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वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में ‘युवा आध्यात्मिक शिखर सम्मेलन’ का शुभारंभ, ‘विकसित भारत के लिए नशामुक्त युवा’ विषय पर; देश भर के लगभग 122 आध्यात्मिक और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के 600 से अधिक युवा इसमें शामिल हुए

युवा मामले और खेल मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ‘विकसित भारत के लिए नशामुक्त युवा’ विषय पर ‘युवा आध्यात्मिक शिखर सम्मेलन’ का शुभारंभ किया। इस शिखर सम्मेलन में देश भर के 122 आध्यात्मिक और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के 600 से अधिक युवा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। केंद्रीय युवा मामले एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कार्यक्रम में कहा कि 15 अगस्त 2022 को लाल किले से भारत के 76वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अमृत काल के ‘पंच प्राण’ के माध्यम से अगले 25 वर्षों के लिए अपना दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, क्योंकि देश की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है।

डॉ. मांडविया ने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को नशा मुक्त बनाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमारी युवा पीढ़ी को न केवल लाभार्थी के रूप में देखा जाना चाहिए, बल्कि राष्ट्र के भविष्य को आकार देने वाले परिवर्तनकर्ता के रूप में भी देखा जाना चाहिए। मादक द्रव्यों का सेवन आज युवाओं के सामने सबसे बड़े खतरों में से एक है। नशा उन्हें जीवन के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर अपनी चपेट में ले रहा है और यह राष्ट्रीय प्रगति के लिए एक गंभीर चुनौती है।

उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लिए, हमें अपने युवाओं को नशीले पदार्थों, मोबाइल फोन और रीलों से दूर रखना होगा।

केन्द्रीय मंत्री ने धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े नेताओं से युवाओं में नशे की लत से दूर रहने के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अपने मंचों का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक शिविर या सीमित प्रयास पर्याप्त नहीं हैं – हमें एक जन आंदोलन की आवश्यकता है जहां प्रत्येक नागरिक कम से कम पांच अन्य लोगों को नशा विरोधी अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित करने का संकल्प ले।

डॉ. मांडविया ने कहा कि दो दिवसीय शिखर सम्मेलन मूल्यवान चर्चाओं और सार्थक परिणामों की ओर ले जाएगा। शिखर सम्मेलन 20 जुलाई को ‘काशी घोषणा’ के विमोचन के साथ समाप्त होगा, जो युवाओं और आध्यात्मिक नेताओं के सामूहिक दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता को दर्शाने वाला एक दस्तावेज है। यह दस्तावेज नशा मुक्त भारत के निर्माण के लिए एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करेगा और नीति निर्माताओं, नागरिक समाज संगठनों, नशा मुक्ति और पुनर्वास के क्षेत्र में काम करने वाले युवा नेटवर्क के लिए एक मार्गदर्शक चार्टर के रूप में कार्य करेगा।

शिखर सम्मेलन में प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित चार विषयगत सत्र होंगे: नशे की लत को समझना और युवाओं पर इसका प्रभाव; नशीली दवाओं की तस्करी के नेटवर्क और वाणिज्यिक हितों को तोड़ना; प्रभावी अभियान और पहुंच संबंधी रणनीतियों को डिजाइन करना; और 2047 तक नशामुक्त भारत के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का निर्माण करना। ये सत्र विशेषज्ञ वार्ता, निर्देशित पैनल चर्चाओं और संवादमूलक प्लेटफार्मों के माध्यम से आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रत्येक प्रतिनिधि एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति को आकार देने में सक्रिय रूप से योगदान दे।

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