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समाजसेवा, पत्रकारिता और साहित्य में उल्लेखनीय योगदान पर सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को राष्ट्रीय सम्मान

रायपुर में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिभा महासम्मेलन एवं पुरस्कार समारोह 2026 में बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार और समाजसेवी सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को उनके बहुआयामी योगदान के लिए प्रतिष्ठित “छत्तीसगढ़ रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समाजसेवा, निर्भीक पत्रकारिता, साहित्य सृजन और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में उनके लंबे समय से किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति माना जा रहा है।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में आयोजित इस गरिमामय समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित समाजसेवियों, साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों, कलाकारों और अन्य क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया गया।

समारोह में सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के पूर्व विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, विधायक पुरंदर मिश्रा तथा केपीएस प्रमुख राकेश कुमार मिश्रा सहित अनेक प्रतिष्ठित अतिथि उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से आए कई विशिष्ट व्यक्तित्वों ने भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। प्रदेश प्रभारी, पतंजलि योग समिति, छत्तीसगढ़ डॉ. मनोज पाणीग्रही, छत्रपति संभाजीनगर से डॉ. पंढरीनाथ रोकडे, भुसावल से डॉ. दिलीपकुमार ललवाणी, मुंबई से डॉ. गौतम ऋषि मोरे तथा भोपाल से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुनीता पेंद्रो की उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक अधिवक्ता क्रांति महाजन रहे।

यह आयोजन रेडियंट टैलेंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की पहल पर विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और प्रतिभा सम्मान से जुड़ी संस्थाओं के सहयोग से संपन्न हुआ। महासम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही प्रतिभाओं को एक साझा मंच प्रदान करना तथा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना था। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को देशभर से आए प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों के समक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति की विविधता को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि विभिन्न भाषाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के बीच संवाद और सहयोग से “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की अवधारणा को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस समारोह में राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकात्मता और सामाजिक जागरूकता का विशेष वातावरण देखने को मिला। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, संगीत, साहित्य और सम्मान समारोह ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ को यह सम्मान जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने वाली उनकी निर्भीक पत्रकारिता, साहित्यिक योगदान तथा सामाजिक चेतना के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका के लिए प्रदान किया गया। पत्रकारिता के माध्यम से उन्होंने आमजन की समस्याओं और सामाजिक मुद्दों को निरंतर प्रमुखता से सामने रखा है। वहीं साहित्य के क्षेत्र में उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों, प्रकृति और संस्कृति से जुड़े विषयों की गहन अभिव्यक्ति दिखाई देती है।

वे केवल पत्रकार और साहित्यकार ही नहीं, बल्कि एक समर्पित समाजसेवी के रूप में भी व्यापक पहचान रखते हैं। वर्तमान में वे दिल्ली से संचालित अखिल वैश्विक क्षत्रिय महासभा ट्रस्ट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे सामाजिक संस्था ‘हितार्थ एक सेवा’ के संस्थापक सचिव हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता से जुड़े अनेक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

साहित्य के क्षेत्र में उनकी चर्चित कृति ‘बोलती परछाइयां’ सहित विभिन्न विधाओं में उनका लेखन प्रकाशित हो चुका है। उनकी लेखनी समाज और मानव जीवन की जटिलताओं को संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त करती है। वे पत्रकारिता और साहित्य को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जनजागरण का प्रभावी साधन मानते हैं। उनका मानना है कि “कलम केवल लिखने का साधन नहीं, बल्कि परिवर्तन की शक्ति है।”

राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त होने पर बिलासपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकारों, पत्रकारों, समाजसेवियों और शुभचिंतकों ने उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। वरिष्ठ साहित्यकार विनय कुमार पाठक, राघवेंद्र दुबे, रमेश चंद्र श्रीवास्तव, शीतल प्रसाद पाटनवार, सनत तिवारी, विवेक तिवारी तथा हरिवंश सिंह ठाकुर सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने इस उपलब्धि को न केवल सुरेश सिंह बैस ‘शाश्वत’ की व्यक्तिगत सफलता, बल्कि बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की साहित्यिक, पत्रकारिता और सामाजिक चेतना की राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पहचान बताया। यह सम्मान उनके वर्षों के समर्पण, सामाजिक प्रतिबद्धता और रचनात्मक योगदान का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।  एवीके न्यूज सर्विस

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