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जमीनी स्तर पर नवाचार, विज्ञान संवाद कार्यशाला और छात्रों की विज्ञान में रूचि जताने हेतु अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए

सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) ने कल तीसरे दिन सीएसआईआर-एनपीएल ऑडिटोरियम, पूसा, नई दिल्ली में अपने वन वीक वन लैब (ओडब्ल्यूओएल) कार्यक्रम का आयोजन किया। ‘ग्रामीण विकास के लिए जमीनी स्तर पर नवाचार और कौशल विकास कॉन्क्लेव’ कार्यक्रम किसानों को समर्पित था। मुख्य अतिथि, सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे और विशिष्ट अतिथि, कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (एएसआरबी) के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार द्वारा प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ यह कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ शुरू हुआ।

स्वागत भाषण में, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. रंजना अग्रवाल ने कहा, “ग्रामीण विकास के लिए आज का कार्यक्रम 11 से 16 सितंबर, 2023 तक एक सप्ताह तक चलने वाले ‘वन वीक वन लैब’ की कड़ी में से एक है। इस विचार की शुरुआत कोविड-19 के समय में सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे द्वारा की गई थी।”

सम्मानित अतिथि, डॉ. संजय कुमार ने अपने भाषण में कहा कि “प्रौद्योगिकी के उत्पादन की लागत हितधारकों के लिए स्वीकार्य और सस्ती होनी चाहिए और प्रौद्योगिकी को एक देश को शक्तिशाली बनाना चाहिए।”

विशेष आमंत्रित सदस्य विज्ञान भारती (वीआईबीएचए) के सचिव श्री प्रवीण रामदास ने दर्शकों को संबोधित किया, और “भारत के लिए विज्ञान” के बारे में चर्चा की। उन्होंने विज्ञान भारती के पूर्व राष्ट्रीय आयोजन सचिव स्वर्गीय श्री जयंत सहस्रबुद्धे को याद किया। श्री प्रवीण रामदास ने कहा, “जब तक हमारे गांव आत्मनिर्भर नहीं होंगे, हमारे किसान आत्मनिर्भर नहीं होंगे; हमारा भारत आत्मनिर्भर नहीं होगा।” उन्होंने गांवों में सीएसआईआर से संबंधित प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. शेखर सी. मांडे ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सपने को दोहराया, “2047 में हम भारत को सबसे विकसित देशों में से एक देखना चाहते हैं, इस सपने को साकार करने के लिए ग्रामीण लोगों का विकास सबसे महत्वपूर्ण है”।

वैज्ञानिक-किसान संवाद के तकनीकी सत्र के दौरान, ‘वन वीक वन लैब’ के समन्वयक डॉ. योगेश सुमन ने सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों और प्रयोगशालाओं पर केंद्रित एक पैनल चर्चा के लिए मॉडरेटर के रूप में कार्य किया। सम्मानित पैनलिस्टों में आईआईटी दिल्ली में सीआरडीटी के प्रोफेसर डॉ. विवेक कुमार और सीएसआईआर-मुख्यालय में टीएमडी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र पी. दारोकर शामिल थे। इसके अतिरिक्त, विभिन्न सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के कई अन्य वैज्ञानिकों ने चर्चा में भाग लिया, और प्रयोगशाला के प्रयोगों और समाज के बीच अंतर को पाटने की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने केवल प्रौद्योगिकी संबंधी तैयारी के स्तर पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय प्रौद्योगिकी की उपयुक्तता के महत्व पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिकों ने अपनी प्रयोगशालाओं में किए गए अपने-अपने प्रयोगों के बारे में जानकारी साझा की और बाद में, सत्र को आगे की चर्चा हेतु आम जनता के लिए खोल दिया गया।

एनआरडीसी (नई दिल्ली) के वरिष्ठ प्रबंधक डॉ. संजीव कुमार मजूमदार ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि हम जो दालें खाते हैं, वे भी सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में से एक में किए गए अनुसंधान के परिणाम हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीएसआईआर वैज्ञानिकों द्वारा किए गए सभी अनुसंधानों का उद्देश्य अंततः सार्वजनिक हित को पूरा करना है।

किसान सभा ऐप पर प्रशिक्षण सत्र में, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनायक ने ऐप से परिचित कराया और बताया कि यह कैसे किसानों को काफी फायदा पहुंचा सकता है। एनआईएससीपीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक और ऐप के सह-डेवलपर डॉ. शिव नारायण निषाद ने किसान सभा ऐप को आकार देने में उनके योगदान के लिए एनआईएससीपीआर के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने दर्शकों को यह भी बताया कि वर्तमान में, किसानों और उपभोक्ताओं सहित लगभग 10 लाख ग्राहक सक्रिय रूप से इस ऐप का उपयोग कर रहे हैं। ऐप बाजार की तत्काल जानकारी और विभिन्न कृषि सेवाओं तक पहुंच प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, किसान ऐप के जरिए आसानी से मंडी की कीमतें देख सकते हैं।

