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उत्तर प्रदेश पुलिस और सेवलाइफ फाउंडेशन ने मिलकर दिया सड़क हादसे में आपातकालीन देखभाल का प्रशिक्षण

प्रयागराज: भारत में सड़क सुरक्षा की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। साल 2023 में सड़क हादसों में करीब 1,72,000 लोगों की मौत हुई। इनमें उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर रहा, जहाँ 23,652 लोगों ने अपनी जान गँवाई। सिर्फ प्रयागराज जिले में ही 582 लोगों की मौत हुई।

हादसों के समय तुरंत मदद पहुँचाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने के लिए सेवलाइफ फाउंडेशन ने उत्तर प्रदेश पुलिस और टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ मिलकर प्रयागराज जिले में 48 पुलिसकर्मियों को बेसिक ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट (बीटीएलएस) का प्रशिक्षण दिया। यह प्रशिक्षण 29 अगस्त, 2025 को आयोजित किया गया।

यह कार्यक्रम सेवलाइफ फाउंडेशन के ‘जीवन रक्षक’ प्रोग्राम के तहत आयोजित हुआ, जिसे टाटा एआईजी ने अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत सहयोग दिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह है कि मेडिकल टीम के पहुँचने से पहले पुलिसकर्मी और अन्य गैर-चिकित्सकीय लोग हादसे में घायल लोगों की सही तरीके से मदद कर सकें। यह प्रशिक्षण सत्र त्रिवेणी सभागार, पुलिस लाइन में आयोजित किया गया। इस दौरान, श्री नीरज कुमार पांडे, आईपीएस, पुलिस उपायुक्त (यातायात), उत्तर प्रदेश पुलिस और श्री कुलदीप सिंह, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात), पुलिस आयुक्तालय प्रयागराज मौजूद रहे। साथ ही, सेवलाइफ की टीम ने भी इसमें अहम् भूमिका निभाई।

प्रशिक्षण के बारे में बोलते हुए श्री कुलदीप सिंह, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात), पुलिस आयुक्तालय प्रयागराज ने कहा, “पुलिसकर्मियों को बेसिक ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट (बीटीएलएस) का प्रशिक्षण देना बेहद कारगर साबित होगा। इससे वे सड़क दुर्घटना पीड़ितों को प्राथमिक उपचार दे सकेंगे और इस तरह आपातकालीन सेवाओं तक पहुँचने से पहले कई जीवन बचाए जा सकते हैं। सेवलाइफ फाउंडेशन के साथ यह साझेदारी प्रयागराज में हमारी इमरजेंसी रिस्पॉन्स व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।”

सेवलाइफ फाउंडेशन के ज़ीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) कार्यक्रम के तहत आयोजित इस यह प्रशिक्षण का उद्देश्य बहुआयामी और साक्ष्य-आधारित तरीके से सड़कों पर होने वाली मौतों को कम करना है। इसमें सड़क सुरक्षा के 4 ई- इंजीनियरिंग, इमरजेंसी केयर, एन्फोर्समेंट और एजुकेशन को शामिल किया गया है। हर जिले की दुर्घटनाओं और जरूरतों को देखते हुए जेडएफडी स्थानीय स्तर पर खास योजना बनाता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके।

सड़क हादसों में अक्सर सबसे पहले मौके पर राहगीर और पुलिस ही पहुँचते हैं। यदि शुरुआत में ही सही मदद मिल जाए, तो जान बचाई जा सकती है और बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। रिसर्च बताती है कि हादसे के बाद का ‘गोल्डन ऑवर’ बहुत अहम होता है। यदि इस दौरान सही मदद मिल जाए, तो मौत के मामले करीब 30% तक घट सकते हैं। लेकिन, आज भी पुलिसकर्मियों और आम लोगों को औपचारिक ट्रॉमा रिस्पॉन्स ट्रेनिंग बहुत कम मिलती है।

टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के सीनियर एक्ज़ीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और हेड- कंज्यूमर बिज़नेस, श्री सौरभ मैनी ने कहा, “हम मानते हैं कि जीवन बचाने की शुरुआत पहले रिस्पॉन्डर्स को सशक्त बनाने से होती है। हमें गर्व है कि हम सेवलाइफ फाउंडेशन के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश पुलिस को ऐसी जरूरी स्किल्स दे रहे हैं, जो लोगों की जान बचाने में मदद करेंगी।”

सेवलाइफ फाउंडेशन के फाउंडर और सीईओ, श्री पीयूष तिवारी ने कहा, “हादसे के बाद हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण पाने वाले पुलिसकर्मी जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क तय कर सकते हैं। इस प्रशिक्षण के माध्यम से हमारा उद्देश्य पुलिसकर्मियों को आत्मविश्वास और जरूरी स्किल्स देकर उन्हें तुरंत कदम उठाने लायक बनाना है। हम उत्तर प्रदेश पुलिस के नेतृत्व और लोगों की ज़िंदगी बचाने की प्रतिबद्धता के लिए आभारी हैं।”

ट्रेनिंग के दौरान पुलिसकर्मियों को जरूरी जीवनरक्षक कौशल सिखाए गए। इसमें कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), रक्तस्राव रोकना और सर्वाइकल स्पाइन (सी-स्पाइन) को स्थिर करना शामिल रहा। उन्हें यह भी सिखाया गया कि किसी मेडिकल इमरजेंसी को जल्दी कैसे पहचानें, घायल की शुरुआती जाँच कैसे करें और सुरक्षित तरीके से मदद कैसे पहुँचाएँ। साथ ही, घटनास्थल पर सुरक्षा प्रबंधन और एयरवे मैनेजमेंट जैसे तरीके भी बताए गए।

पुलिसकर्मियों को ऐसी गंभीर घटनाओं से निपटने की ट्रेनिंग दी गई, जैसे किसी का गले में कुछ फँस जाना (चोकिंग)। उन्हें यह भी समझाया गया कि ‘गोल्डन आवर’ कितनी अहमियत रखता है और सड़क हादसों में तुरंत मदद मिलने से कितनी ज़िंदगियाँ बच सकती हैं। इसके अलावा, उन्हें गुड सेमेरिटन लॉ, उसके नियम और अलग-अलग मामलों की जानकारी भी दी गई।

अब तक सेवलाइफ फाउंडेशन पूरे भारत में 26,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और नागरिक स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित कर चुका है। इस पहल से दिल्ली पुलिस सहित कई जगह इमरजेंसी रिस्पॉन्स बेहतर हुआ है और सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 2012 से 2017 के बीच 30% तक की कमी आई है।

मुस्कान सिंह

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