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ये पाकिस्तान है या आतंकिस्तान

पाकिस्तान को अब पूरी दुनिया अच्छी तरीके से जान गई है कि वैश्विक आतंकी फैक्ट्री का बहुत बड़ा केंद्र पाकिस्तान ही है। भारत ने पाकिस्तान पर कई आतंकवादी हमलों के लिए आरोप लगाया है, और यह तथ्य एक हद तक बहुत सही भी है पाकिस्तान ने के समर्थन में आतंकवादियों ने कई आतंकवादी हमले किए हैं जो अत्यंत ही घृणित व निंदनीय है जिनमें मुंबई हमला (2008), पठानकोट हमला (2016), और पुलवामा हमला (2019) शामिल हैं। भारत ने इन हमलों के लिए पाकिस्तान व उसके आतंकवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सबूत प्रस्तुत किए हैं, जिनमें आतंकवादी समूहों के साथ पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के संबंधों के सबूत शामिल हैं।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान पर दबाव डालने का आग्रह किया है ताकि वह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करे। पाकिस्तान की सरकार और उसके अधिकारी अक्सर आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा करते हैं, लेकिन वास्तविकता में वे अक्सर आतंकवादी समूहों को समर्थन देते हैं और उन्हें पनाह देते हैं। यही दोहरापन पाकिस्तान की विदेश नीति और उसके आतंकवाद के प्रति दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह नीति ही उसके लिए भस्मासुर साबित हो रही है।

पाकिस्तान अक्सर अपने हितों को आगे बढ़ाने और अपने पड़ोसी देशों पर दबाव डालने के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल करता है। इसलिए, जब पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा करता है, तो यह अक्सर उसके वास्तविक इरादों को छिपाने के लिए एक तरीका होता है। 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी घटनाएक बहुत ही दुखद और भयानक घटना थी। इस घटना में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जो कि एक बहुत बड़ा नुकसान है। इस घटना के पीछे पाकिस्तान की शह पर आतंकवादी समूहों का हाथ होने की पूरी आशंका है। भारतीय सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने इस घटना की जांच की और आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई की। लेकिन यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि आतंकवाद एक बहुत बड़ा खतरा है और इसके खिलाफ हमें संयुक्त रूप से लड़ना होगा। कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पाकिस्तान पर आतंकवादी समूहों को समर्थन देने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान को आतंकवाद के समर्थन के लिए कई बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा आलोचना का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान पर यह आरोप लगाया जाता है कि वह आतंकवादी समूहों को पनाह देता है, उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करता है, और उन्हें सैन्य प्रशिक्षण प्रदान करता है।

पाकिस्तान और आतंकवाद के बीच के संबंधों पर कुछ विशिष्ट पहलुओं पर गंभीरता से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें जैसे:

  • पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों की भूमिकाः पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों, जैसे कि आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस), पर आतंकवादी समूहों को समर्थन देने के आरोप लगाए गए हैं। और यह साबित भी हो चुका है।
  • पाकिस्तान में आतंकवादी समूहों की उपस्थितिः कई आतंकवादी समूह, जैसे कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, और तालिबान, सक्रिय हैं।
  • पाकिस्तान सरकार की नीतियाँ: दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए कई नीतियाँ और अभियान चलाए हैं। लेकिन करता वह एकदम इसके उलट जैसे लेकिन हाथी के दांत और खाने के दांत अलग होते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाः पाकिस्तान पर आतंकवाद के समर्थन के आरोपों के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बनी हुई है। पाकिस्तान को यह समझने की जरूरत है कि आतंकवाद को समर्थन देने के परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। भारत की कार्यवाही के बाद, पाकिस्तान को यह समझने की जरूरत है कि वह अपनी नीतियों में बदलाव लाने के लिए मजबूर हो सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दबाव भी पाकिस्तान पर बढ़ सकता है। यदि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ अपने संबंधों में खराबी का सामना कर सकता है। लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान की सरकार और सैन्य अधिकारी अपनी नीतियों में बदलाव लाने के लिए तैयार हों।

यदि पाकिस्तान में एक मजबूत और स्थिर सरकार होती है, तो वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए आवश्यक कदम उठा सकती है। हमें आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना चाहिए और इसके लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। पाकिस्तान को यह समझने की जरूरत है कि आतंकवाद को समर्थन देने के परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। दुनिया के देशों को आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए हमें एकजुट होकर काम करना चाहिए और इसके लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में हम आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत और प्रभावी लड़ाई लड़ पाएंगे।

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