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मोदी की विदेश नीति– वैश्विक राजनीति में भारत की नई पहचान

कुमार राजीव रंजन सिंह
कुमार राजीव रंजन सिंह

“मोदी की विदेश नीति” पुस्तक,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2014 से 2024 तक की विदेश नीति पर केंद्रित है। डायमंड पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित पुस्तक¸ मोदी की विदेश नीति जिसका लेखक कुमार राजीव रंजन सिंह और संपादन संजय सिंह ने किया है। कुमार राजीव रंजन सिंह छात्र जीवन से ही राजनीतिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों में गहरी रुचि रखने लगे जिस वजह से देश के सामने तमाम चुनौतियों और समस्याओं से उद्वेलित राजीव रंजन छात्र नेता रहने के दौरान ही राष्ट्रीय राजनीति में गहराई तक जुड़ गए और समसामयिक मुद्दों को उठाते रहे। उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा उनकी राजनीति मुख्य रूप से युवाओं के साथ जुड़कर उनके मुद्दों के प्रति आम लोगों में जागरूकता फ़ैलाने का रहा है। श्री मोदी के नेतृत्व में युवाओं से जुड़े मुद्दों के केंद्र में आने से प्रभावित होकर वे ‘यंग इंडिया’ से जुड़ गए। श्री राजीव रंजन ने बदलते भारत के बदलते राजनीतिक परिदृश्य में बौद्धिक प्रतिभाओं की जरूरत को देखते हुए एक ऐसी संस्था की कल्पना की जो सामाजिक, आर्थिक विकास के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती में भी सहायक हो। इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने 2022 में एक थिंक टैंक ‘इंडिया सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड डेवलपमेंट’ (ICPRD) की स्थापना की। युवा सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्ध कुमार राजीव रंजन सिंह देश की प्रगति एवं उन्नति के लिए सामूहिकता में विश्वास करते हैं।

मोदी की विदेश नीति
मोदी की विदेश नीति

मोदी की विदेश नीति पुस्तक में मोदी सरकार की विदेश नीति को विस्तार से समझाया गया है और इसे उनके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों की नीतियों से अलग और प्रभावशाली बताया गया है। यह पुस्तक दो खंडों में विभाजित है। पहले खंड में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बहुपक्षीय मंचों में भारत की भूमिका का विश्लेषण किया गया है, जबकि दूसरे खंड में भारत के विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों की चर्चा की गई है। पुस्तक में कुल सात अध्याय हैं, जो निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित हैं:

भारत की विदेश नीति और उसका प्रबुद्ध उदय, नरेंद्र मोदी का भारत,  लुक ईस्ट पॉलिसी से एक्ट ईस्ट पॉलिसी तक, मोदी की पड़ोसी प्रथम नीति, दुनिया के 74 देशों की रिकॉर्ड यात्राएं, अंतर-सरकारी संगठनों में भारत की भूमिका,  जी-20, बिम्सटेक और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भारत, विदेश नीति की विशेषताएँ। मोदी सरकार की विदेश नीति को इस पुस्तक में “वैश्विक नेता” दृष्टिकोण से देखा गया है। पुस्तक में बताया गया है कि मोदी की विदेश नीति सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भारत को एक शक्तिशाली वैश्विक शक्ति बनाने की दृष्टि स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

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पड़ोसी देशों के साथ संबंध

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान सबसे पहले पड़ोसी देशों से मजबूत संबंध स्थापित करने पर ध्यान दिया। उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा भूटान से शुरू की और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मिलने के लिए बिना किसी पूर्व निर्धारित योजना के लाहौर पहुंच गए। यह उनकी अनौपचारिक कूटनीति का एक उदाहरण था, जो पारंपरिक तरीकों से अलग था।

चीन के साथ संबंध

पुस्तक में यह बताया गया है कि मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को महाबलीपुरम आमंत्रित करके एक ऐतिहासिक संदेश दिया। हालांकि, गलवान संघर्ष के बाद भारत ने चीन के प्रति एक कठोर नीति अपनाई और स्पष्ट कर दिया कि जब तक सीमा पर हालात सामान्य नहीं होंगे, तब तक द्विपक्षीय संबंध भी सामान्य नहीं होंगे।

अमेरिका और रूस के साथ संबंध

मोदी सरकार के दौरान भारत ने अमेरिका और रूस दोनों के साथ संतुलन बनाए रखा। पुस्तक में उल्लेख है कि मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक मजबूत व्यक्तिगत रिश्ता बनाया, वहीं रूस के साथ भारत की ऐतिहासिक मित्रता को और मजबूत किया।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका

पुस्तक में इस बात पर जोर दिया गया है कि मोदी सरकार ने भारत को वैश्विक कूटनीति में एक मजबूत स्थान दिलाया। जी-20, बिम्सटेक, क्वाड और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक सक्रिय रही। भारत की वैश्विक कूटनीति का एक उदाहरण कोरोना महामारी के दौरान ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल रही, जिसमें भारत ने विभिन्न देशों को मुफ्त में वैक्सीन प्रदान की।

पाकिस्तान और रक्षा नीति

मोदी सरकार ने पाकिस्तान को लेकर अपनी नीति में कोई ढील नहीं दी। सीमा पार आतंकवाद और उरी तथा पुलवामा हमलों के बाद भारत ने सर्जिकल और एयर स्ट्राइक करके स्पष्ट संदेश दिया कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कोई भी कदम उठा सकता है।

पुस्तक का लेखन विश्लेषणात्मक और शोधपरक है। लेखक ने विभिन्न घटनाओं का संदर्भ देते हुए यह स्पष्ट किया है कि मोदी सरकार की विदेश नीति में किस प्रकार बदलाव आया है और यह भारत के वैश्विक स्थान को कैसे मजबूत कर रही है। लेखक ने मोदी सरकार की विदेश नीति की उपलब्धियों को तो प्रमुखता से दर्शाया है, लेकिन कुछ विवादास्पद मामलों जैसे कि चीन के साथ तनाव और पड़ोसी देशों के साथ कुछ असफल प्रयासों का विश्लेषण कम किया गया है।

“मोदी की विदेश नीति” एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो भारत की कूटनीति और वैश्विक राजनीति में उसकी भूमिका को समझने के लिए उपयोगी है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों, भारतीय विदेश नीति और मोदी सरकार की कूटनीतिक रणनीतियों को गहराई से समझना चाहते हैं।

पुस्तक के प्रमुख सकारात्मक बिंदु: मोदी सरकार की विदेश नीति का गहराई से विश्लेषण, भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों की विस्तृत व्याख्या, शोधपरक दृष्टिकोण और घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन कुल मिलाकर, यह पुस्तक नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को समझने के लिए एक अच्छा स्रोत है, लेकिन इसे पढ़ते समय एक संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखना जरूरी है।

पुस्तक : मोदी की विदेश नीति

लेखक : कुमार राजीव रंजन सिंह

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स

उमेश कुमार सिंह
उमेश कुमार सिंह
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