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राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को नई गति: जैविक अपशिष्ट से हरित हाइड्रोजन उत्पादन हेतु ₹100 करोड़ की परियोजनाओं का आमंत्रण

भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने आज राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित तीसरे अंतर्राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन सम्मेलन (ICGH-2025) के उद्घाटन सत्र में देश के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को और गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission – NGHM) का आधिकारिक लोगो जारी किया और जैविक अपशिष्ट (Biomass) आधारित हाइड्रोजन उत्पादन हेतु ₹100 करोड़ की पायलट परियोजनाओं के प्रस्तावों की घोषणा की।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को नई गति: जैविक अपशिष्ट से हरित हाइड्रोजन उत्पादन हेतु ₹100 करोड़ की परियोजनाओं का आमंत्रण

उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को न केवल नई दिशा देगी बल्कि रोजगार सृजन, निवेश आकर्षण और वैश्विक स्तर पर हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारत की नेतृत्व भूमिका को सशक्त बनाएगी।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: एक वैश्विक समाधान

श्री जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2023 में ₹19,744 करोड़ के बजट के साथ आरंभ किया गया राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन केवल एक राष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक वैश्विक समाधान है, जो “कठिन-से-कम-कार्बन” क्षेत्रों (hard-to-abate sectors) को डिकार्बोनाइज करने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्रांति का नया चरण है — जिसमें हरित हाइड्रोजन को नई सभ्यता के ईंधन और दीर्घकालिक ऊर्जा स्वतंत्रता की कुंजी के रूप में देखा जा रहा है।

SIGHT कार्यक्रम के तहत उल्लेखनीय प्रगति

मंत्री ने बताया कि Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition (SIGHT) कार्यक्रम के अंतर्गत भारत ने तेज़ी से प्रगति की है।

  • 3,000 मेगावाट प्रति वर्ष की घरेलू इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण क्षमता के लिए प्रोत्साहन दिए जा चुके हैं।
  • 8.62 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता को मंजूरी दी गई है।
  • भारत अब ₹49.75 प्रति किलोग्राम की दर से विश्व का सबसे सस्ता हरित अमोनिया उत्पादन कर रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि ग्रीन स्टील परियोजनाओं में ₹132 करोड़ का निवेश किया गया है, जबकि 37 हाइड्रोजन-चालित वाहनों और 9 ईंधन स्टेशन के लिए ₹208 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ ही देश की पहली हाइड्रोजन बंकरिंग और रिफ्यूलिंग सुविधा के लिए V.O. चिदंबरनार बंदरगाह पर ₹35 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

जैविक अपशिष्ट आधारित हाइड्रोजन उत्पादन की नई पहल

श्री जोशी ने कहा कि मंत्रालय अब जैविक अपशिष्ट और बायोमास से हाइड्रोजन उत्पादन हेतु पायलट परियोजनाओं के प्रस्ताव आमंत्रित करेगा। इन परियोजनाओं के लिए ₹100 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है। यह पहल BIRAC (Biotechnology Industry Research Assistance Council) के माध्यम से लागू की जाएगी ताकि उद्योगों, स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

मंत्री ने कहा, “यह कदम भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करेगा और ऐसे किफायती, उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देगा जो भारत के हरित हाइड्रोजन संक्रमण को गति देंगी।”

कौशल विकास, मानक निर्धारण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में कदम

श्री जोशी ने बताया कि भारत हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए पूरी तरह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर आधारित मॉडल की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि –

  • अब तक 43 हाइड्रोजन-संबंधित कौशल योग्यताएँ (Skill Qualifications) अनुमोदित की गई हैं।
  • 6,300 से अधिक प्रशिक्षार्थियों को प्रमाणित किया जा चुका है।
  • Green Hydrogen Standard (2023) और Certification Scheme (2025) के साथ 128 तकनीकी मानक तैयार किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जब विश्व के कई देश कार्बन सीमा कर (Carbon Border Adjustments) की दिशा में बढ़ रहे हैं, तब हरित हाइड्रोजन अब केवल एक पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं बल्कि आर्थिक अनिवार्यता बन चुकी है।

भारत अपने हरित मूल्य शृंखलाओं (clean value chains) को सुदृढ़ कर न केवल स्वच्छ बल्कि प्रतिस्पर्धी और दीर्घकालिक रूप से क्लाइमेट-रेजिलिएंट विकास मॉडल की दिशा में अग्रसर है।

वैश्विक सहयोग के लिए मंच: ICGH-2025

मंत्री ने कहा, “ICGH-2025 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग और सामूहिक कार्रवाई का मंच है। यह दुनिया भर के वैज्ञानिकों, उद्योग नेताओं, नवप्रवर्तकों और नीति निर्माताओं को एक साझा लक्ष्य के लिए जोड़ता है — एक स्वच्छ, उज्जवल और टिकाऊ भविष्य का निर्माण।”

उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर एक सुदृढ़ और समावेशी हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो सतत विकास को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

भारत बनेगा हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय के. सूद ने अपने संबोधन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन सम्मेलन (ICGH) अब देश की वैज्ञानिक और नीतिगत दिशा को समन्वित करने का एक प्रमुख मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर हरित ऊर्जा की मांग आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नेतृत्व से प्रेरित है, और ग्रीन हाइड्रोजन इन दोनों के संगम पर खड़ा है।

प्रो. सूद ने बताया कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन चार प्रमुख स्तंभों — नीति, मांग सृजन, अनुसंधान एवं विकास, और सहायक अवसंरचना — पर समान रूप से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की उत्पादन लागत अन्य देशों की तुलना में कम है, जिससे भारत यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में प्रमुख निर्यातक के रूप में उभर सकता है।

स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत की नई उपलब्धियाँ

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी ने अपने संबोधन में बताया कि भारत की गैर-जीवाश्म आधारित ऊर्जा क्षमता अब 250 गीगावाट से अधिक हो चुकी है, जिसमें लगभग 130 गीगावाट सौर ऊर्जा, 50 गीगावाट पवन ऊर्जा, और 17 गीगावाट बायो-एनर्जी व छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” (One Earth, One Family, One Future) के विज़न के अनुरूप भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है।

सचिव ने बताया कि यह मिशन

  • ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित करेगा,
  • 6 लाख से अधिक रोजगार सृजित करेगा,
  • और प्रति वर्ष ₹1 लाख करोड़ की जीवाश्म ईंधन आयात बचत सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ट्रांसपोर्ट, स्टील और शिपिंग क्षेत्रों में कई पायलट प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। साथ ही, ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना लागू की गई है और जोधपुर, पुणे, भुवनेश्वर और केरल में चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय अनुसंधान और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बल मिलेगा।

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