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“कलम की महफिल” पुस्तक का विमोचन

साहित्य में विचारों को बदलने की क्षमता :सुरेश सिंह बैस

छत्तीसगढ़ :  बिलासपुर नगर के साहित्यकार सुरेश सिंह बैस शाश्वत  की साझा काव्य संकलन पुस्तक “कलम की महफिल” का आर्या पब्लिकेशंस द्वारा विमोचन किया गया। विमोचन के दौरान सुरेश सिंह बैस शाश्वत ने बताया कि भाषा तो वैसे भी अभिव्यक्ति का माध्यम होती है लेकिन जिस भाषा में आपके मनोभाव और मनोविचार आसानी से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाएं वही भाषा आपके लिए प्रथम प्रिय हो जाती है। लिखने का मेरा एक अभिप्राय: यह भी रहता है कि उससे नई पीढ़ी प्रेरित हो और सही रास्ते पर चलने का प्रयास करें। मैंने अपने लेखन में प्रायः सामाजिक अंतर्द्वंद व जनभावना को अपने निजी अनुभव के माध्यम से उकेरने का प्रयास किया। साहित्य लोगों के बुद्धि परिष्करण में अगर काम आ जाए उससे बड़ी बात क्या हो सकती है। साहित्य में वह क्षमता होती है जो लोगों के विचारों को बदल कर रख सकती है। भगवान ने हम मनुष्यों को वाणी दी और वाणी के साथ भाषा का ज्ञान दिया।

सभी भाषाओं की जननी संस्कृत है, स्वाभाविक है हिंदी भी संस्कृत से निकली हुई परिष्कृत भाषा है। और जिस पर लिखने का पढ़ने का एक अलग ही आनंद और अनुभव मिलता है। लेकिन जब जब लेखनी के माध्यम से अपनी बात अधिकाधिक लोगों तक सुगमता से पहुंचा पाते हैं, तो वह क्षण सुकून के अतिरेक का होता है। मातृभाषा और बोलचाल की भाषा होने के नाते हिंदी मुझे वैसे ही प्यारी है। मैंने साहित्य में पहला कदम तब रखा था और वह क्षण मेरे लिए जीवन भर के लिए प्रेरणादाई बना, जब सबसे प्रथम स्कूल में साहित्यिक सचिव के पद पर नियुक्त किया गया।  मैंने उस समय लिखन शुरू ही किया  था सो तुरंत लिखी हुई कविता “आकाश का वह एक तारा” मैंने अपने प्रिंसिपल साहब के पास जमा करवा दी थी।कविता पर उन्होंने काफी प्रशंसा करते हुए मुझे साहित्यिक सचिव पद पर नियुक्त किया था। एक दूसरी घटना में जब यंग चैंबर संस्था द्वारा लेख प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें मैंने सर्वश्रेष्ठ द्वितीय स्थान प्राप्त किया। मेरे लेख का आंकलन कर मुझे पुरस्कृत करने स्वयं सुविख्यात साहित्यकार स्व. पालेश्वर शर्मा जी ने पुरस्कार देते हुए कहा था कि” बेटा तुमने बहुत अच्छा लिखा है ऐसे ही लिखते रहना”। उनके यह शब्द मुझे अंदर तक आनंदित और प्रेरित कर गए थे। फिर तो मुझे ऐसी प्रेरणा मिली और कि मैं फिर आज तक हिंदी साहित्य के कविता एवं लेखन में रमा हुआ हूँ। पत्रकारिता में भी मैंने अनेक अखबारों में काम किया है।

कृतित्व व प्रकाशित पुस्तक

कविता संकलन “कवियों का    
      संसार” प्रकाशित
“गुनगुनाते शब्द “भाग 2 कविताएं एवं संस्मरण रिपोर्ट संकलन प्रकाशित
“कलम की महफिल” कविता संकलन प्रकाशित
विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में विभिन्न    
    लेख ,कविताएं प्रकाशित  
लोक धर्म संस्कृति पर आधारित 
     पुस्तक शीघ्र प्रकाशित।

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