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स्थानीय प्रेसवाले भी बनें सशक्त; इस उद्देश्य से जयपुर में इस्त्री प्रोजेक्ट लॉन्च

स्थानीय प्रेसवालों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उद्यम व्यापार ने जयपुर में शुरू किया इस्त्री प्रोजेक्ट

इस्त्री प्रोजेक्ट से बेंगलुरु और चेन्नई में लगभग 6,000 प्रेसवालों को लाभ

उद्यम लर्निंग फाउंडेशन की पहल, ‘उद्यम व्यापार’ ने जयपुर में ‘द इस्त्री प्रोजेक्ट’ लॉन्च किया है। यह पहल छोटे आंत्रप्रेन्योर्स के लिए काम करती है। ऐसे में, इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य स्थानीय प्रेसवालों के जीवन में सार्थक बदलाव लाना है। इसके माध्यम से उन्हें कोयले वाली प्रेस  के बजाए एलपीजी वाली प्रेस अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह परिवर्तन न सिर्फ अत्यंत कुशल है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है।

इस प्रोजेक्ट को जयपुर के मानसरोवर में एक कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया गया। यहाँ स्थानीय प्रेसवालों को 50 से अधिक एलपीजी वाली प्रेस (आयरन बॉक्स) प्रदान किए गए। इसके बाद, ‘प्रेसवाला एक्सप्रेस’ का उद्घाटन किया गया, जो जयपुर के विभिन्न इलाकों से होकर गुजरेगी। इसका उद्देश्य प्रेसवालों के बीच  जागरूकता बढ़ाना और प्रेसवालों को कोयले के बजाए एलपीजी वाली प्रेस (एलपीजी आयरन बॉक्स) का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

एलपीजी आयरन बॉक्स, कोल आयरन बॉक्स की तुलना में कई तरह के लाभ प्रदान करता है, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

कोयले वाली प्रेस के माध्यम से आय में वृद्धि:

●      उत्पादकता में वृद्धि: कोल बॉक्स को गर्म होने में 2 घंटे लगते हैं, जबकि एलपीजी आयरन बॉक्स महज़ 2 मिनट में ही गर्म हो जाता है। इससे न सिर्फ हर दिन उत्पादन बढ़ता है, बल्कि आय में भी बढ़त होती है।

●      कम लागत: ईंधन के रूप में एलपीजी का उपयोग करने से खर्चा कम होता है, जिससे कहीं न कहीं आय और कुशलता में वृद्धि होती है।

स्वास्थ्य लाभ: कोयले के धुएँ से प्रेसवालों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसे एलपीजी आयरन बॉक्स ने खत्म कर दिया।

पर्यावरण को लाभ: प्रत्येक प्रेसवाले द्वारा एलपीजी आयरन बॉक्स का इस्तेमाल, सालाना 77 पेड़ों के कार्बन डाईऑक्साइड के अवशोषण के बराबर है।

इस्त्री प्रोजेक्ट बेंगलुरु और चेन्नई में लगभग 6,000 प्रेसवालों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालने का माध्यम बना है। अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन से स्पष्ट होता है कि एलपीजी आयरन बॉक्स के इस्तेमाल से चेन्नई में प्रेसवालों की शुद्ध मासिक आय में 28% की बढ़त दर्ज हुई। जयपुर में लगभग 4,000 प्रेसवाले कोयले का उपयोग करते हैं। यह भारतीय शहरों में सबसे अधिक संख्या में से एक है। डोर्स इंडिया (डेवलपमेंट ओरिएंटेड ऑपरेशंस रिसर्च एंड सर्वे) इंडिया द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे में यह बात सामने आई। यह एक सोशल सेक्टर ऑर्गेनाइज़ेशन है, जो सामाजिक-आर्थिक शोध करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जयपुर में ‘द इस्त्री प्रोजेक्ट’ के विस्तार पर बोलते हुए, सिरिल जोसेफ, प्रोग्राम लीड- द इस्त्री प्रोजेक्ट, उद्यम, ने कहा, “उद्यम व्यापार का लक्ष्य छोटे आंत्रप्रेन्योर के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करके उनके जीवन को बेहतर बनाना है। इस्त्री प्रोजेक्ट बेहद सफल रहा है, जिससे बेंगलुरु और चेन्नई में लगभग 6000 प्रेसवालों को लाभ हुआ है। जयपुर में इस सार्थक प्रोजेक्ट का विस्तार करके, हमारा लक्ष्य प्रेसवालों को एलपीजी आयरन बॉक्स का इस्तेमाल करने, उनकी कमाई में इजाफा करने, कमाने के स्थायी साधन पेश करने और उनके स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद करना है। आने वाले कुछ महीनों में हमारी योजना 350 प्रेस वालों को इस सुविधा से लैस करने की है।” मुस्कान सिंह

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