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रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग द्वारा देहरादून में रिसाइकिलिंग और सर्कुलर अर्थव्यवस्था पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन

रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग (डीसीपीसी) ने भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) और केंद्रीय पेट्रोरसायन इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सिपेट) के सहयोग से देहरादून में पेट्रोरसायन एवं प्लास्टिक क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मुद्दों—रिसाइकिलिंग, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और सर्कुलर अर्थव्यवस्था—पर एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन उद्योग, नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, ताकि भारत के पेट्रोरसायन और प्लास्टिक उद्योगों के लिए एक सतत, स्वच्छ और सर्कुलर रोडमैप तैयार किया जा सके।

रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग द्वारा देहरादून में रिसाइकिलिंग और सर्कुलर अर्थव्यवस्था पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन

सतत विकास की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल

इस शिखर सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और उत्तरदायी विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप एक ऐसी औद्योगिक प्रणाली को बढ़ावा देना था, जो अपशिष्ट को न्यूनतम करते हुए संसाधनों के पुन: उपयोग को अधिकतम कर सके। भारत में प्लास्टिक और पेट्रोरसायन उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है, ऐसे में सर्कुलर अर्थव्यवस्था को अपनाना न केवल पर्यावरणीय रूप से आवश्यक है, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सरकार की नीतिगत प्राथमिकताएँ और नवाचार पर जोर

समारोह को संबोधित करते हुए रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा ने कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (सीसीयूएस), राष्ट्रीय हरित भारत मिशन, बायोई3 नीति, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) मानदंड, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली और नीति आयोग के कचरे से कंचन कार्यक्रम जैसी महत्वपूर्ण सरकारी पहलों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन सभी पहलों का लक्ष्य देश में स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करना, उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना और एक पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक इको–सिस्टम का निर्माण करना है।

रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग द्वारा देहरादून में रिसाइकिलिंग और सर्कुलर अर्थव्यवस्था पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का आयोजन

उन्होंने यह भी कहा कि सिपेट और भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) जैसे संस्थान रिसाइकिलिंग तकनीकों के नवाचार को बढ़ावा देने और उद्योग को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सुश्री वर्मा ने सर्कुलर विनिर्माण प्रणालियों को गति देने, उन्नत रिसाइकिलिंग प्रौद्योगिकियों को अपनाने और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का अनुसरण करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उद्योग जगत की प्राथमिकताएँ और चुनौतियाँ

फिक्की पेट्रोरसायन एवं प्लास्टिक समिति के अध्यक्ष श्री प्रभ दास ने अपने संबोधन में प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रहण और रिसाइकिलिंग प्रणाली को मजबूत बनाने की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग के लिए ऐसे ढांचे का निर्माण करना आवश्यक है जिससे अपशिष्ट प्रबंधन को अधिक संरचित, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।

अखिल भारतीय प्लास्टिक निर्माता संघ (एआईपीएमए) के अध्यक्ष श्री अरविंद मेहता ने उपभोक्ता स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के जिम्मेदार उपयोग और उसके उचित निपटान को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जन अभियान चलाना आज की जरूरत है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत के प्लास्टिक निर्यात में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिसके लिए गुणवत्ता सुधार और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन अत्यंत आवश्यक है।

वैश्विक सर्कुलरिटी मानकों की ओर भारत की प्रगति

बीसीजी के पार्टनर श्री नितेश शर्मा ने विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) के सफल कार्यान्वयन के माध्यम से भारत द्वारा वैश्विक सर्कुलरिटी लक्ष्यों की दिशा में की गई प्रगति पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि ईपीआर संरचना न केवल अपशिष्ट प्रबंधन को प्रणालीगत और अधिक जवाबदेह बनाती है, बल्कि यह उद्योग को पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित भी करती है।

डीसीपीसी के संयुक्त सचिव (पेट्रोकेमिकल) श्री दीपक मिश्रा ने संसाधन दक्षता बढ़ाने, सर्कुलर पेट्रोकेमिकल पथों को तेज गति से अपनाने और उद्योग-अकादमिक साझेदारी के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहन देने पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि अगले दशक में भारत के लिए सर्कुलर अर्थव्यवस्था मॉडल न केवल पर्यावरण सुरक्षा बल्कि आर्थिक लाभ का भी प्रमुख साधन बनेगा।

शिक्षाविदों और महिला नेतृत्व की भागीदारी

उद्घाटन सत्र में फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन, उत्तराखंड की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना सहित उद्योग क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और शिक्षाविद उपस्थित रहे। उनकी सक्रिय भागीदारी ने सम्मेलन को बहुआयामी दृष्टिकोण प्रदान किया, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के अनुभव और सुझाव एक मंच पर इकट्ठा हो सके।

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