NEW English Version

कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने विश्वविद्यालय राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू जी से शिष्टाचार भेंट की

 संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने भारत गणराज्य की महामहिम राष्ट्रपति महोदया आदरणीया श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी से दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट की। माननीया राष्ट्रपति महोदया ने अत्यन्त आत्मीय भाव एवं तन्मयता के साथ सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय और उसके विकास से सम्बन्धित विविध विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि महामहिम राष्ट्रपति महोदया ने शिक्षा, संस्कृत, संस्कृति, सामाजिक समरसता एवं पीडित, शोषित, वंचित व अभावग्रस्त लोगों के उत्थान के लिये उनका समर्पण तथा भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं के संरक्षण व सम्वर्धन हेतु परमश्रद्धेया राष्ट्रपति जी की प्रतिबद्धत्ता अभिनन्दनीय व स्तुत्य है ।

कुलपति प्रो शर्मा ने बताया कि  माननीया राष्ट्रपति महोदया ने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के उन्नयनन हेतु अपनी दृढ प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस पुनीत अवसर पर वाराणसी की पवित्र धरा पर स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय परिवार की ओर से उनसे विश्वविद्यालय आकर इस तपःस्थली में आने का विनम्र निवेदन किया । जिस पर उन्होंने कहा कि इस बार तो सम्भवतः विलम्ब हो गया है लेकिन  आगामी वर्ष विश्वविद्यालय के किसी भी कार्यक्रम के अवसर पर निश्चित रूप से उपस्थित होने का प्रयास करूँगी । इस निमंत्रण विषयक निवेदन पर गम्भीरता से विचार करने का आश्वासन प्रदान किया है।

उनकी इस सदाशयता एवं आत्मीयता के लिये मैं अपनी ओर से एवं विश्वविद्यालय परिवार की ओर से उनका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिहारी लाल शर्मा ने परंपरानुसार देश की महामहिम राष्ट्रपति महोदया को पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्रम ओढ़ाकर स्वागत और अभिनंदन करते हुए 233 वर्षों से स्थापित इस प्राच्यविद्या केंद्र के अनवरत विकास यात्रा से संबंधित  परिचय पत्रिका भी भेंट कर इस संस्था के सम्पूर्ण परिचय का भी उल्लेख किया गया।

Book Showcase

Best Selling Books

Ikigai: The Japanese secret to a long and happy life

By Héctor García, Francesc Miralles

₹318

Book 2 Cover

Why I am an Atheist and Other Works

By Bhagat Singh

₹104

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

Until Love Sets Us Apart

By Aditya Nighhot

₹176

Translate »