भारत को एक सशक्त, स्वस्थ और प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाने के लिए पीढ़ियों के बीच सामंजस्य (Intergenerational Synergy) को आवश्यक बताते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान मंत्री तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत के भविष्य की असली ताकत तभी सामने आएगी जब अनुभव की बुद्धिमत्ता और युवा ऊर्जा का संगम होगा।

डॉ. सिंह ने यह विचार सीआईआई हेल्थ कॉन्क्लेव के विशेष सत्र ‘Empowering Senior Care’ में अपने मुख्य संबोधन के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि देश के वरिष्ठ नागरिकों को राष्ट्र निर्माण में केवल सहयोगी नहीं बल्कि समान भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए।
अनुभव और ऊर्जा का संगम ही नए भारत की दिशा
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि जिस प्रकार बहुविषयक सहयोग (Interdisciplinary Collaboration) नवाचार को गति देता है, उसी प्रकार पीढ़ियों के बीच एकीकरण (Intergenerational Integration) एक स्वस्थ और समावेशी राष्ट्र निर्माण की नींव रखता है। उन्होंने कहा – “वरिष्ठ नागरिक राष्ट्र निर्माण के समान सहभागी हैं। वे न तो ऊर्जा में पीछे हैं, न ही विशेषज्ञता में। जिनके पास प्रगतिशील दृष्टिकोण है, वे जनरेशन Z की संस्कृति में सहजता से ढल सकते हैं और साथ ही पुरानी पीढ़ियों की परंपरागत ज्ञान, मूल्य और अनुभव को साथ लेकर चलते हैं।”
उन्होंने इसे एक ऐसी आदर्श संगति बताया जिसमें “पारंपरिक बुद्धिमत्ता” आधुनिक प्रौद्योगिकी और नवाचार से मिलकर भारत को भविष्य के लिए तैयार करती है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण का प्रतीक है जिसमें भारत की हाई-टेक और डीप-टेक क्षमताओं को उसकी आयुर्वेदिक, योगिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने की बात कही गई है।
‘Gen Z+’ युग की ओर बढ़ता भारत
डॉ. सिंह ने पारंपरिक ‘बुढ़ापे’ की परिभाषा को ही पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आज पीढ़ियों के बीच की रेखा धुंधली हो चुकी है। जिन लोगों ने ब्लैक-एंड-व्हाइट युग में जीवन शुरू किया, वे अब सोशल मीडिया के डिजिटल युग तक का सफर तय कर चुके हैं। हम सब अब Gen Z+ हैं।”
उन्होंने समाज से आग्रह किया कि बुढ़ापे से जुड़ी रूढ़ियों को खत्म किया जाए और वरिष्ठ नागरिकों को जीवनपर्यंत शिक्षार्थी और अनुकूलनशील नागरिक के रूप में सम्मान दिया जाए।
बढ़ती वरिष्ठ आबादी और नई चुनौतियाँ
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत भले ही एक युवा देश के रूप में जाना जाता है, लेकिन 60 वर्ष से अधिक आयु की आबादी का कुल प्रतिशत निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “वास्तविक चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि यह बढ़ता हुआ वर्ग न केवल शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे, बल्कि समाज में उत्पादक योगदान भी देता रहे।”
उन्होंने बताया कि सरकार ने पेंशन प्रणाली में कई सुधार किए हैं ताकि वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को आसान बनाया जा सके।
प्रौद्योगिकी से वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में सुगमता
डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार ने बायोमेट्रिक और फेस-ऑथेंटिकेशन तकनीक के माध्यम से पेंशन प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल बनाया है। “हमने तकनीक का उपयोग किसी उपकार की भावना से नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए Ease of Living सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया है।”
उन्होंने जानकारी दी कि 85,000 से अधिक केंद्रीय सरकारी पेंशनर 90 वर्ष से अधिक आयु के हैं, और लगभग 2,500 पेंशनर 100 वर्ष से अधिक उम्र पार कर चुके हैं। नई पेंशन व्यवस्था के तहत 90 वर्ष की आयु के बाद अंतिम वेतन का 65 प्रतिशत, और 100 वर्ष की आयु के बाद पूर्ण वेतन प्रदान किया जाता है।
“यह न केवल बढ़ती दीर्घायु का संकेत है, बल्कि स्वास्थ्य परिणामों में सुधार और हमारी नीतियों के अनुकूलन की आवश्यकता को भी दर्शाता है।”
निवारक स्वास्थ्य और युवा पीढ़ी की भूमिका
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने निवारक स्वास्थ्य (Preventive Healthcare) को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि अब कई बीमारियाँ जो पहले केवल बुजुर्गों में देखी जाती थीं, वे युवा वर्ग में भी तेजी से फैल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत को अपने युवा संसाधनों की ऊर्जा को सुरक्षित रखना होगा और ऐसे रोगों को रोकना होगा जो उत्पादकता को कम करते हैं।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी के नए आयाम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज सरकार वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और स्वास्थ्य नवाचार के क्षेत्र में निजी क्षेत्र के साथ खुलकर सहयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से मौजूद ‘सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच की दीवारें’ अब टूट चुकी हैं, जिससे एक सक्षम और नवाचारोन्मुखी इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।
‘जनरेशन सिनर्जी’ ही भारत की असली ताकत
अपने संबोधन के समापन में डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा, “भारत की असली शक्ति पीढ़ियों के सामूहिक योगदान में निहित है। वरिष्ठ नागरिक गहराई लाते हैं, जनरेशन Z गति लाती है — और जब ये दोनों मिलते हैं, तो नई भारत के लिए सबसे उत्पादक सिनर्जी बनती है।”