NEW English Version

इस वर्ष पहली बार अरपा हुई लबालब : लगातार झड़ी से किसानों में खुशी

बिलासपुर। अब तक शहर व अरपा नदी के ऊपरी क्षेत्रों में साधारण रूप से बारिश हो रही थी। लेकिन पिछले तीन-चार दिनों से लगातार और दिन-रात झड़ी होने से पानी का स्तर सभी नदी नालियों में भर गया है। नदी के उपरी क्षेत्र खोड्री खोंगसरा एवं पेंड्रा  में भी भरपूर बरसात होने के कारण अरपा का जलस्तर काफी बढ़ गया।नदी पूरी तरह से पाटोपाट बह रही है, इसी वजह से बाढ़ के खतरे को देखते हुए अरपा नदी में बने हुए सभी एनिकट बैराज व भैंसाझार बांध के भी गेट खोलने पड़ गए। ज्ञात हो अरपा नदी में कल शाम से सलका डायवर्शन में जल का स्तर बढ़ने के कारण बाढ़ की स्थिति निर्मित होने कि सम्भावना को देखते हुए अरपा भैसाझार के गेट को सिचाई विभाग द्वारा खोल दिये गए हैं। आसमानी बारिश और बैराज का गेट भी खुलने से आज कि सुबह अरपा नदी लबालब होकर अपनें शबाब पर नजर आ रही है। सिचाई विभाग के दवारा एहतियातन खोले गये गेट के कारण, अरपा नदी में निचले क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो सकती है, बाढ़ की स्थिति निर्मित होने के पहले निगम व अन्य जिम्मेदार विभागों ने अपनी-अपनी तैयारी के लिए संबंधित कर्मियों को आगाह कर दिया है। 

इस वर्ष की पहली झडी और नदी हुई लबालब: खेती किसानी में आई तेजी

चालू वर्ष में बरसात शुरू हुए तो वैसे काफी दिन बीत गए हैं। लेकिन क्षेत्र में बरसात जैसी होनी चाहिए वैसी नहीं हो रही थी। क्षेत्र के किसान भी चिंतित होने लग गए थे, खेतों में थरहा लगा दिया गया था जो सूखने के कगार में आ रहे थे। कुछ किसानों का तो यह भी कहना था कि हमारे द्वारा लगाए गए  थरहा भी अब बड़े हो गये थे, लेकिन पानी जैसे गिरना चाहिए वैसा गिर नहीं रहा था। ऐसी स्थिति में किसानों का चिंतित होना लाजिमी था लेकिन इंद्रदेव की मेहरबानी हुई और लगातार कई दिनों से हो रही बरसाती झड़ी ने क्षेत्र को पानी से सरोबार कर दिया है। अब तो नदी नाले सहित खेत खलिहान भी पानी से लबालब भर चुके हैं। अब खेती का काम भी सरपट चलने लग गया है। 

किसानों के चेहरे पर आ गई अब रौनक

किसान वर्ग ऐसी लगातार झड़ी और खेती तुल्य पानी गिरने से काफी खुश दिखाई देने लगे हैं ।अब तो खेती का काम भी चारों तरफ सरपट चलने लग गया है। किसानों का कहना है कि ऐसी ही बरसात धान की खेती के लिए बहुत उपयोगी होती है। ऐसा ही पानी बीच-बीच में गिरती रहे तो खेती के लिए बहुत उत्तम रहेगा। किसानों ने खेतों अब  बोनी और धान के थरहा लगाने का काम शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ में अधिकांश इलाकों में मुख्य फसल के तौर पर धान का ही रकबा अधिकतर दिखाई देता है। इसके अलावा मक्का ज्वार बाजरा भी कहीं कहीं दिखाई देते हैं। इसके अलावा फल्ली गन्ना और दलहन के भी फसल मुख्य रूप से लिए जाते हैं। फिलहाल ऐसी खेती के अनुकूल बारिश होने से किसानों के चेहरे खुशी से खिले हुए हैं।

सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”
Book Showcase

Best Selling Books

Shri Durgasaptashati Sachitra

By Gorakhpur Gita Press

₹100

Book 2 Cover

Stop Letting Everything Affect You

By Daniel Chidiac

₹190

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

30 Days to Better English

By Norman Lewis

₹199

Translate »