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सरकार प्रत्येक नागरिक को विशेषकर दूरस्थ और द्वीपीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है: रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 13 जनवरी 2026 को लक्षद्वीप के कवरत्ती स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल में भारतीय नौसेना की ओर से आयोजित लगभग एक सप्ताह के संयुक्त सेवा बहु-विशेषज्ञता शिविर को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए कहा, “सरकार देश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर दूरस्थ और द्वीपीय क्षेत्रों में रहने वालों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।” यह शिविर इन द्वीपों में पहली बार आयोजित किया गया था। उन्होंने इस पहल को समुद्री सुरक्षा से आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माण और मानवीय सहायता में भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस शिविर के माध्यम से सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के तीनों सेवाओं के दल ने उन्नत निदान सुविधाएं और विशेषज्ञ देखभाल सुविधा सीधे लोगों के घर तक पहुंचाई है जिनमें नियोजित शल्य चिकित्सा और मोतियाबिंद के ऑपरेशन जैसी सेवाएं शामिल हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि व्यापक रूप से जांच, शीघ्र निदान, समय पर चिकित्सा सलाह, चिकित्सा हस्तक्षेप और दवाओं का निःशुल्क वितरण इन द्वीपों के समुदायों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ में योगदान देगा। उन्होंने यह भी कहा कि “हम स्वस्थ भारत के संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। हमने न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में भौतिक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया है बल्कि आयुष्मान भारत और जन औषधि केंद्रों जैसी पहलों के माध्यम से लोगों के कल्याण का भी ध्यान रखा है।”

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने शिविर का औपचारिक उद्घाटन करते हुए इस पहल को तीन मायनों में अद्वितीय बताया – ‘तालमेल’, क्योंकि यह शिविर तीनों सेनाओं और स्थानीय प्रशासन के पेशेवरों के साथ मिलकर किया गया एक सच्चा संयुक्त प्रयास है; ‘दायरा’, क्योंकि इसमें हृदय रोग, नेत्र रोग, मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा, गुर्दे की बीमारी, तंत्रिका विज्ञान, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, त्वचा रोग और अंतःस्रावी रोग जैसे विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी है और ‘व्यापकता’, क्योंकि इस शिविर के लिए बड़ी संख्या में चिकित्सा जगत के पेशेवरों और सहायक कर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस तरह की संयुक्त पहल सेवाओं के बीच आपसी तालमेल और नागरिक-सैन्य सहयोग को मजबूत करती है और साथ ही नागरिकों के कल्याण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

उद्घाटन समारोह के बाद, नौसेना प्रमुख ने मरीजों से बातचीत की और मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा के लाभार्थियों को चश्मे, आई ड्रॉप और दवाइयां सौंपीं। उद्घाटन समारोह में दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा की महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, प्रशासक के सलाहकार श्री साई बी दीपक के साथ-साथ सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी, नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधि और स्थानीय जनता के बीच से भी लोग उपस्थित थे।

रक्षा मंत्री की परिकल्पना के अनुसार, भारतीय नौसेना पांच द्वीपों – अमिनी, एंड्रोथ, अगत्ती, कवरत्ती और मिनिकॉय – में बहु-विशेषज्ञता शिविर आयोजित कर रही है ताकि वहां के निवासियों को व्यापक चिकित्सा देखभाल प्रदान की जा सके तथा अधिकतम पहुंच और सुगमता सुनिश्चित की जा सके। जिन रोगियों को आवश्यकता है, उनके मोतियाबिंद की सर्जरी करने के लिए कवरत्ती में एक समर्पित नेत्र रोग टीम तैनात की गई है।

इस शिविर के अंतर्गत देशभर के विभिन्न प्रतिष्ठानों से सशस्त्र बलों के 29 चिकित्सा अधिकारी, दो नर्सिंग अधिकारी और 42 पैरामेडिकल कर्मी तैनात किए गए हैं। लक्षद्वीप में पहले से स्थापित सरकारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली है जिसमें जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। इन सेवाओं में सहायता के लिए चिकित्सा उपकरण, भंडार और दवाओं की उपलब्धता बढ़ाई गई है जिससे संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञों और विशिष्ट रोगों के विशेषज्ञों की देखभाल तक पहुंच संभव हो सके। अगत्ती और मिनिकॉय में ऑपरेशन और प्रक्रिया संबंधी आवश्यकताओं के प्रबंधन के लिए समर्पित शल्य चिकित्सा दलों को भी तैनात किया गया है।

इस शिविर की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें केवल दो दिनों के भीतर लगभग 50 ऐसी शल्य चिकित्सा की गई जिससे लोगों की दृष्टि वापस लाई जा सकी। इसमें आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के विशेषज्ञों की ओर से द्वीप के निवासियों को विश्व स्तरीय नेत्र चिकित्सा देखभाल सुविधा प्रदान की जा रही है और आने वाले कुछ दिनों में इस तरह की और भी कई सर्जरी की जाएंगी।

बुजुर्गों को आंखों की रोशनी वापस मिली (कवरत्ती द्वीप)

अमिनी के स्थानीय निवासी 65 वर्षीय कुनी कोया मोतियाबिंद से पीड़ित थे जिसके कारण वे लगभग अंधे हो गए थे। उनकी सफल सर्जरी इस शिविर के मूल उद्देश्य को दर्शाती है – यह सुनिश्चित करना कि भारत के सबसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश के निवासी कभी भी अंधेरे में न रह जाएं।

अगत्ती में महत्वपूर्ण सफलता (खालिद सी, 68)

कई वर्षों तक खालिद की दुनिया अपने पुराने स्वरूप की धुंधली परछाई मात्र रह गई थी। आज वह इस ऐतिहासिक मिशन का प्रतीक बन गया क्योंकि अत्याधुनिक तकनीक का पहली बार अगत्ती की धरती पर प्रयोग किया गया। उसने फुसफुसाते हुए कहा, “मुझे लगा जैसे समुद्र का कोहरा मेरी आत्मा में समा गया हो,” उसकी आँखें एक दशक में पहली बार साफ थीं। उसने कहा, “आज, नौसेना ने मुझे मेरे घर का नीला रंग लौटा दिया”।

इस शिविर में चिकित्सकीय उपचार के अतिरिक्त समग्र स्वास्थ्य पर भी विशेष बल दिया गया है जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इस दृष्टिकोण के अनुरूप है कि अच्छा स्वास्थ्य केवल रोगों से मुक्ति ही नहीं, बल्कि सभी के लिए संपूर्ण कल्याण और खुशहाली की गारंटी है। नागरिकों को निवारक स्वास्थ्य देखभाल, जीवनशैली में बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी और पोषण संबंधी परामर्श दिए गए। भारत की पारंपरिक और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के अंतर्गत बाजरा के लाभों पर प्रकाश डालते हुए आहार संबंधी मार्गदर्शन, साथ ही योग और स्वास्थ्य संबंधी अभ्यास भी प्रदान किए गए ताकि दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो सकें।

यह पहल प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है जिसके अंतर्गत देश के सुदूरतम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों सहित प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की समान पहुंच सुनिश्चित की जाती है। आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों की भावना को दर्शाते हुए यह शिविर उपचारात्मक देखभाल को निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ कर देश के वैश्विक स्वास्थ्य दर्शन ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ को रेखांकित करता है।

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