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डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि शांति विधेयक को मोदी सरकार के सबसे बड़े विज्ञान सुधारों में से एक के रूप में इतिहास में याद किया जाएगा

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां एक मीडिया साक्षात्कार में कहा कि शांति विधेयक को मोदी सरकार के सबसे बड़े विज्ञान सुधारों में से एक के रूप में इतिहास में याद किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि यद्यपि संसदीय भाषण परंपरागत रूप से जन कल्याणकारी योजनाओं और शासन संबंधी उपायों पर केंद्रित रहा है लेकिन राष्ट्र का दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक स्वरूप विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सुधारों से अधिकाधिक निर्धारित होगा। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का तीसरा कार्यकाल, मोदी 3.0 की विशेषता साहसिक, बुनियादी सुधार है जिसमें विज्ञान, नवाचार और उद्यमिता पर विशेष जोर दिया गया है।

मंत्री ने कहा कि शांति विधेयक विज्ञान आधारित सुधारों को राष्ट्रीय परिवर्तन के केंद्र में रखकर परंपरा से एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस विधेयक को मोदी सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विज्ञान सुधारों में से एक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के विकास, उद्योग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर इसके निर्णायक प्रभाव के बावजूद भारत ने कभी भी वैज्ञानिक प्रगति को सुधार के दायरे में नहीं रखा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने शांति विधेयक को मोदी 3.0 के व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की विशेषता साहसिक, बुनियादी सुधार है जिसमें विज्ञान, नवाचार और उद्यमिता पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जहां सुधार के पिछले चरण ऐतिहासिक राजनीतिक और रणनीतिक निर्णयों से जुड़े थे, वहीं मोदी 3.0 को उन क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए याद किया जाएगा जो भारत के तकनीकी और आर्थिक भविष्य को निर्धारित करते हैं।

मंत्री ने कहा कि शांति विधेयक भारत के परमाणु क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुधार है जो सुरक्षा, संप्रभुता और जनहित के उच्च मानकों को बनाए रखते हुए शांतिपूर्ण, स्वच्छ और सतत ऊर्जा की इसकी अपार संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसा सुधार छह दशकों से अधिक समय तक अकल्पनीय था और प्रधानमंत्री मोदी की पुरानी रूढ़ियों को तोड़ने और भारत की नीतियों को वैश्विक सर्वोत्तम व्यवस्थाओं के अनुरूप ढालने की क्षमता के कारण ही संभव हो पाया है।

भारत की शांतिपूर्ण परमाणु उपयोग के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने याद दिलाया कि डॉ. होमी भाभा के समय से ही भारत के परमाणु कार्यक्रम की परिकल्पना विकास, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए की गई थी। उन्होंने कहा कि शांति विधेयक स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, चिकित्सा अनुप्रयोगों और उन्नत अनुसंधान जैसे नागरिक उद्देश्यों के लिए विस्तार को सक्षम बनाकर इस मूलभूत दर्शन को मजबूत करता है, जबकि शांतिपूर्ण इरादे से किसी भी विचलन को पूरी तरह से रोकता है।

उभरती कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम और डेटा-आधारित अर्थव्यवस्था की मांगों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के अनिरंतर विद्युत उत्‍पादन के विपरीत परमाणु ऊर्जा निरंतर और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति के लिए अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत जीवाश्म ईंधन और कोयले से दूर होता जा रहा है, परमाणु ऊर्जा उन्नत प्रौद्योगिकियों, डिजिटल बुनियादी ढांचे और रणनीतिक क्षेत्रों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण गुणात्मक भूमिका निभाएगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता 2014 में लगभग 4.4 गीगावाट से बढ़कर आज लगभग 8.7 गीगावाट हो गई है और आने वाले वर्षों में इसमें काफी वृद्धि करने के लिए एक स्पष्ट योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2047 तक लगभग 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता तक पहुंचना है जिससे परमाणु ऊर्जा भारत की लगभग 10 प्रतिशत विद्युत आवश्यकताओं को पूरा कर सकेगी और राष्ट्रीय नेट जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।

मंत्री ने स्वास्थ्य सेवा में परमाणु विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर भी ध्यान दिलाया, विशेष रूप से परमाणु चिकित्सा और आइसोटोप के माध्यम से कैंसर के निदान और उपचार में। उन्होंने कहा कि परमाणु प्रौद्योगिकी जीवन रक्षक चिकित्सा उपायों में तेजी से योगदान दे रही है जिससे यह स्पष्ट होता है कि परमाणु विज्ञान आज मानव कल्याण और सामाजिक उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति है।

भविष्य की तैयारियों का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की ओर भी अग्रसर है, जो घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक गलियारों और उभरते आर्थिक क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि ये रिएक्टर पर्यावरण संबंधी जिम्मेदारी सुनिश्चित करते हुए ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेंगे।

मंत्री ने कहा कि शांति विधेयक को वैज्ञानिक समुदाय, उद्योग जगत, स्टार्टअप और नवाचार तंत्र में व्यापक स्वीकृति मिली है, जो भारत के परमाणु क्षेत्र में सुधार और आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर व्यापक राष्ट्रीय सहमति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक मोदी 3.0 के सुधार-प्रथम दृष्टिकोण का उदाहरण है जिसके तहत विज्ञान आधारित नीतिगत निर्णय 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं।

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