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क्या आप कभी अपने बच्चों के रहन-सहन पर ध्यान देते हैं?

आज कल टीनएजर्स के बीच सेक्स, शराब पीना आदि बुरी व गंदी हरकतों का चलन बहुत जोरों से बढ़ता जा रहा है। यदि इस संसार में आज कल के टीनएजर्स की एक उपयुक्त परिभाषा दी जाए, तो वह यह होगी कि हमेशा नशे में डूबे रहना, जेब में खूब सारा पैसा रखना, खूब मौज मस्ती करना व माता-पिता की बातों को न मानने वाला। अब अधिकतर सभी टीनएजर्स अपने आप को हमेशा इन सब की सहायता से कूल रखने की कोशिश में लगे रहते हैं और साथ ही जीवन में एक लंबी व खतरनाक छलांग लगाने की प्रायः कोशिश में लगे रहते हैं, लेकिन वे यह नहीं जानते कि इन लंबी छलांगों के बाद वे सीधा मुंह के बल ही गिरेंगे क्यों कि उन के युवा कंधे और मानसिक स्थिति इस उम्र में, इस प्रकार की कठिन परिस्थितियों को सहने योग्य नहीे होती। साथ ही अपनी इन हरकतों के कारण वे अपने माता-पिता पर एक अनैच्छिक बोझ की तरह बन सकते हैं।

यदि इन सब बातों के बारें में गंभीरता से विचार किया जाए तो क्या यह सोचना गलत होगा कि कहीं हम अपने बच्चों को जरूरत से पहले तो सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं? जैसे इतनी छोटी सी उम्र में उन्हें महंगे फोन, गाडियां, जीवन की सारा ऐशो आराम भरी चीजें, कहीं भी घूमने-फिरने की आजादी, लेकिन आधारभूत शिक्षा, उत्तरदायित्वों और जागरूकता के बिना युवां अपने ही सुरक्षा जाल में फस सकते हैं। मनोचिकित्सकों विशेषज्ञों का कहना है कि ‘ऐसा इस लिए होता है क्यों कि हम सभी व्यक्ति चाहे वह कोई वरिष्ठ व्यक्ति हो या कोई युवा सब चीजों पर अपना अधिकार व उत्तरदायित्व बनाने की कोशिश करने में लगे रहते हैं। हम जो काम आने वाले कल(टुमौरो)में करना चाहते हैं उसे हम बीते हुए कल(यस्टरडे)में ही कर लेते हैं।

आज कल के माता-पिता अपने बच्चों को कुछ ज्यादा ही जल्दी छूट दे देते हैं जैसा वे उन्हें आने वाले कल में बनाना चाहते हैं उन सब से संबंधित जानकारी वे उन्हें इसी उम्र में देना शुरू कर देते हैं। जैसा कि आप ने देखा ही होगा अमीर परिवारों में एक पिता अपने बेटे को अपने साथ शराब पीने के लिए आमत्रित करते हैं ताकि वह किसी पार्टी में जाए तो उसे शराब पीते हुए कुछ अजीब न लगे। लेकिन क्या इस उम्र में जब वह पढ़ाई करने की अवस्था में होते है उन्हें इन सब चीजो की जरूरत है? परंतु अब माता-पिता का मानना कि उनके द्वारा अपने बच्चों को भिन्न-भिन्न प्रकार के यंत्र उपलब्ध करवाने के बाद उनके बच्चे अब कहीं ज्यादा अधिक बेहतर ढंग से पढने लगे हैं। वे अपनी अधिकतर सभी क्रियाओं में जीत हासिल कर घर में जीत की एक ट्राफी लाते ही है।

माता-पिता कहते हैं पहले कि तुलना में उनके बच्चे अब इतनी ट्राफिस जीत ही लेते हैं जिन्हें घर के शॉकेस में सजा देते है व जब किसी के सामने ट्राफिस को दिखाना हो तो वह उस समय उनको चमका देते हैं क्यों कि माता-पिता को अपने बच्चों द्वारा जीती गई ट्राफी को दूसरों को सामने दिखाने में बहुत गर्व महसूस होता है, इसलिए अधिकतर माता-पिता बहुत खुशी से कहते हैं कि उन्हें नहीं लगता कि वे अपने बच्चों को जो ऐशोआराम की सेवाएं मुहैया करवा रहे हैं वे उन्हें बिगाडने का काम करती हैं। साथ ही कहते हैं कि अब ऐसा व्यस्तता भरा समय है जिसमें बहुत से माता पिता वास्तव में अपने बच्चों के साथ रहकर अपना समय नहीं बांट पाते। हो सकता है यह एक साधारण बात न हो, लेकिन आज कल बच्चे स्कूल से बिल्कुल खाली बैग लेकर वापस लौटते हैं क्यों कि वे अपने साथ कॉपी किताब कम ले जाते है।