ग्रामीण आजीविका के लिए सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें 10 से अधिक सीएसआईआर प्रयोगशालाओं ने भाग लिया। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे ने किया।

विज्ञान संचार पर आयोजित कार्यशाला में 50 से अधिक शिक्षक शामिल हुए और विशेषज्ञों द्वारा विज्ञान संवाद के विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के जिज्ञासा, प्रशिक्षण और मानव संसाधन प्रभाग के प्रमुख श्री सी. बी. सिंह ने स्वागत भाषण दिया। कार्यशाला में अपने मुख्य भाषण में विज्ञान शिक्षकों को संबोधित करते हुए माननीय मुख्य अतिथि हैदराबाद विश्वविद्यालय की प्रो. शर्मिष्ठा बनर्जी ने छात्रों को अंतःविषय विज्ञान पढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिकी और गणित सहित सभी विषय एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और हमें इसे प्रभावी तरीके से अपने छात्रों को बताना होगा।

कार्यशाला में विज्ञान संवाद और नागरिक जिम्मेदारी के बारे में बताते हुए सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक और ‘साइंस रिपोर्टर’ पत्रिका के संपादक श्री हसन जावेद खान ने कहा, ”विज्ञान के बारे में गलत समाचार और फर्जी सूचनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करना देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।”

साइंस रिपोर्टर पत्रिका की एसोसिएट एडिटर सुश्री सोनाली नागर ने शिक्षकों को लोकप्रिय विज्ञान लेखन की बारीकियों का प्रशिक्षण देते हुए एक प्रस्तुति दिखाई। श्री हसन जावेद खान द्वारा दिए गए लोकप्रिय विज्ञान लेखन कार्य के साथ कार्यशाला समाप्त हुई।

सीएसआईआर की ‘जिज्ञासा’ पहल के तहत सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर परिसर के विवेकानंद हॉल में ‘स्टूडेंट-साइंस कनेक्ट’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अपने स्वागत भाषण में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के जिज्ञासा कार्यक्रम के प्रमुख श्री सी.बी. सिंह ने कहा कि कैसे एनआईएससीपीआर विज्ञान संचार के माध्यम से आम लोगों तक पहुंच रहा है।

इस मौके पर सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. रंजना अग्रवाल ने कहा कि एनआईएससीपीआर एक सेतु की तरह काम कर रहा है। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री के ‘अंतर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष’ के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए मोटे अनाज के बारे में जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया था कि कैसे सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर पहल ‘स्वास्तिक’ पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान कर रही है।

इस कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि आपके मन में कब, कहां, कैसे, क्यों जैसे सवाल आने चाहिए। विज्ञान तभी विकसित होता है जब हम उसके बारे में सोचते और चर्चा करते हैं। सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर के पूर्व निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि हमें कहानियों के माध्यम से वैज्ञानिक सोच अपनाने की जरूरत है कि कैसे गणित और विज्ञान को रोचक तरीके से पढ़ा और समझा जा सकता है।

सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुमन रे ने मोटे अनाज के बारे में जानकारी दी। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की प्रधान वैज्ञानिक और एसवीएएसटीआईके की समन्वयक डॉ. चारू लता ने कहा कि भारत के पास विज्ञान और प्रौद्योगिकी की समृद्ध विरासत है। पारंपरिक ज्ञान हमारे त्रि-आयामी व्यक्तित्व का विकास करता है।

कार्यक्रम में केन्द्रीय विद्यालय, विकासपुरी एवं सेक्टर-8, द्वारका, एम.एम. पब्लिक स्कूल, शकूरपुर की भागीदारी रही। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने क्विज प्रतियोगिता में भाग लिया। इस अवसर पर डॉ. विकास मिश्रा एवं उनकी टीम द्वारा कठपुतली शो का प्रदर्शन किया गया।

सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के बारे में

सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की घटक प्रयोगशालाओं में से एक है। यह साक्ष्य-आधारित नीति अनुसंधान और अध्ययन पर केंद्रित विज्ञान संवाद, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखता है। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर विभिन्न पत्रिकाओं, पुस्तकों, पत्रिकाओं, समाचार पत्रों और रिपोर्टों को प्रकाशित करता है। यह विज्ञान संचार, विज्ञान नीति, नवाचार प्रणाली, विज्ञान व समाज के बीच संबंध और विज्ञान संबंधी कूटनीति पर भी अनुसंधान करता है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया https://niscpr.res.in/  पर देखें या @CSIR-NIScPR  पर हमें फॉलो करें।

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