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बड़ी तादाद में पहुँचे श्रद्धालु; पीले वस्त्रों में लिया सात्विक महाप्रसादी का आनंद

वसंत पंचमी के अवसर पर पकाया गया तीन लाख श्रद्धालुओं के लिए भोजन महाप्रसाद 

अब तक 25 लाख लोगों ने लिया अदाणी इस्कॉन की रसोई में पका सात्विक और जायकेदार भोजन महाप्रसाद 

प्रयागराज: प्रयागराज के महाकुंभ मेले में वसंत पंचमी का उल्लास देखते ही बना। माँ सरस्वती को समर्पित वसंत पंचमी के दिन श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर बहुत ही व्यापक संख्या में दूर-दराज के इलाकों से पहुँचे। महाकुंभ के दौरान माँ सरस्वती नदी में स्नान करने का सौभग्य प्रयागराज में आने वाले लोगों को मिला। महाकुंभ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अदाणी समूह और इस्कॉन द्वारा साथ मिलकर की जा रही नारायण सेवा भी वसंत पंचमी पर विशेष आकर्षण का केंद्र बनी। पूरी तरह नि:शुल्क स्वादिष्ठ और सात्विक महाप्रसादी वितरण का लाभ प्रतिदिन 1 लाख श्रद्धालुओं को मिल रहा है। वसंत पंचमी के अवसर श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होने के परिणामस्वरूप भोजन प्रसादी भी प्रतिदिन की अपेक्षा अधिक वितरित की गई। 

महाप्रसादी के वितरण के दौरान श्रद्धालुओं को चंदन तिलक लगाकर उनका स्वागत किया गया, जिससे यह दिन और भी विशेष बन गया। पंडाल में दिनभर श्रद्धालुओं की आवा-जाही लगी रही, लेकिन कोई भी भूखा नहीं लौटा। इस दिन की एक और बात जो सबसे विशेष रही, वह यह कि अदाणी और इस्कॉन के स्वयंसेवक पूरे दिन पीले वस्त्र पहने रहे। इससे भी विशेष, बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पीले वस्त्रों में भोजन प्रसादी लेने पहुँचे, जिसके परिणामस्वरूप पंडाल पीताम्बर से सज गया। 

महाकुंभ में अदाणी का यह छोटा-सा योगदान पहले दिन से जारी है, जो कि 22 दिन बाद भी समान रूप से किया जा रहा है। अब तक 25 लाख श्रद्धालु महाप्रसादी का लाभ ले चुके हैं। यह महाप्रसादी पंडाल के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर भी मिल रही है। यानि पंडाल में तो भोजन प्रसादी का वितरण चल ही रहा है, लेकिन अदाणी और इस्कॉन के स्वयंसेवक चौक-चौराहों, जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी प्रसादी का वितरण कर रहे हैं, ताकि दूर-दराज इलाकों से थककर आए श्रद्धालुओं को भोजन के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।

गौरतलब है कि देश ही नहीं, विदेशों से भी भारी संख्या में लोग महाकुंभ में पहुँच रहे हैं। आम जनता, वीआईपी, वीवीआईपी, सितारे, नेता, जानी-मानी हस्तियाँ और बड़े-बड़े नेता भी तमाम लोग महाकुंभ में पहुँच रहे हैं और गरीब हों या अमीर, साथ बैठकर समान रूप से भोजन प्रसादी का आनंद ले रहे हैं। यह विशेषता है महाकुंभ की। कहने का अर्थ है कि यह महाकुंभ है, यहाँ हर एक शख्स सिर्फ एक इंसान है। महाप्रसादी के क्षेत्र में कोई वीआईपी नहीं है और न ही किसी तरह का वीआईपी ट्रीटमेंट किसी को दिया जा रहा है। यहाँ न कोई बड़ा है, न छोटा, सब एक हैं। 

महाकुंभ 2025 में हर दिन अदाणी-इस्कॉन के एक किचन में 500 क्विंटल सब्जी बनाई जा रही है। सब्जी लोकल वेंडर्स से खरीदी जा रही है और महिला वेंडर्स को प्राथमिकता दी जा रही है। एलपीजी के साथ ही खाना बनाने में गाय के उपलों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। एक दिन में कई क्विंटल उपलों का इस्तेमाल हो रहा है। उपले इस्कॉन के विभिन्न सेंटर्स और लोकल वेंडर्स से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पत्तलों में खाना खिलाया जा रहा है, और प्लास्टिक चम्मचों और गिलासों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। एक दिन में 3 लाख पत्तलों का इस्तेमाल हो रहा है, और खरीदारी लोकल वेंडर्स से की जा रही है।

महाकुंभ की जा रही यह नारायण सेवा हमें सिखाती है कि भले ही समस्याएँ कितनी भी बड़ी क्यों न हों, यदि सेवा और समर्पण का भाव हो, तो हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है। भूख को मिटाना, आत्मा को तृप्त करना, और इंसानियत को जिंदा रखना.. यही अदाणी समूह और इस्कॉन द्वारा की जा रही सेवा का वास्तविक सार है।

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