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हिन्दी के बिना सशक्त राष्ट्र का निर्माण नहीं हो सकता–  डा. चेतन आनंद

हिन्दी की गूंज संस्था का स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

दिल्ली, देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था ‘हिन्दी की गूंज’  अपना तेरहँवा स्थापना दिवस आभासी पटल पर मनाया। इस अवसर पर विचार -विमर्श एवं मंथन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम संचालक खेमन्द्र जी ने अपने  अपने उत्कृष्ट संचालन प्रतिभा को दिखाते हुए सर्वप्रथम संस्था के पुरोधा पुरुष स्वर्गीय श्री राज करण सिंह का स्मरण करते हुए सभी का स्वागत और अभिनन्दन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंजु शर्मा  के मधुर कंठ से प्रस्फुटित स्वरस्वती वंदना “ हे स्वर की देवी वाणी में मधुरता दो , में गीत सुनाती हूँ संगीत की शिक्षा दो “ से हुआ । संस्था के सह संयोजक रमेश कुमार गंगेले ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि  इस मुहिम को अधिक सशक्त बनाने के लिए संस्था के रजिस्टेशन कराने की आवश्यकता है तथा वार्षिकोत्सव के अतिरिक्त अन्य कार्यक्रम होते रहने चाहिए। हल्द्वानी शाखा प्रभारी निर्मला जोशी ने शाखा के प्रयासों के बारे में बताते हुए कहा कि अल्प साधनों के होते हुए भी हल्द्वानी शाखा संस्था के प्रयासों को आगे ले जाने के लिए कृतसंकल्प है। 

मीडिया टीम के प्रहरी और बिजनौर शाखा के प्रभारी प्रमोद चौहान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी शाखा प्रभारियों को हिन्दी के प्रचार- प्रसार को कारगर बनाने के लिए अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को इस अभियान से जोड़ना चाहिए। संस्था की नन्ही कलम राम कुमार पांडेय ने श्री नीहार जी के मार्गदर्शन को याद करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से ही उन्होंने स्नातक स्तर पर हिंदी विषय को चुना है। डॉक्टर संजय सिंह ने कहा कि 2012 में पाँच सदस्यों से प्रारंभ हुई संस्था से लोग जुड़ते गये  और संस्था ने आज वट वृक्ष का रूप के लिया है । डॉक्टर सिंह ने कहा कि वो अन्य कार्यक्रम से भी जुड़ते रहते हैं पर हिन्दी के प्रति इतना समर्पण कहीं और नहीं देखने को मिलता। इस अवसर पर शाहजहांपुर के सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार डॉ साजिद मोहम्मद खान ने हिन्दी की गूंज के प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। डॉक्टर ममता श्रीवास्तव ने बाल चौपाल को आभासी पटल के स्थान पर जगह जगह पर जाकर करने का प्रस्ताव रखा और स्मारिका को प्रिंट कराने की बात कही। तरुणा पुंडीर ने साहित्य और संवेदनशीलता का ज़िक्र करते हुए कहा संस्था के सदस्यों में बेहतर तालमेल को बड़ी पूंजी बताया।

वरिष्ठ कथाकार विमला रस्तोगी ने कहा कि मैं हिन्दी की गूंज संस्था को अपना भरपूर सहयोग करुंगी। संस्था के संयोजक नीहार जी ने भारतवादी श्री राजकरण जी को याद करते हुए बताया कि संस्था का पहली कार्यक्रम सूरज मल इंटर कॉलेज पलवल में आयोजित हुआ था। उन्होंने कहा इस समय संस्था तीन पीढ़ियों के साथ काम कर रही है और इस मुहिम को आगे ले जाने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा। तमिलनाडु शाखा की प्रभारी रोचिका अरूण शर्मा ने हिन्दी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता प्रकट की।  उड़ीसा शाखा प्रभारी ज्योति ने कहा कि हिन्दी की गूंज से जुड़कर स्वयं का भी आत्मविश्वास बढ़ा है,एक पहचान मिली है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉक्टर चेतन आनंद ने  कहा कि हिन्दी हमारी आत्मा में बसती है। हिन्दी के बिना सशक्त राष्ट्र का निर्माण नहीं हो सकता है और हिन्दी की गूंज इस दिशा में बेहतरीन काम कर रही है। कार्यक्रम में संचालक खेमेन्द्र सिंह की कुशलता और वाकपटुता झलकती रही। कार्यक्रम का समापन गिरीश जोशी के अध्यक्षीय उद्बोधन से हुआ।

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