ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान

ग्रामीण भारत में आजीविका के अवसरों का विस्तार और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान का शुभारंभ किया है। यह अभियान दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के व्यापक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाना और विविधतापूर्ण व संवहनीय आजीविकाओं को प्रोत्साहित करना है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगा राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान

गैर कृषि आजीविकाओं पर विशेष फोकस

दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है कि केवल कृषि आधारित आय ग्रामीण परिवारों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी कारण गैर कृषि क्षेत्र के ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देना एक प्रमुख उपाय के रूप में उभरा है। पिछले कुछ वर्षों में स्टार्ट अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम सहित कई योजनाओं ने यह सिद्ध किया है कि यदि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ताओं का सहयोग मिले, तो ग्रामीण क्षेत्रों में सफल उद्यम मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।

ये सामुदायिक कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर उत्प्रेरक की भूमिका निभाते हैं। वे उद्यम के अवसरों की पहचान से लेकर स्टार्ट अप सहायता, मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग तक पूरी श्रृंखला में उद्यमियों के साथ जुड़े रहते हैं। इससे न केवल उद्यमों की सफलता की संभावना बढ़ती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी स्थायित्व आता है।

लखपति दीदी लक्ष्य और बड़े पैमाने पर उन्नयन

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कम से कम तीन करोड़ स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों को लखपति दीदी बनाने का संकल्प लिया है, जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक हो। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वयं सहायता समूह आंदोलन का बड़े पैमाने पर उन्नयन आवश्यक है। इसके लिए कौशल विकास, उद्यमिता प्रशिक्षण, बाजार संपर्क और वित्तीय संस्थानों तक पहुंच को एकीकृत रूप से सुदृढ़ किया जा रहा है।

राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो महिलाओं को केवल आजीविका तक सीमित न रखकर उन्हें उद्यमी के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।

अभियान का औपचारिक शुभारंभ और भागीदार संस्थान

इन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण विकास विभाग के अपर सचिव द्वारा 12 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर नीति निर्माण, वित्त, अनुसंधान और उद्यम विकास से जुड़े कई प्रमुख संस्थानों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में नीति आयोग के विकास एवं जनसंपर्क सलाहकार, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष, Bill & Melinda Gates Foundation, IFMR LEAD (KREA University), भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान तथा IIM Calcutta Innovation Park के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके साथ ही राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के वरिष्ठ निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अपनी टीमों के साथ उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की व्यापक योजना

राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान का मुख्य उद्देश्य पचास हजार सामुदायिक संसाधन प्रतिनिधियों को उद्यम प्रोत्साहन का प्रशिक्षण देना और उनका क्षमता वर्धन करना है। ये प्रतिनिधि आगे चलकर मिशन के अंतर्गत जुड़े लगभग पचास लाख स्वयं सहायता समूह सदस्यों को उद्यमिता विकास का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इस बहुस्तरीय प्रशिक्षण ढांचे से जमीनी स्तर तक ज्ञान और कौशल का प्रभावी प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा।

यह मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक न रहकर स्थानीय आवश्यकताओं और अवसरों के अनुरूप व्यावहारिक बने। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम स्तर के गैर कृषि उद्यमों की संख्या और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि की संभावना है।

ग्रामीण भारत के लिए दीर्घकालिक प्रभाव

राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान ग्रामीण भारत में उद्यम विकास और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है। यह अभियान हजारों प्रशिक्षित सामुदायिक संसाधन प्रतिनिधियों को तैयार करने के साथ साथ लाखों ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित करेगा।

इस पहल से एक सुदृढ़, समावेशी और आत्मनिर्भर गैर कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। साथ ही जमीनी स्तर के उद्यमों और उद्यम ऋणों के लिए औपचारिक वित्तीय संस्थानों से संपर्क के नए अवसर खुलेंगे। दीर्घकाल में यह अभियान न केवल ग्रामीण आय में वृद्धि करेगा, बल्कि महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान करेगा।

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