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एकस्टेप फाउंडेशन ने एनडीटीवी के साथ मिलकर शुरू किया ‘बचपन मनाओ’ मिशन

एकस्टेप फाउंडेशन ने एनडीटीवी के साथ मिलकर ‘बचपन मनाओ मिशन’ की शुरुआत की है। सालभर चलने वाला यह विशेष अभियान एनडीटीवी के टीवी, डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर संचालित होगा। इस अभियान का उद्देश्य बचपन के शुरुआती वर्षों को सीखने और विकास के अनमोल अवसर के रूप में पहचान दिलाना है, जहाँ खेल और आनंद के माध्यम से शिक्षा को सबसे अच्छे तरीके से अपनाया जा सकता है। इस पहल के तहत ‘कम स्क्रीन, ज्यादा खेल’ प्रतिज्ञा भी शुरू की गई है, जिससे बच्चे स्क्रीन टाइम कम करके खेल के माध्यम से सीखने के लिए जागरूक हों। कई शोध यह साबित करते हैं कि खेल ही असली सीख हैं और ये बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए बेहद जरूरी हैं।

इस अभियान की शुरुआत कई आयोजनों, चर्चाओं और समर्थन के साथ हुई। आधिकारिक लॉन्च एनडीटीवी पर एक खास शो के जरिए हुआ, जिसे पूरे देश में प्रसारित किया गया। इस शो में बाल अधिकार कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, बाल मनोवैज्ञानिकों, पैरेंट इन्फ्लुएंसर और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। ‘बचपन मनाओ’ का उद्देश्य यह बताना है कि खेल और खुशी के जरिए सीखना ही बच्चों के लिए सबसे अच्छा तरीका है। एकस्टेप फाउंडेशन और एनडीटीवी मिलकर इस जरुरी विषय को हर घर तक पहुँचा रहे हैं।

अभियान के तहत ‘हाउ टू बचपन मनाओ’ पहल चलाई जा रही है, जिसमें माता-पिता, देखभाल करने वालों और अन्य बड़ों को बच्चों की शुरुआती शिक्षा, खेल और खुशहाल बचपन से जुड़े उपयोगी सुझाव दिए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और एनसीएफ फाउंडेशनल स्टेज भी भी खेल-आधारित शिक्षा को महत्व देते हैं और 8 साल तक की उम्र को सीखने और विकास की एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में देखने पर जोर देते हैं।

इस जश्न के तहत देशभर में कई ज़मीनी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। ‘बचपन मनाओ त्यौहार’ पिछले दो सालों से मध्यप्रदेश के छतरपुर में स्थित आँगनवाड़ियों में मनाया जा रहा है। की एजुकेशन फाउंडेशन की मदद से यह पहल पूरी बस्ती को एक साथ लाने और बच्चों की शिक्षा में खेल की अहमियत पर ध्यान केंद्रित करने का जरिया बन गई है। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के दामोदर जोट गाँव में, आगा खान फाउंडेशन द्वारा शुरू किए गए ‘खेल कोना’ (प्ले कॉर्नर) बच्चों के लिए सीखने के समृद्ध स्थान बन गए हैं। यहाँ हर घर के बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं, क्योंकि इसके लिए परिवार की आर्थिक स्थिति मायने नहीं रखती। यहाँ माता-पिता और परिवार के सदस्य पुरानी बोतलों और टेट्रा पैक्स से खिलौने बनाकर यह साबित कर रहे हैं कि सीखने के लिए महँगे खिलौनों की जरूरत नहीं होती। इसी तरह, दिल्ली के पूर्वी इलाकों में प्रथम फाउंडेशन के मातृ समूह माताओं के लिए एक सुरक्षित और सहयोगी मंच बन गए हैं, जहाँ वे बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के नए तरीकों को समझ रही हैं। इन समूहों की माताओं का कहना है कि जब बच्चे खेलते हैं, तो वे स्क्रीन को भूल जाते हैं। ये मातृ समूह एक-दूसरे से सीखने और मिलकर काम करने का एक मजबूत स्थान बन गए हैं।

‘बचपन मनाओ’ मिशन, को पूरे भारत में 100 से अधिक संगठनों का समर्थन मिला है। यह बचपन और खेल के महत्व को लेकर बड़े पैमाने पर लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है। इस पहल में कई विशेषज्ञों और प्रभावशाली व्यक्तियों ने खेल के महत्व पर जोर दिया।

अर्ली चाइल्डहुड एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. स्वाति पोपट वत्स ने कहा, “खेल सीखने का इंजन है। यदि यह इंजन हटा दें, तो जीवन और सीखने की ट्रेन आगे कैसे बढ़ेगी? खेल और सीखना अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इसलिए बचपन को खेल-कूद से सँवारना है, खेल-कूद से सँभालना है और खेल-कूद से मनाना है।”

पैरेंटिंग और शिक्षा पर स्वतंत्र शोधकर्ता हरप्रीत ग्रोवर (@thecuriousparent) ने कहा, “माता-पिता के रूप में हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे गणित और विज्ञान सीखें, लेकिन हमें समझना होगा कि दिमाग का विकास खेल के माध्यम से  ही होता है। खेल ही वह नींव है, जो बच्चे को आगे चलकर गणित और विज्ञान सीखने में मदद करती है।”

बाल एवं किशोर मनोवैज्ञानिक डॉ. ज़िराक मार्कर ने कहा, “आज की पीढ़ी के बच्चों को बढ़ते तनाव और चिंता से बचाने के लिए खेल बेहद जरूरी है। खेल से समूह में काम करने की समझ, नेतृत्व क्षमता, गुस्से को नियंत्रित करने की कला, दया और सहानुभूति जैसे सामाजिक-भावनात्मक कौशल विकसित होते हैं। यह सिखाता है कि असफल होना भी ठीक है और सिर्फ जीतना ही सबकुछ नहीं होता।”

