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भारत और ब्रिटेन के बीच विधि एवं न्याय के क्षेत्र में सहयोग को मिली नई दिशा

भारत और ब्रिटेन ने विधि एवं न्याय के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी उद्देश्य से ब्रिटेन के न्याय मंत्रालय (Ministry of Justice – MoJ) के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित शास्त्री भवन में भारत सरकार के विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट की। यह बैठक 6 नवंबर 2025 को सुबह 11:30 बजे आयोजित की गई, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।

ब्रिटेन के न्याय मंत्रालय के प्रतिनिधिमंडल में चार प्रमुख अधिकारी शामिल थे:

  • श्री डेविड मेयर, अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रमुख, न्याय मंत्रालय (MoJ)
  • सुश्री क्रिस्टीना सोपर, अंतर्राष्ट्रीय कानून नियम प्रमुख, न्याय मंत्रालय (MoJ)
  • श्री पॉल स्कॉट, कानूनी सेवाएं वरिष्ठ नीति सलाहकार, न्याय मंत्रालय (MoJ)
  • सुश्री बारबोरा सिंडारोवा, अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता वरिष्ठ नीति सलाहकार, न्याय मंत्रालय (MoJ)

प्रतिनिधिमंडल के साथ ब्रिटिश उच्चायोग के अधिकारी भी उपस्थित रहे। भारत की ओर से विधायी विभाग के सचिव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में शामिल हुए।

बैठक के प्रमुख विषय

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने विधि एवं न्याय प्रणाली में सुधार, न्याय तक पहुंच को सरल बनाने और विधायी प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण से संबंधित अनेक पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।

मुख्य चर्चाएं निम्न बिंदुओं पर केंद्रित रहीं:

  • जीवन को आसान बनाने की पहल (Ease of Living Initiatives): दोनों देशों ने इस दिशा में किए जा रहे सुधारों को साझा किया और पारस्परिक अनुभवों से सीखने की इच्छा जताई।
  • अप्रचलित कानूनों का उन्मूलन: भारत में पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त करने की प्रक्रिया को ब्रिटेन के अनुभवों के साथ जोड़ने पर चर्चा हुई।
  • न्यायाधिकरण प्रणाली (Tribunal System): पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए दोनों देशों की न्यायाधिकरण प्रणालियों की तुलनात्मक समीक्षा की गई।
  • लैंगिक न्याय (Gender Justice): महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के उपायों पर विमर्श हुआ।
  • विधायी प्रारूपण (Legislative Drafting): विधायी प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आदान-प्रदान पर सहमति बनी।

प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर जोर

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि दोनों देशों के अधिकारियों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि विधायी प्रारूपण, न्यायिक प्रक्रिया सुधार और कानून के क्रियान्वयन से जुड़ी समझ को मजबूत किया जा सके। इस प्रकार के कार्यक्रमों से न केवल पेशेवर क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि दोनों देशों के विधिक तंत्र के बीच सहयोग और ज्ञान-साझा भी बढ़ेगा।

समझौता ज्ञापन (MoU) पर चर्चा

दोनों पक्षों ने बैठक के दौरान समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार किया। इस संभावित समझौते का उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच विधि एवं न्याय के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की रूपरेखा तैयार करना है। इसके माध्यम से प्रशिक्षण, अनुसंधान, विधायी परामर्श और न्यायिक नवाचार के क्षेत्रों में साझेदारी को औपचारिक रूप दिया जा सकेगा।

साझा प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि

बैठक के अंत में भारत और ब्रिटेन दोनों पक्षों ने यह पुनः पुष्टि की कि वे कानून और न्याय के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और गहराई देंगे। दोनों देशों ने विधिक शासन, मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय प्रणाली की सुलभता को लेकर अपनी साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की।

यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, बल्कि यह आने वाले समय में दोनों देशों के बीच विधायी सुधार, न्यायिक सहयोग और कानूनी क्षमता निर्माण के नए आयाम भी स्थापित करेगी।

भारत और ब्रिटेन के बीच यह संवाद इस बात का प्रतीक है कि आधुनिक विश्व में विधि और न्याय के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितना आवश्यक है। यह सहयोग न केवल कानूनी प्रणाली की मजबूती के लिए, बल्कि नागरिकों के जीवन को अधिक न्यायपूर्ण और सरल बनाने के लिए भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

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