नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राष्ट्रमंडल खेलों में देश का गौरव बढ़ाने वाले भारतीय चैंपियनों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों, उनके संघर्ष, प्रशिक्षण व्यवस्था, खेलो इंडिया पहल और देश में विकसित हो रही खेल संस्कृति पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए भविष्य की प्रतियोगिताओं में भी देश के लिए सफलता हासिल करने का भरोसा जताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में भारतीय खेलों का परिदृश्य तेजी से बदला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने वाले खिलाड़ियों का उनके आवास पर स्वागत करना उनके लिए एक विशेष और निरंतर चलने वाली परंपरा बन गई है। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
खिलाड़ियों के पदक युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी खिलाड़ी की वास्तविक उपलब्धि और उसके द्वारा जीता गया पदक युवाओं को प्रेरित करने में किसी भी मौखिक संदेश से अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने कहा कि जब स्कूली बच्चे अपने ही देश के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराते और पदक जीतते देखते हैं तो उनके भीतर भी खेलों में आगे बढ़ने का विश्वास पैदा होता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उदाहरण और प्रेरणा बनती है। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि देश की अपेक्षाएं उनसे जुड़ी हैं और उनकी उपलब्धियां लाखों युवाओं को खेलों की ओर आकर्षित कर रही हैं।
बेटियों के खेल को लेकर भी हुई चर्चा
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने एक खिलाड़ी के साथ उनकी बेटियों के खेल में आगे बढ़ने को लेकर चर्चा की। खिलाड़ी ने अपनी बेटियों की खेल यात्रा और उनकी प्रगति के बारे में जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने उनके आत्मविश्वास और बेटियों के प्रति विश्वास की सराहना करते हुए आगामी राष्ट्रमंडल खेलों में उनकी बेटियों से तीन पदक जीतने की उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा कि परिवार का समर्थन और विश्वास किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए महत्वपूर्ण आधार होता है। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ी के संकल्प और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित किया।
संघर्ष और समर्पण की कहानियों को किया याद
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों की सफलता के पीछे छिपे संघर्ष और कठिन परिश्रम की भी सराहना की। उन्होंने ऐसे खिलाड़ी का उल्लेख किया जिसने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हासिल की गई अपनी जीत अपने कोच को समर्पित की थी।
उन्होंने एक अन्य खिलाड़ी की दृढ़ता का भी उल्लेख किया, जिसने लगातार चार वर्षों तक चोटों और व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना करने के बाद पोडियम पर राष्ट्रीय ध्वज को ऊंचा लहराते हुए देखा। इस भावुक क्षण का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी जीत केवल खिलाड़ी की व्यक्तिगत सफलता नहीं होती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत बन जाती है।
भारतीय मुक्केबाजों का बढ़ा अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों के बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर के खिलाड़ी अब भारतीय प्रतिद्वंद्वियों को पहले की तुलना में अधिक गंभीर चुनौती के रूप में देखते हैं। विशेष रूप से भारतीय मुक्केबाजों की बढ़ती प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के खिलाड़ी अब भारतीय मुक्केबाजों के साथ मुकाबले को लेकर अधिक सतर्क रहते हैं।
खिलाड़ियों ने इस दौरान खेलो इंडिया जैसी जमीनी स्तर की पहलों और सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही लगातार प्रतियोगिता तथा प्रशिक्षण सहायता के अपने अनुभव साझा किए। प्रधानमंत्री ने माना कि ऐसी योजनाओं ने देश के युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा विकसित करने और उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने का अवसर दिया है।
केवल खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं, खेल संस्कृति जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में खेलों की वास्तविक सफलता केवल स्टेडियम, प्रशिक्षण केंद्र और अन्य भौतिक सुविधाएं विकसित करने से हासिल नहीं होगी। देश में व्यापक खेल संस्कृति का निर्माण भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि खेलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण है, लेकिन जब तक समाज के हर वर्ग और देश के हर क्षेत्र में खेलों के प्रति रुचि और भागीदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक खेलों में अपेक्षित स्तर की सफलता हासिल करना कठिन होगा।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से सफलता हासिल करने के बाद भी सीखने और आगे बढ़ने की भावना बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को अपनी उपलब्धियों के साथ विनम्रता और निरंतर सीखने की भावना को बनाए रखना चाहिए।
भारतीय सेना के खिलाड़ी की देशभक्ति की सराहना
प्रधानमंत्री ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अपने पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वी को 5 0 से हराने वाले भारतीय सेना के एक खिलाड़ी की देशभक्ति की भी सराहना की। खिलाड़ी ने अपनी जीत भारतीय सेना के वीर जवानों को समर्पित की थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के प्रति ऐसा गौरव और समर्पण खेल उपलब्धि को और विशेष बना देता है। बातचीत के दौरान उन्होंने खिलाड़ी के सेना के कोच नरेंद्र राणा और अपने नाम नरेंद्र के बीच समानता को लेकर एक हल्का प्रसंग भी साझा किया।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से कहा कि उन्होंने केवल पदकों की संख्या नहीं बढ़ाई है, बल्कि एक पूरी पीढ़ी तैयार करने का काम किया है। उनकी उपलब्धियां युवाओं को यह विश्वास दिलाती हैं कि अनुशासन, मेहनत और निरंतर प्रयास के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।
साई और खेलो इंडिया के योगदान की सराहना
एक खिलाड़ी ने प्रशिक्षण के दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। खिलाड़ी ने बताया कि इन सुविधाओं ने स्थानीय स्तर के खेल केंद्र से अंतरराष्ट्रीय स्तर के पोडियम तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय खेल प्राधिकरण और खेलो इंडिया के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए निरंतर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने वाराणसी और भोपाल सहित विभिन्न क्षेत्रीय खेल केंद्रों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं के बारे में भी खिलाड़ियों से जानकारी ली। खिलाड़ियों ने अपने प्रशिक्षण अनुभव साझा किए और उज्जैन, काशी विश्वनाथ तथा महाकालेश्वर जैसे आध्यात्मिक स्थलों की यात्राओं का भी उल्लेख किया।
खिलाड़ियों को भविष्य की जीत के लिए शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को भविष्य में भी सरकार और देश का समर्थन मिलता रहेगा। उन्होंने खिलाड़ियों को आगामी प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे आगे भी देश के लिए पदक जीतेंगे और एक बार फिर उनसे मिलने का अवसर मिलेगा।
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने एक बहु पदक विजेता खिलाड़ी को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दीं और व्यक्तिगत रूप से मिठाई देकर इस अवसर की खुशी साझा की। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को सकारात्मक सोच के साथ अपनी सफलता की गति बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया तथा लगातार तीसरी बार पदक जीतने के लिए शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, “जो खेलता है, वह खिलता है।” उनका यह संदेश न केवल मौजूदा चैंपियनों के लिए बल्कि देश के उन लाखों युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है जो खेलों में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियनों के साथ प्रधानमंत्री की यह बातचीत भारतीय खेलों में आए बदलाव और भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित करती है। खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय सफलता, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं, जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान और खेलो इंडिया जैसी पहलों ने देश में खेलों के लिए नया वातावरण तैयार किया है। अब चुनौती इन उपलब्धियों को व्यापक खेल संस्कृति में बदलने की है, ताकि देश के अधिक से अधिक युवा खेलों को करियर और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में अपना सकें।