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व्यवहारिक उपाय से मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम रखा सकता है: डॉ मनोज

विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूपीएनपी प्लस, एनसीपीआई प्लस के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय ट्रीटमेंट लिटरेसी कार्यशाला: “मेरा स्वास्थ्य, मेरा उत्तरदायित्व” का आयोजन प्रयागराज में किया गया। जिसमें उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के सहभागियों ने सहभागिता किया।

कार्यशाला के प्रथम दिन मुख्य वक्ता डॉ मनोज कुमार तिवारी प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक व वरिष्ठ परामर्शदाता, एआरटी सेंटर, एसएस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू ने मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा किया उन्होंने तनाव, दुश्चिंता, अवसाद, मनोदैहिक विकार, इंटरनेट एडिक्शन व अन्य मानसिक व मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारणों, लक्षणों तथा बचाव के उपाय से सहभागियों का अवगत कराया। मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति उचित निर्णय लेता है, प्रभावशाली समायोजन स्थापित करता है, तार्किक चिंतन करता है, अपने कर्मियों एवं क्षमताओं से अवगत रहता है, जीवन में होने वाले तनाव से निपटने में सक्षम होता है, तथा अपने समाज में योगदान देता है। नींद कम/अधिक लगना, भूख कम या ज्यादा लगना, घबराहट, बेचैनी, ध्यान केंद्रण की समस्या व अधिक पसीना आना तनाव ग्रस्त होने के लक्षण है।

उन्होंने बताया कि नियमित दिनचर्या, सकारात्मक सोच, अपने कमियों को दूर करके व अपनी क्षमताओं का विकास करके, नशा से परहेज, समायोजन कौशलों को सीख करके, गुणवत्तापूर्ण नींद व संतुलित आहार के द्वारा व्यक्ति तनाव से बचा रह सकता है। डॉ तिवारी ने सहभागियों का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें उनके मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति से अवगत कराया तथा तनाव के नकारात्मक प्रभाव से बचाव हेतु सहभागियों को विभिन्न तकनीकी एवं रिलैक्सेशन एक्सरसाइज का अभ्यास कराया। प्रतिभागियों ने प्रश्नों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी अपने जिज्ञासाओं को शांत किया।

कार्यक्रम का संचालन श्री दिनेश यादव तथा धन्यवाद ज्ञापन श्री विमलेश कुमार ने किया। श्री अविनाश ने कार्यशाला के संचालन में सहयोग प्रदान किया। कार्यशाला के संयोजन में श्री राकेश सिंह संयोजक यूपीएनपी प्लस का महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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