यूनिसेफ इंडिया की शिक्षा विशेषज्ञ सुनीषा आहूजा ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने 11 जून को ‘इंटरनेशनल डे ऑफ प्ले’ घोषित किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बच्चों के पहले 3000 दिनों में खेल कितना महत्वपूर्ण है।

संडे ब्रिक्स की फाउंडर मृणाल शाह ने कहा, “खेल बच्चों के लिए सबसे प्रभावी व्यावहारिक शिक्षा है। यह उन्हें मोबाइल स्क्रीन से दूर रखता है और वास्तविक दुनिया में सीखने के अनुभव से जोड़ता है।”

आने वाले साल पर बात करते हुए एकस्टेप फाउंडेशन की चीफ ऑफ पॉलिसी एंड पार्टनरशिप्स, दीपिका मोगिलीशेट्टी ने कहा, “बचपन मनाओ सौ से ज्यादा संगठनों का साझा प्रयास है, जिसे सभी अपना रहे हैं। यह अधिक से अधिक लोगों को इससे जुड़ने और इसे अपनी पहल बनाने के लिए आमंत्रित करता है। ‘बचपन मनाओ’ एक बढ़ता हुआ कारवां है, जिसमें हर दिन नए लोग शामिल हो रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “इस साल हम पूरे देश से कहानियाँ लेकर आएँगे कैसे आँगनवाड़ियों में बदलाव आ रहा है, प्री-स्कूल में नई रोचक पहल हो रही हैं, माता-पिता किस तरह चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और उन्हें पार कर रहे हैं। हमारा फोकस ऐसे समाधानों पर रहेगा, जो स्थानीय समुदायों से निकलकर उन जगहों तक पहुँचें, जहाँ उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है।”

एकस्टेप फाउंडेशन की को-फाउंडर और डायरेक्टर, रोहिणी निलेकणी ने कहा, “एनडीटीवी के साथ यह साझेदारी हमारे लिए बहुत खास है। यह ‘बचपन मनाओ’ के विचार को समाज के बड़े वर्ग तक पहुँचाने में मदद करेगी। इससे देशभर में कई संगठनों द्वारा जमीनी स्तर पर किए जा रहे खेल-खेल में सीखने के प्रयासों को और गति मिलेगी।”

उन्होंने आगे कहा, “हर साल भारत में लाखों बच्चे जन्म लेते हैं, और हमारे पास एक अनूठा अवसर है कि उनके लिए एक मजबूत बुनियाद तैयार करें। हमें शिक्षकों, माता-पिता और परिवारों को यह समझाने की जरूरत है कि बच्चे के जीवन के पहले आठ साल कितने अहम् हैं। इस दौरान दिमाग हर सेकंड लाखों न्यूरॉनल कनेक्शन बनाता है, जो सीखने की नींव रखते हैं। शोध स्पष्ट करते हैं कि स्वतंत्र खेल से बच्चे और बेहतर तरीके से विकसित होते हैं। यदि बच्चे के आसपास के वयस्क उसे खोजने और समझने के लिए प्रेरित करें, तो वह खुद से सीखने का हुनर विकसित करेगा, जो तेजी से बदलती दुनिया में उसके काम आएगा। ये ही बच्चे विकसित भारत के भविष्य निर्माता होंगे। ज़रा सोचिए, जब हम बचपन को खुलकर जीने दें, अपने भीतर के बच्चे को बाहर आने दें और बच्चों को खेलने का अवसर दें, तो हम अपने देश के भविष्य में योगदान दे रहे होते हैं। इससे अधिक आनंददायक बात और क्या हो सकती है? बचपन मनाओ, सीखते जाओ!”

एकस्टेप फाउंडेशन के को-फाउंडर और सीईओ, शंकर मरुवाडा ने एनडीटीवी द्वारा ‘बचपन मनाओ’ अभियान शुरू करने के महत्व पर कहा, “एकस्टेप में हम उन पहलों पर काम करते हैं, जो लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की संभावना उत्पन्न करती हैं। ‘बचपन मनाओ’ पहले आठ सालों पर केंद्रित एक बेहद अहम् चर्चा है। भारत में कई संगठन और सरकारी प्रयास छोटे बच्चों के जीवन को सँवारने में जुटे हैं। एनडीटीवी के साथ यह साझेदारी इन प्रयासों के प्रभाव को और मजबूत करेगी।”

एनडीटीवी नेटवर्क के डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ, संजय पुगलिया ने कहा, “जब एकस्टेप फाउंडेशन ने हमें इस खूबसूरत पहल में साझेदारी के लिए आमंत्रित किया, तो हमें तुरंत लगा कि हमें इसका हिस्सा बनना चाहिए। ‘बचपन मनाओ’ सिर्फ एक उत्सव नहीं है, बल्कि विकसित भारत की नींव रखने का जरिया है। यह तभी संभव होगा जब पूरा देश एकजुट होकर इसे वक्त की जरूरत के रूप में देखे। इस अभियान के जरिए हम हर किसी को जोड़ना चाहते हैं, जिनमें कॉर्पोरेट्स, सेलेब्रिटीज़, सरकारें, समुदाय, माता-पिता, दादा-दादी, नानी-नाना आदि शामिल हैं। कुल मिलाकर, हर वह व्यक्ति जो भारत के भविष्य की परवाह करता है, इस महत्वपूर्ण पहल का हिस्सा बन सकता है।”

मुस्कान सिंह

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