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केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में वैश्विक बाघ दिवस 2025 समारोह की अध्यक्षता की

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक बाघ दिवस 2025 समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर श्री भूपेंद्र यादव ने बच्चों में पारिस्थितिक संतुलन, संरक्षण जागरूकता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता के महत्व पर बल दिया। श्री यादव ने वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण के प्रति युवाओं को जागरूक करने के लिए विद्यालयों और शिक्षकों को बधाई दी।

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वन्यजीव संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का उल्‍लेख करते हुए श्री भूपेंद्र यादव ने  कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत में बाघ अभयारण्यों की संख्या वर्ष 2014 में 46 से बढ़कर आज तक 58 हो गई है। यह वृद्धि हमारे राष्ट्रीय पशु की सुरक्षा के प्रति प्रधानमंत्री की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

श्री भूपेंद्र यादव ने राष्ट्रव्यापी वृक्षारोपण अभियान शुभारंभ करने की घोषणा की, जिसके अंतर्गत सभी 58 बाघ अभयारण्यों में 1 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। इससे यह दुनिया में इस तरह के सबसे बड़े अभियानों में से एक बन जाएगा।

पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूकता का आह्वान करते हुए श्री यादव ने बच्चों और नागरिकों से “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत अपनी मां के नाम पर कम से कम एक पौधा लगाने का आग्रह किया, जो मातृ शक्ति और धरती मां दोनों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जैसे हमारी मां हमारा पालन-पोषण करती है, वैसे ही धरती मां भी करती है। एक पेड़ पक्षियों को आश्रय देता है, बिना मांगे फल देता है और निस्वार्थ भाव से ऑक्सीजन प्रदान करता है। आइए हम सब अपनी माताओं और इस धरती के लिए एक पेड़ लगाएं।

श्री भूपेंद्र यादव ने भारत द्वारा शुरू किए गए अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट अलायंस (आईबीसीए) की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में पाई जाने वाली सात बड़ी बिल्लियों का संरक्षण करना है। उन्होंने बताया कि 24 देश पहले ही इस वैश्विक प्रयास में शामिल होने के लिए सहमत हो चुके हैं और इसका मुख्यालय भारत में होगा।

श्री भूपेंद्र यादव ने युवाओं से दृढ़ संकल्प, धैर्य और विनम्रता का जीवन जीने और मिशन लाइफ के अंतर्गत संरक्षण प्रयासों के माध्यम से समाज में योगदान देने का आह्वान किया। उन्‍होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सच्ची प्रगति प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने में ही निहित है। बाघ जैसा सबसे शक्तिशाली प्राणी भी हमें विनम्रता सिखाता है। यही पारिस्थितिक संतुलन का सार है।

इस अवसर पर केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह के साथ-साथ सरकारी अधिकारी, अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारी, वैज्ञानिक, संरक्षणवादी, गैर सरकारी संगठन, छात्र और सामुदायिक प्रतिनिधि सहित हितधारकों का एक विविध समूह भी उपस्थित था। विभिन्न हितधारकों की उपस्थिति ने बाघ संरक्षण में प्राप्त उपलब्धियों को बनाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सामूहिक, बहु-हितधारक प्रयास की जानकारी दी।

2025 के समारोह का एक विशेष आकर्षण इकोशॉप प्रदर्शनी थी, जिसमें देश भर के विभिन्न बाघ अभयारण्यों की इको-शॉप प्रदर्शित की गईं। इन स्टॉलों पर पश्चिमी घाट और दक्षिणी भू-भागों से समुदाय-आधारित दीर्घकालिक उत्पादों और पर्यावरण-विकास उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध थी। ये उत्पाद सांस्कृतिक विरासत और पारिस्थितिक उत्तरदायित्व के सम्मिश्रण का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इको-शॉप प्रदर्शनी संरक्षण और सामुदायिक आजीविका के बीच महत्वपूर्ण संबंधों का उल्‍लेख करते हुए यह दिखाती है कि कैसे स्‍थायी उद्यम मॉडल स्थानीय समुदायों को सशक्त बना सकते हैं, वन-आश्रित परिवारों को सहायता प्रदान कर सकते हैं तथा बाघों के आवासों पर दबाव कम करके और संघर्ष को कम करके संरक्षण लक्ष्यों में प्रत्यक्ष रूप से योगदान दे सकते हैं।

इस कार्यक्रम के दौरान, श्री यादव ने वर्चुअल माध्यम से भारत के सभी 58 बाघ अभयारण्यों में वृक्षारोपण अभियान का उद्घाटन किया। इस पहल के अंतर्गत प्रत्येक बाघ अभयारण्य, बाघ संरक्षण के लिए आवश्यक पारिस्थितिक आधार को मजबूत करने और आवास बहाली को बढ़ावा देने के लिए, बंजर क्षेत्रों में देशी पौधों की प्रजातियों के 2,000 पौधे लगाएगा। इस कार्यक्रम में अरावली परिदृश्य में तीन स्थानों पर वन नर्सरियों का उद्घाटन भी शामिल था, जो देशी प्रजातियों का उपयोग करके वनीकरण और दीर्घकालिक पारिस्थितिक अनुकूलता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में काम करेंगी। इस दिन ‘प्लास्टिक-मुक्त बाघ अभयारण्य’ अभियान का भी शुभारंभ हुआ, जिसका उद्देश्य बाघ अभयारण्यों के भीतर सभी एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करना है।

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श्री भूपेंद्र यादव ने चार महत्वपूर्ण प्रकाशनों का भी अनावरण किया, जिनमें से प्रत्येक में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के अंतर्गत भारत के वन्यजीव संरक्षण के अनूठे पहलू पर प्रकाश डाला गया है:

  • “भारत के बाघ परिदृश्य में छोटी बिल्लियों की स्थिति” पर रिपोर्ट
  • स्ट्राइप्स पत्रिका- वैश्विक बाघ दिवस विशेष संस्करण
  • पुस्तकें– “भारत में बाघ अभयारण्यों के झरने” और “भारत के बाघ अभयारण्यों के अंदर जल निकाय” श्री भरत लाल और डॉ. एसपी यादव द्वारा लिखित

श्री यादव ने 7 श्रेणियों के अंतर्गत एनटीसीए पुरस्कार भी वितरित किए, जिनमें मरणोपरांत/कर्तव्य पालन के दौरान जीवन बलिदान; वन्यजीव अपराध का पता लगाना, जांच और अभियोजन; वन्यजीव निगरानी; वन्यजीव आवास प्रबंधन; वन्यजीव संरक्षण और शिकार विरोधी गतिविधियां; जन भागीदारी और पर्यावरण विकास और स्वैच्छिक ग्राम पुनर्वास कार्य शामिल हैं।

कुल मिलाकर, वैश्विक बाघ दिवस 2025 के समारोह बाघ संरक्षण के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसमें नीति-स्तरीय रणनीतियों के साथ जमीनी स्तर की भागीदारी को जोड़ा गया है। ये एक समग्र दृष्टिकोण को दर्शाते हैं जो जंगलों में बाघों के दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए पारिस्थितिक अखंडता, सामुदायिक कल्याण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को आवश्यक तत्वों के रूप में महत्व देता है।

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