गुरुकुल के अध्यक्ष जानकी दास गुप्ता ने की। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि ’सस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। हमारे जीवन में संस्कृत रची बसी हुई है। संस्कृत दिवस हमें दायित्व बोध कराता है कि हमें अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहना चाहिए।’
 गुरुकुल के प्राचार्य रोहित राज पन्त ने कहा कि ’ हमारे लिए यह गौरव का विषय है कि हम संस्कृत भाषा से जुड़े हुए हैं। भारत की संस्कृति का आधार संस्कृत भाषा है।’ कार्यक्रम में दीपांशु और हीरामणि ने संस्कृत में काव्यपाठ करके सभी का मन मोह लिया। इसके अतिरिक्त अनेक छात्रों ने धाराप्रवाह संस्कृत बोलते हुए अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर आचार्य सूर्य प्रकाश, डॉ.रामधर द्विवेदी   रामकरण ने भी संस्कृत भाषा के साहित्य की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। समारोह में क्षेत्रीय जनता के साथ अनेक गणमान्य व्यक्ति सम्मिलित हुए। शेखर झा (प्रचार सहायक

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