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क्या एक लड़की होना पाप है? क्यों हमें सम्मान नहीं मिलता…

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष

ज़ेबा खान

 आखिर हम इस समाज में कब तक महिलओं को दबाते रहेंगे कभी घर-परिवार के नाम पर तो कभी पिता का मान-सम्मान बचाने के लिए हमेशा एक बेटी, महिला और पत्नी को अपना मन मसूसकर कब तक रहना पड़ेगा। क्या इस पुरुष प्रधान देश में केवल एक दिन महिला दिवस मना लेने से उनकी बद से बत्तर हालत को सुधार जा सकता, बात चाहे किसी भी धर्म की हो, लेकिन एक महिला को वो इज्जत वो प्रेम कभी नहीं मिला जो उन्हें भगवान की तरफ से दिया गया है। हिन्दू धर्म में महिला का लक्ष्मी का रूप माना गया है, तो वहीं मुस्लिम समाज की किताब कुरान में तो बेटी को रहमत का दर्जा दिया है, सबसे पहले चीज़ देना का हुक्म भी बेटी को दिया गया उसको पिता की सम्पत्ति में हिस्सा में दिया गया है लेकिन इस समाज के पुरुष इतना कुरूर हो गया हैं कि वो अपनी बेटी, पत्नी, बहन का हक़ तो मरते ही है और अगर घर में कन्या का जन्म हो जाये तो बहुत बढ़ा पाप मानकर महिला को प्रताड़ित किया जाता है यहाँ तक की उसको तलाक तक दे दिया जाता है।

हर युग में  महिलों की पुरुषों ने धज्जियाँ उडा कर रख दी हैं अगर बात आज के समय की  करें तो एक 70 वर्ष की बुजुर्ग महिला हो या एक साल की मासूम सी कली उसके अपने रिश्तेदार अपने घर में ही बलात्कार कर देते हैं।

आखिर महिलाओं को पुरुष इन्सान होने का भी हक़ नही दे सकते और साल में एक बार महिला दिवस मना कर सोच लेते हैं कि देश की महिलाओं को उनका हक़, इज्ज़त, प्रेम सब कुछ उनको मिल गया। जिस भगवान/अल्लाह ने माँ के क़दमों में जन्नत रख दिए आज उसी माँ-बहन को पुरुष अपने पैरों तलें रोंद के चले जाते हैं। उन्हें इज्जत के नाम पर दी जाती है चंद योजनाओं का लोलीपोप जैसे:- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना। सुकन्या समृद्धि योजना। महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने से आर्थिक रूप से मजबूत होना। महिला सम्मान बचत पत्र योजना के जरिए 2 लाख रुपए तक निवेश पर 7.5 फीसदी ब्याज मिलना। ग्रामीण महिलाओं के लिए महिला शक्ति केंद्र स्कीम लाना। मातृत्व दिवस अवकाश 12 की जगह 26 हफ्ते करना। प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना के तहत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को बच्चे के जन्म पर 5000 रुपए देना । मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक पर कानूनी पाबंदी। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त एलपीजी कलनेक्शन और सिलेंडर देना। महिला ई-हाट स्कीम शुरू करना। महिलाओं के लिए कई स्टार्टअप स्कीम। महिला पोषण अभियान। महिला हेल्पलाइन योजना। सुरक्षित मातृत्व आश्वासन सुमन योजना। फ्री सिलाई मशीन योजना के तहत हर राज्य में सालाना 50 हजार से अधिक सिलाई मशीन फ्री में देना। आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपए तक फ्री में इलाज। वर्किंग वुमेन हॉस्टल स्कीम चालू करना। वन स्टॉप सेंटर स्कीम, जिसके तहत हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सभी तरह की मदद एक ही छत के नीचे मिलना। मातृत्व वंदन योजना के तहत गर्भवती महिला को पौष्टिक आहार योजना आदि क्या सिर्फ इन योजनाओं से महिलाओं का उनका हक और सम्मान मिल सकता है।

क्या वो उन मान-सम्मान की हक़दार नही हैं जो उन्हें ऊपर वाले ने (ईश्वर/ अल्लाह ) ने उन्हें दिया है। क्या वो उस मान सम्मान की हक़दार नहीं जो एक पुरुष को परिवार से मिलता है। और इनकी सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाने के ज़रूरत है जिससे बलात्कारियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले जिससे बलात्कार जैसी घटनाओं से महिला और मासूम बच्चों को बचाया जा सके और वो खुली हवा में साँस ले सकें। उन्हें घर से निकलने से पहले अपनी सुरक्षा की चिंता न हो और वो खुलकर अपनी ज़िन्दगी घर और बाहर जी सकें। काश की भारत सरकार महिला की सुरक्षा के लिए कोई कड़े नियम बनाये जिसे उनका स्लोकन “बेटी बचाओ बेटी पढ़ों” सार्थक हो सके।

ज़ेबा खान
ज़ेबा खान
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