लेकिन फिर भी उनकी इस हरकत पर किसी की भी नजर नहीं रहती। कोई उन्हें नहीं देखता कि वे क्या कर रहे हैं? चाहे वे घर में हो या स्कूल में। एक टीनएजर की मम्मी जो कि एक स्कूल की अध्यापिका भी हैं का कहना है कि हम अपने बच्चों को वास्तव में इतनी छोटी सी उम्र बहुत कुछ दे रहे हैं परंतु ऐसा हमे उनके साथ अपना कम समय बिताने व उन के जीवन के प्रति कम ध्यान देने के लिए एक भुगतान के रूप में चुकाना पड़ता हैं। वैसे भी अब मोबाइल व कार का होना बहुत जरूरी सा हो गया है और यदि मेरे बेटे के पास ये सब चीजें नहीं होतीं तो शायद उसे अपने दोस्तों के समूह से निकाल दिया जाता। इस लिए कभी-कभी माता-पिता को बच्चों के साथ एक दोस्ती भरा रिश्ता निभाने के लिए उन्हें यह सब चीजें देनी ही पड़ती हैं।

इसी के साथ आज कल हर रिश्ते में बहुत से आधारभूत बदलाव भी आते जा रहें हैं। आज यह मायने नहीं रखता कि उनकी मांगें किस सीमा तक जाती है, वह भी अपने माता-पिता व आस-पड़ोस के व्यक्तियों की जीवनशैली को देखते हुए वैसी ही ऐशो आराम भरी जीवनशैली जीने की चाह रखते हैं। समय की कमी के कारण माता-पिता उन्हें ठीक से बता नहीं पाते कि जीवन में कुछ चीजों या कार्यों को समय के अनुसार करना चाहिए परंतु आज कल की पीढ़ी हर तरह के कार्यों को करने की दिलचस्पी रखती है।

यद्यपि यह एक बहुत बड़ा तथ्य है कि आज के युवाओं को किसी भी चीज को करने से रोकना बहुत मुश्किल है क्यों कि जिसे वह दिल से करने की चाहत रखते हैं उसे वह जरूरी पूरा करके मानते हैं चाहे इस से उनका नुकसान हो या फायदा, जिससे वह जीवन में बिगड़ता चला जाता है। परंतु फिर भी इन सब बातों पर ध्यान देते हुए यदि माता-पिता आराम से बैठकर गंभीरता से सोचें और कहे ‘चलो कुछ नहीं होता यदि हमारा बच्चा किसी गलत राह में चला गया है तो अभी भी समय नहीं बीता हम अपने बच्चे को इस जाल से निकालने में अपना पूरा सहयोग देंगे।’ ‘माता-पिता के रूप में आप अपने बच्चे को नैतिक शिक्षा देकर इस गलत राह पर जाने से रोक सकते हैं, कुछ ऐसा कर सकते हैं जैसे अभी तक न घटा हो। माता-पिता को अपने बच्चों को शैक्षिक योग्यताएं उपलब्ध कराने की जरूरत होती है जिसकी सहायता से वे उन्हें उनकी आयु के अनुसार सोच-विचार करने के बारें में बताते हैं.उन्हें नैतिक व शैक्षिक शिक्षा देने के साथ उन्हें कई अन्य बातों जैसे सेक्स के बारें में भी जागरूक कराएं ताकि उनके मन में सेक्स के प्रति हलचल न पैदा हो व वह आप से बेझिझक बात कर सकें।’

आज की जीवनशैली में हर बच्चे बड़े-बड़े सपने देखते हैं और उनकी आंखों में बहुत सितारे चमकते हैं चाहे उन्होंने अपने जीवन में किसी भी चीज को ठीक से न देखा हो। युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि उन्हें अत्यधिक मात्रा में सारी चीज उपलब्ध करवाने से हम उनके सपनों को सच करने का एहसास दिलाने के लिए उनके पास उपलब्ध अवसरों को लूट रहे हैं और उन्हें नए-नए सपनो के क्षेत्र के प्रति उत्साहित करते रहते हैं।

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