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नीति आयोग का सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (सीएसआईआर-आईआईपी), देहरादून में अनुसंधान एवं विकास में सहजता पर दूसरी परामर्श बैठक में अनुसंधान एवं विकास सुधारों पर जोर

भारत के अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) प्रणाली में सुधार पर दूसरी राष्ट्रीय परामर्श बैठक आज सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (सीएसआईआर-आईआईपी), देहरादून, उत्तराखंड में शुरू हुई। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय बैठक मई 2025 में राजभवन, लखनऊ में आयोजित पहली परामर्श वार्ता के परिणामों पर आधारित है। यह भारत के अनुसंधान एवं विकास परितंत्र में प्रणालीगत चुनौतियों का समाधान करने के लिए नियोजित क्षेत्रीय बैठकों की श्रृंखला की दूसरी किस्त है। नीति आयोग की इस पहल का उद्देश्य देश में एक दूरदर्शी, नवाचार-संचालित और लचीला अनुसंधान परितंत्र तैयार करना है। इसमें सरकार के वित्त पोषित अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और प्रयोगशालाओं की क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

देहरादून में आयोजित इस बैठक का उद्घाटन सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलईसेलवी तथा भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष शर्मा, सीएसआईआर-आईआईपी के निदेशक डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट और प्रमुख वैज्ञानिक मंत्रालयों तथा विभागों के अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों सहित कई प्रतिष्ठित गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति में हुआ। नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार प्रो. विवेक कुमार सिंह ने संस्थागत दक्षता, नवाचार-केंद्रित शासन और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ाने पर केंद्रित विषयगत रूपरेखा निर्धारित करके दिन के विचार-विमर्श की शुरुआत की।

परामर्श बैठक के उद्घाटन सत्र के दौरान, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत ने भारत के सरकारी वित्तपोषित अनुसंधान एवं विकास संस्थानों को गतिशील, स्वायत्त और मिशन-संचालित परितंत्र में बदलने की महत्वपूर्ण जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान को नौकरशाही की विलंबता और कठोर पदानुक्रम से मुक्त किया जाना चाहिए। इसके बजाय इसे विकेंद्रीकृत निर्णय लेने, समय पर वित्त पोषण और प्रदर्शन-आधारित जवाबदेही के माध्यम से सशक्त बनाया जाना चाहिए। डॉ. सारस्वत ने हितधारकों के साथ निरंतर जुड़ाव और साक्ष्य-आधारित नीति सिफारिशों के माध्यम से प्रणालीगत सुधार को आगे बढ़ाने के लिए नीति आयोग की प्रतिबद्धता को भी दोहराया। सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलईसेलवी ने इस अत्यंत आवश्यक संवाद को आयोजित करने में नीति आयोग के नेतृत्व की सराहना की और लंबे समय से चले आ रहे संरचनात्मक मुद्दों को हल करने में सहयोगी शासन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से दूसरी और तीसरी श्रेणी के संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास के बुनियादी ढांचे को दुरूस्त करने और प्रभावशाली अनुवादात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए उद्योग-अकादमिक भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

डॉ. कलईसेलवी ने स्थानीय नवाचार आवश्यकताओं के साथ राष्ट्रीय वैज्ञानिक प्रयासों को जोड़ने के महत्व के बारे में भी बात की। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष शर्मा ने विज्ञान के मानवीय आयाम की ओर ध्यान आकर्षित किया और शोधकर्ताओं पर अधिक भरोसा करने, बेवजह निगरानी को कम करने और वैज्ञानिक करियर के लिए लचीले रास्ते बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बेहतर अवसरों, मार्गदर्शन और वैश्विक परिवेश तक पहुंच के माध्यम से भारतीय संस्थानों में युवा प्रतिभाओं को बनाए रखने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। वर्तमान में चल रही यह बैठक 4 जून 2025 को संस्थागत शासन, शोधकर्ता गतिशीलता, अनुवादात्मक अनुसंधान और सार्वजनिक-निजी सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर केंद्रित चर्चाओं के साथ जारी रहेगी ।

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